SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि निजी पक्ष भी उपलब्ध वीडियो संभालकर रख सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सबूत के तौर पर पेश किया जा सके।

सुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शनों में महिला पत्रकारों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों पर भी गंभीरता दिखाई गई। कोर्ट ने इन आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए समिति बनाने के संकेत दिए हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से जरूरी दस्तावेज 2 सीलबंद लिफाफों में पेश करने को कहा है।

SIR याचिकाओं पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर INDIA गठबंधन और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। महाराष्ट्र में SIR के तहत वोटरों के नाम काटे जाने का मामला भी अदालत में उठाया गया।

CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने सुनवाई के बाद कहा कि वह अदालत के रुख से संतुष्ट हैं। उनके अनुसार, उन्हें बिना वकील की मदद के अपनी बात रखने का अवसर मिला और कोर्ट ने मामले के सभी तथ्यों की पूरी सुनवाई का संकेत दिया। ब्रिटास ने बताया कि उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था, जिसे अंतरिम याचिका में बदलकर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

12 अक्टूबर के मार्च पर अदालत की नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर अदालत तक मार्च के मामले में राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य लोगों को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं डाल सकता।

कोर्ट ने 12 अक्टूबर के मार्च और उससे जुड़ी अव्यवस्था पर राहुल गांधी के आचरण को लेकर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि उन्हें अपनी मंशा और पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देना होगा। इस मामले में पुलिस कमिश्नर का हलफनामा और DMRC तथा दिल्ली पुलिस के हलफनामे भी अदालत में दाखिल किए गए।

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था। इसके विपरीत, जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया।

महिला पत्रकारों और वीडियो रिकॉर्डिंग पर बहस

महिला पत्रकारों की गिरफ्तारी और कथित हमले के मुद्दे पर अदालत में तकनीक और पत्रकारिता की पहचान को लेकर भी चर्चा हुई। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आज मोबाइल रखने वाला कोई भी व्यक्ति खुद को पत्रकार बता सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग रिकॉर्डिंग के बाद सामग्री को रील के रूप में अपलोड करते हैं, जिससे स्वतंत्र पत्रकार और रील बनाने वाले व्यक्ति के बीच अंतर करना मुश्किल होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को डराने-धमकाने के आरोपों पर भी सख्त रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान कहा गया कि किसी वकील को डराया या धमकाया नहीं जा सकता। प्रदर्शन से संबंधित वीडियो और दस्तावेज सुरक्षित रखने का निर्देश इसी संदर्भ में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा

इसी बीच, अभिजीत दिपके, कपिल सिब्बल, प्रकाश राज, प्रशांत भूषण और नेहा बोरा की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा हुआ। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्ञानेश कुमार के लिए अपने ही नागरिकों के खिलाफ जंग छेड़ दी है।

दिपके ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग ने SIR के तहत भारत में 13 करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों से मिले जिन्हें ज्ञानेश कुमार की SIR प्रक्रिया ने मृत घोषित कर दिया था। ये दावे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किए गए।

जंतर-मंतर को लेकर सवाल

जंतर-मंतर को डिनोटिफाई किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि यह फैसला अदालत की मौखिक टिप्पणियों के कारण लिया गया या आम प्रदर्शन स्थल के रूप में उसकी उपयोगिता पर विचार करने के बाद। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस निर्णय का आधार नहीं है।

# निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य वीडियो सुरक्षित रखने, महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न की जांच पर विचार करने तथा SIR संबंधी याचिकाओं में केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। मार्च, हिरासत, प्रेस कॉन्फ्रेंस और जंतर-मंतर से जुड़े मुद्दे भी सुनवाई में उठे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज पर क्या निर्देश दिया?

अदालत ने पुलिस अधिकारियों को सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। निजी पक्ष भी उपलब्ध वीडियो सुरक्षित रख सकते हैं।

Q. महिला पत्रकारों के मामले में अदालत ने क्या कहा?

कोर्ट ने कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों पर गंभीरता दिखाई। उसने जांच के लिए समिति बनाने के संकेत दिए।

Q. SIR याचिकाओं में किन्हें नोटिस दिया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। याचिकाएं INDIA गठबंधन और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की ओर से दायर की गई थीं।

Q. 12 अक्टूबर के मार्च पर अदालत की क्या टिप्पणी थी?

अदालत ने मार्च और उससे जुड़ी अव्यवस्था पर नाराजगी जताई। राहुल गांधी से अपनी मंशा और घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

Q. जॉन ब्रिटास ने सुनवाई के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि वह अदालत के रुख से संतुष्ट हैं। उनके अनुसार, उन्हें खुद अपनी बात रखने का अवसर मिला।

Q. प्रेस कॉन्फ्रेंस में किन लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके, कपिल सिब्बल, प्रकाश राज, प्रशांत भूषण और नेहा बोरा शामिल थे।