भारत दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में समझौते के अंतिम प्रावधान या हस्ताक्षर की तारीख नहीं बताई गई है।

रुबियो के बयान से यह साफ है कि व्यापार वार्ता को अमेरिका में गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन भारत के साथ व्यापार समझौता पूरा करने की कोशिश कर रहा है और बातचीत अंतिम चरण के करीब है।

रूस से तेल खरीद और प्रतिबंधों का मुद्दा

रुबियो ने रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों में छूट के सवाल पर भी बात की। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर को ऐसे फैसलों में ध्यान रखने वाले प्रमुख कारकों में शामिल बताया।

अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, विदेश नीति से जुड़े फैसलों में राष्ट्रीय हित के साथ कई दूसरे पहलुओं पर भी विचार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक स्थिति भी वास्तविकता है और कुछ देशों के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत तलाशना आसान नहीं होता।

रुबियो ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति को बहाना नहीं माना जा सकता, लेकिन विदेश नीति तय करते समय अलग-अलग हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

ट्रंप के फैसले का संदर्भ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने के फैसले को रोक दिया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने इसके पीछे सुरक्षा से जुड़ा कारण बताया था।

रुबियो ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि ट्रंप 60 दिनों का समय लेकर रूस पर प्रतिबंधों और दूसरे देशों पर टैरिफ के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर को समझना चाहते हैं।

इसी संदर्भ में भारत की रूसी तेल खरीद का भी उल्लेख हुआ। रुबियो ने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन वह अब भी रूस से काफी मात्रा में तेल खरीद रहा है। उनके अनुसार, कोई भी देश रातों-रात पूरी तरह किसी दूसरे स्रोत पर निर्भर नहीं हो सकता।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है

भारत के लिए सबसे बड़ा संकेत यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने की बात सामने आई है। इससे बातचीत की मौजूदा स्थिति का पता चलता है, लेकिन डील को पक्का मानने से पहले औपचारिक घोषणा जरूरी होगी।

रूस से ऊर्जा खरीद का मुद्दा भी इस बातचीत के व्यापक संदर्भ में सामने आया है। अमेरिका ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों, राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को अपने फैसलों में तौल रहा है।

उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते में किन वस्तुओं, शुल्कों या क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। इसलिए फिलहाल पुष्टि किया गया तथ्य यही है कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के करीब होने की बात कह रहे हैं।

निष्कर्ष

मार्को रुबियो के बयान से भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सकारात्मक संकेत मिला है। समझौता अंतिम रूप लेने के करीब बताया गया है, जबकि रूस से तेल खरीद और प्रतिबंधों में छूट का मुद्दा अमेरिकी फैसलों के व्यापक संदर्भ का हिस्सा बना हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मार्को रुबियो ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं।

Q. क्या ट्रेड डील पर हस्ताक्षर हो चुके हैं?

उपलब्ध जानकारी में हस्ताक्षर की पुष्टि नहीं की गई है। केवल यह कहा गया है कि समझौता अंतिम चरण के करीब है।

Q. रूस से जुड़े किस मुद्दे पर रुबियो ने बात की?

उन्होंने रूसी तेल और गैस से जुड़े प्रतिबंधों में छूट तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर उसके असर की बात की।

Q. भारत की रूसी तेल खरीद पर अमेरिका का क्या रुख बताया गया?

रुबियो ने कहा कि भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन वह अब भी रूस से काफी मात्रा में तेल खरीदता है।

Q. ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर टैरिफ के बारे में क्या फैसला लिया था?

डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने के फैसले को रोक दिया था।