विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सामान्य रिश्तों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती इलाकों में तनाव का असर दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर पड़ता है।

जयशंकर ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बातचीत के दौरान कहा कि यदि चीन भारत के साथ सामान्य संबंध चाहता है, तो सीमा की स्थिति स्थिर होनी चाहिए। उनके मुताबिक, सीमा से जुड़े मतभेद पुराने हैं, लेकिन 2020 की झड़प ने रिश्तों पर गहरा असर डाला।

2020 की झड़प के बाद बदले रिश्ते

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का औपचारिक निर्धारण नहीं हुआ है। उन्होंने इसे कई दशकों से चला आ रहा मुद्दा बताया। उनके अनुसार, 1975 से 2020 तक 45 साल की अवधि में सीमा पर खून-खराबे की घटना नहीं हुई थी। 1975 में आखिरी बार मौतें हुई थीं।

जयशंकर ने कहा कि इस अवधि में दोनों देशों के संबंधों में सुधार हुआ। हालांकि, 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान सीमा पर कई मुद्दे सामने आए और स्थिति झड़प तक पहुंची। इस घटना में दोनों पक्षों के कई सैनिक मारे गए।

उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करने की प्रक्रिया में समय लगा और इस दौरान बातचीत हुई। जयशंकर के मुताबिक, 2024 के बाद से सीमा से जुड़े इलाके काफी हद तक शांत हुए हैं। उन्होंने इसे भारत-चीन संबंधों के सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने से जोड़ा।

विदेश मंत्री का संदेश यह है कि दोनों देशों के बीच दूसरे क्षेत्रों में रिश्ते आगे बढ़ाने से पहले सीमा पर स्थिरता जरूरी है। उन्होंने सीमा पर शांति और स्थिरता को सामान्य संबंधों की बुनियादी शर्त के रूप में रखा।

लद्दाख की 28 जगहों की पहचान पर विवाद

जयशंकर का बयान उस समय आया है जब लद्दाख की कुछ रणनीतिक जगहों के नाम रखने के भारत के कदम पर चीन ने आपत्ति जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम का विरोध किया है। इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने लद्दाख को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद 28 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर मानक नामों के साथ दर्ज किया गया है। यह प्रक्रिया लद्दाख प्रशासन और स्थानीय हितधारकों के साथ बातचीत के बाद की गई।

मंत्रालय ने कहा कि इन स्थानों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में उनके बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह कदम संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र की आधिकारिक मैपिंग से जुड़ा है।

2 अक्टूबर को आधिकारिक मैपिंग

भारत ने 2 अक्टूबर को लद्दाख की 28 रणनीतिक जगहों और भौगोलिक विशेषताओं की आधिकारिक नक्शे पर पहचान की थी। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं।

यह काम लद्दाख प्रशासन के साथ मिलकर किया गया। इसके बताए गए उद्देश्यों में आधिकारिक मैपिंग को बेहतर बनाना, स्थानों की सटीक पहचान कायम करना और संवेदनशील सीमा क्षेत्र के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ाना शामिल है।

निष्कर्ष

जयशंकर के बयान के मुताबिक, भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में सीमा पर शांति और स्थिरता सबसे अहम मुद्दा है। इसी बीच लद्दाख की 28 जगहों की आधिकारिक पहचान को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों को लेकर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि सामान्य संबंधों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है।

Q. 2020 की घटना का दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर पड़ा?

जयशंकर के अनुसार, 2020 की सीमा झड़प का भारत-चीन संबंधों पर गहरा असर पड़ा।

Q. सीमा पर 1975 से 2020 के बीच क्या स्थिति थी?

जयशंकर ने कहा कि इस 45 साल की अवधि में सीमा पर खून-खराबे की घटना नहीं हुई थी।

Q. लद्दाख की कितनी जगहों की आधिकारिक पहचान की गई?

भारत ने लद्दाख की 28 रणनीतिक जगहों और भौगोलिक विशेषताओं की पहचान की।

Q. इन जगहों में कौन से प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं?

इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास स्थित गोगरा और हॉट स्प्रिंग शामिल हैं।

Q. चीन ने किस कदम पर आपत्ति जताई?

चीन ने लद्दाख में कुछ रणनीतिक जगहों के नाम रखने के भारत के कदम का विरोध किया।