रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में गोला-बारूद की बढ़ती जरूरत से भारतीय डिफेंस कंपनियों के निर्यात में तेज उछाल आया है। व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने यूरोपीय देशों को कम से कम 87.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का गोला-बारूद निर्यात किया।
यह निर्यात युद्ध से पहले के 4 साल के मुकाबले 1,600% से ज्यादा बढ़ा है। भारत ने इस दौरान फाइटर जेट या मिसाइल नहीं बेचीं। सप्लाई में तोप के गोले, मोर्टार शेल, विस्फोटक और गोला-बारूद में इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्री शामिल है।
13 देशों में बढ़ी भारतीय सप्लाई
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में Trade Data Monitor और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। इन आंकड़ों के अनुसार, युद्ध से पहले के 4 साल में यूरोप को भारत का ऐसा निर्यात 4.92 करोड़ डॉलर था। अब यह कम से कम 87.2 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।
इस निर्यात का करीब तीन-चौथाई हिस्सा पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को गया। ये देश यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। युद्ध के बाद इन देशों में गोला-बारूद की मांग बढ़ी है।
इन 13 देशों को गोले, मोर्टार, विस्फोटक और उनसे जुड़ी सामग्री देने वाले देशों में भारत अब दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर है। 4 साल पहले भारत इसी सूची में 28वें स्थान पर था।
डिफेंस सेक्टर के लिए बढ़ा कारोबारी मौका
भारत के डिफेंस निर्यात में यह बढ़ोतरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान और आयात पर निर्भरता घटाने की नीति के बीच हुई है। सरकार ने अप्रैल में बताया था कि मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत का कुल डिफेंस निर्यात 63% बढ़कर 4 अरब डॉलर हो गया।
यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा और करीब एक दशक पहले की तुलना में लगभग 25 गुना है। इसमें वे निर्यात सौदे भी शामिल हैं, जिन्हें मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उनकी डिलीवरी अभी नहीं हुई है।
सरकारी डिफेंस कंपनियों ने इस बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई है। इनमें Munitions India Ltd. भी शामिल है, जो भारत में गोला-बारूद बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रवि कांत ने कहा कि घरेलू बाजार के साथ विदेशी ग्राहकों तक पहुंच बनाना कारोबार बढ़ाने के लिए जरूरी था।
रूस से रिश्तों के बीच चर्चा
भारत लंबे समय से रूस का प्रमुख हथियार खरीदार रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के आधे से ज्यादा लड़ाकू विमान रूसी मूल के हैं। दूसरी ओर, यूरोप के ज्यादातर देश रूस को अपना दुश्मन मानते हैं। इसी वजह से यूरोपीय देशों को भारतीय कंपनियों की हथियार सप्लाई चर्चा में है।
भारतीय अधिकारियों और रक्षा उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, इन सौदों की मुख्य वजह कारोबारी मांग है। भारत ने बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह खड़े होने के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की नीति अपनाई है।
यूक्रेन तक पहुंच पर क्या कहा गया
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सीधे यूक्रेन को हथियार भेजने की पुष्टि नहीं करता। हालांकि, यूक्रेन के सीमा शुल्क रिकॉर्ड में फरवरी 2024 में भारतीय मूल के 155 मिलीमीटर तोप के गोलों की कम से कम 78 खेप दर्ज होने का उल्लेख है। इनकी कीमत 6.28 करोड़ डॉलर बताई गई है।
इन दस्तावेजों में अमेरिका की कंपनी Regulus Global LLC को निर्यातक और यूक्रेन की सरकारी कंपनी SpetsTechnoExport को आयातक बताया गया है। रिकॉर्ड यह स्पष्ट नहीं करते कि इन हथियारों की आगे आपूर्ति किस तरह हुई।
निष्कर्ष
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में गोला-बारूद की मांग बढ़ने से भारत का इस क्षेत्र में निर्यात तेजी से बढ़ा है। 13 पूर्वी और मध्य यूरोपीय देशों में भारत दक्षिण कोरिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. भारत ने यूरोप को कितना गोला-बारूद निर्यात किया?
भारत ने युद्ध शुरू होने के बाद यूरोपीय देशों को कम से कम 87.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का गोला-बारूद निर्यात किया।
Q. भारत ने यूरोप को कौन-से रक्षा उत्पाद भेजे?
सप्लाई में तोप के गोले, मोर्टार शेल, विस्फोटक और गोला-बारूद में इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्री शामिल है।
Q. भारत का यूरोप को गोला-बारूद निर्यात कितना बढ़ा?
युद्ध से पहले के 4 साल की तुलना में यह निर्यात 1,600% से ज्यादा बढ़ा है।
Q. भारत किन यूरोपीय देशों को सप्लाई कर रहा है?
निर्यात का करीब तीन-चौथाई हिस्सा पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को गया है।
Q. इन देशों को सप्लाई करने में भारत का स्थान क्या है?
भारत दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर है। 4 साल पहले वह 28वें स्थान पर था।
Q. क्या भारत सीधे यूक्रेन को हथियार भेजने की पुष्टि करता है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत सीधे यूक्रेन को हथियार भेजने की पुष्टि नहीं करता। सीमा शुल्क रिकॉर्ड में भारतीय मूल के तोप के गोलों की खेप का उल्लेख है, लेकिन उनकी आगे की आपूर्ति स्पष्ट नहीं है।





