मार्को रुबियो के मुंबई और जामनगर दौरे से पहले ग्लोबल टाइम्स ने भारत-अमेरिका संबंधों पर तीखी टिप्पणी की है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र के संपादकीय में कहा गया कि अमेरिका भारत को रणनीतिक साझेदार बताता है, लेकिन व्यापार से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख अलग दिखाई देता है।

संपादकीय के अनुसार, वाशिंगटन भारत से रणनीतिक सहयोग पर चर्चा करना चाहता है, जबकि नई दिल्ली की प्राथमिकता टैरिफ के मुद्दे पर बातचीत करना है। ग्लोबल टाइम्स ने दोनों देशों के एजेंडे को अलग-अलग बताया और कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार ढांचा समझौते पर फरवरी में सहमति बनने के बावजूद अब तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका की नीति पर क्या कहा

ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया कि अमेरिका पहले रणनीतिक वादों के जरिये प्रभाव बढ़ाता है और बाद में आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करता है। संपादकीय में इस नीति को भारत को अपने प्रभाव में रखने की कोशिश के रूप में पेश किया गया है।

लेख में इंडो-पैसिफिक रणनीति, साझा मूल्यों और क्वाड का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अमेरिका भारत को एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार बताता है। इसके साथ ही भारतीय स्टील पर शुल्क, दवा उद्योग पर दबाव और भारतीय आईटी सेवाओं के लिए मुश्किलों को अमेरिकी व्यापार रुख के उदाहरण के तौर पर गिनाया गया।

ग्लोबल टाइम्स ने यह भी दावा किया कि इसी अवधि में अमेरिका ने जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ बेहतर व्यवहार किया। संपादकीय में इन देशों और भारत के बीच अमेरिकी संबंधों के फर्क को रेखांकित किया गया है।

भारत के सामने बताई गई 3 शर्तें

संपादकीय में दावा किया गया कि अमेरिका भारत से तीन बातें चाहता है। पहली, भारत रूसी तेल खरीदना बंद करे। दूसरी, वह अपना कृषि क्षेत्र अमेरिकी उत्पादों के लिए खोले। तीसरी, भारत अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाए।

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, भारत ने इन शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। लेख में कहा गया कि नई दिल्ली उन शर्तों पर सहमत होने से बच रही है, जिनसे उसके लंबे समय के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

संपादकीय ने भारत के इस रुख को टैरिफ नीति से जुड़े कानूनी विवादों से भी जोड़ा है। इसमें कहा गया कि नीति बदलने की आशंका के कारण भारत किसी ठोस वादे को लेकर सावधानी बरत रहा है। यह टिप्पणी ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में व्यक्त की गई है।

निर्यात और टैरिफ को लेकर दावा

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि 2026 में भारत का निर्यात तेजी से बढ़ा है। संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि अगर अमेरिकी टैरिफ फिर से 25 प्रतिशत तक बढ़ते हैं, तो भारत की विकास गति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

लेख के अनुसार, भारत के लिए अमेरिका का रणनीतिक साझेदार कहलाना पहले जितना महत्वपूर्ण नहीं रह गया है। ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका पर साझेदार देशों को उनकी उपयोगिता के आधार पर प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

संपादकीय में जापान और दक्षिण कोरिया को अमेरिका का सैन्य सहयोगी तथा ऑस्ट्रेलिया को फाइव आइज का हिस्सा बताया गया। इसके विपरीत, भारत को अमेरिकी रणनीति में ऐसा देश बताया गया जिसकी भूमिका बदली जा सकती है। यह आकलन भी ग्लोबल टाइम्स के लेख का हिस्सा है।

निष्कर्ष

रुबियो के भारत दौरे से पहले ग्लोबल टाइम्स ने भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापार, टैरिफ और ऊर्जा के मुद्दों से जोड़कर देखा है। संपादकीय का दावा है कि भारत अमेरिका की बताई गई 3 शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रहा है और किसी ऐसे समझौते से बचना चाहता है, जिसे वह अपने दीर्घकालिक हितों के खिलाफ मानता हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. ग्लोबल टाइम्स ने यह संपादकीय कब लिखा?

यह संपादकीय मार्को रुबियो के मुंबई और जामनगर दौरे से पहले प्रकाशित किया गया।

Q. संपादकीय में भारत-अमेरिका बातचीत का मुख्य मुद्दा क्या बताया गया?

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर बात करना चाहता है, जबकि भारत टैरिफ के मुद्दे पर चर्चा करना चाहता है।

Q. अमेरिका की बताई गई 3 शर्तें क्या हैं?

संपादकीय के अनुसार, इनमें रूसी तेल की खरीद रोकना, कृषि क्षेत्र खोलना और अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाना शामिल है।

Q. क्या भारत ने इन शर्तों को स्वीकार कर लिया है?

ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका की इन शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है।

Q. टैरिफ को लेकर क्या दावा किया गया है?

संपादकीय में कहा गया कि अमेरिकी टैरिफ 25 प्रतिशत तक लौटे तो भारत की विकास गति प्रभावित हो सकती है।