दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के जरिए राजधानी में विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों का बचाव किया है। पुलिस ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए।
हलफनामा पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने दाखिल किया है। इसमें कोर्ट के निर्देशों के पालन और राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, दिल्ली में कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान हैं। यहां वीवीआईपी आवाजाही, राजनयिक दौरे और बड़े कार्यक्रम होते रहते हैं। इसी वजह से ऐसे मौकों पर उच्च स्तर की सतर्कता जरूरी बताई गई है।
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन का उल्लेख
हलफनामे में 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र है। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के जुटने की आशंका थी।
इसी आशंका को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल समेत कई राजनीतिक नेताओं, वकीलों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है।
पुलिस के अनुसार, इस अभियान के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में 7000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई का अलग-अलग विवरण की जानकारी अभी नहीं है।
मेट्रो सेवाओं पर भी उठाए गए कदम
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को 10 अक्टूबर की रात 10 बजे से सामान्य मेट्रो सेवाएं बहाल करने के लिए कहा था। इससे पहले पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मेट्रो संचालन में बदलाव का अनुरोध किया था।
पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बिगड़ने और संवेदनशील इलाकों की ओर भीड़ बढ़ने की आशंका के कारण 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से 10 अक्टूबर की शाम 6 बजे तक 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने और ट्रेनों की आवाजाही कम करने का अनुरोध किया गया था।
हलफनामे में यह भी कहा गया कि बाद में सामान्य मेट्रो सेवाएं बहाल करने के लिए कदम उठाए गए। इन पाबंदियों और बहाली से जुड़े मामलों का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब के संदर्भ में किया गया है।
गृह सचिव ने भी जवाब दाखिल किया
इसी मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने भी सुप्रीम कोर्ट में अवमानना नोटिस का जवाब देते हुए हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक रायसीना हिल्स के 4-किमी के दायरे में सेल्युलर इंटरनेट सेवाएं निलंबित किए जाने का बचाव किया।
दोनों हलफनामों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कदमों का पक्ष रखा गया है। दिल्ली पुलिस का जवाब विशेष रूप से प्रदर्शन, हिरासत, मेट्रो संचालन और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर केंद्रित है।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन संबंधी पाबंदियों को वीवीआईपी आवाजाही, राजनयिक दौरों, बड़े कार्यक्रमों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के आधार पर उचित ठहराया है। मामले में पुलिस और केंद्रीय गृह सचिव, दोनों के हलफनामे अदालत के सामने हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दाखिल किया?
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों के बचाव में हलफनामा दाखिल किया।
Q. हलफनामा किसने दाखिल किया?
हलफनामा पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने दाखिल किया।
Q. CJP किसके खिलाफ प्रदर्शन करना चाहती थी?
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का प्रस्ताव रखा था।
Q. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को अनुमति क्यों नहीं मिली?
पुलिस ने जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दी थी। हलफनामे में प्रदर्शनकारियों के जुटने की आशंका का उल्लेख किया गया।
Q. कितने लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 7000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।
Q. मेट्रो सेवाओं से जुड़ा क्या फैसला हुआ?
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे से सामान्य सेवाएं बहाल करने के लिए कहा था।




