नेपाल और चीन के सीमा क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने कई समुदायों को प्रभावित किया। इस आपदा में कम से कम 160 लोगों की मौत हुई है, जबकि 750 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ के बाद कुछ इलाकों में आवागमन भी रुक गया है।
लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के कई लोग संपर्क से बाहर हैं। इनमें कोलकाता का कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी शामिल है।
तिब्बत से आई बाढ़ ने मचाई तबाही
जानकारी के मुताबिक, बाढ़ का तेज प्रवाह तिब्बत से शुरू हुआ और नेपाल के मध्य हिस्से में कई कस्बों को प्रभावित करता हुआ आगे बढ़ा। वीडियो में तेज बहाव, मलबे से भरे रास्ते और बाढ़ प्रभावित इलाकों में जुटे लोगों को देखा जा सकता है। कई जगहों पर सड़कें और सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों ने इस घटना के पीछे हिमस्खलन की भूमिका की बात कही है। उपलब्ध जानकारी में यह भी बताया गया है कि भोटेकोशी नदी का बहाव बढ़ा हुआ है। स्थानीय लोगों को नदी के बढ़ते स्तर को लेकर चिंता और चेतावनी की सूचना मिली है।
भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता भेजी
भारत की मानवीय सहायता और चिकित्सा सहायता काठमांडू पहुंच गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि राहत प्रयासों के लिए और सहायता जुटाई जा रही है।
भारत की 10-टन मानवीय सहायता नेपाल को सौंप दी गई है। राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सहायता संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड्ग राज पौडेल को सौंपी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह मदद राहत कार्यों में सहयोग करेगी।
राहत सामग्री को भारतीय और नेपाली झंडों वाले पैकेटों में दिखाया गया है। मानवीय सहायता के साथ चिकित्सा मदद भी नेपाल पहुंचाई गई है।
भारतीय नागरिकों की तलाश पर नजर
बाढ़ के बाद पर्यटकों, श्रमिकों और अन्य लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय नागरिकों के लापता होने से नेपाल में फंसे यात्रियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। कोलकाता के यात्रा दल का संपर्क टूटना इसी चिंता का प्रमुख हिस्सा है।
नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत प्रयास जारी हैं। भारत ने अतिरिक्त सहायता जुटाने की जानकारी दी है। फिलहाल, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाना प्राथमिकता बनी हुई है।














