भारत का ब्यूटी बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और इस बदलाव में जेनरेशन ज़ी की भूमिका सबसे अहम दिख रही है। बढ़ती आय, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया ने सौंदर्य उत्पादों को बड़े शहरों से निकालकर देश के कई हिस्सों तक पहुंचाया है।

इस बाजार का मूल्य 2025 में लगभग 23 अरब डॉलर (2.20 लाख करोड़ रुपए) था। इस दशक के अंत तक इसके करीब दोगुना होकर 40 अरब डॉलर (3.83 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने की उम्मीद है। यह वृद्धि देश की जीडीपी (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट) और रीटेल बाजार की रफ्तार से दोगुनी बताई गई है।

भारत की बढ़ती खर्च करने की क्षमता इस उछाल की बड़ी वजहों में शामिल है। रेडसीर के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय 2019 में एक लाख 90 हज़ार रुपए (2,000 डॉलर) से अधिक हो गई थी। 2030 तक करीब 15.5 करोड़ परिवारों की सालाना आय 9 लाख रुपए (9,500 डॉलर) से ज्यादा होने की उम्मीद है।

रेडसीर के पार्टनर कुशल भटनागर के मुताबिक, पहले भारतीय उपभोक्ता ब्यूटी उत्पादों पर सीमित खर्च करते थे। अब पहुंच, वितरण और उत्पादों से जुड़ी जानकारी बेहतर हुई है। इंटरनेट ने ब्रांडों को सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचने में मदद की है।

ई-कॉमर्स की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। रेडसीर का अनुमान है कि 2030 तक ऑनलाइन बिक्री से ब्यूटी उत्पादों पर होने वाले कुल खर्च का करीब 35% हिस्सा आएगा। पांच साल पहले यह हिस्सेदारी केवल 8% थी।

फ्लिपकार्ट के आंकड़ों के अनुसार, उसके ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पादों के लगभग 56% ग्राहक जेन-ज़ी से आते हैं। इनमें 70% ग्राहक सोशल मीडिया के जरिए उत्पादों की जानकारी हासिल करते हैं। प्लेटफॉर्म पर ब्यूटी उत्पादों से जुड़ी दो-तिहाई सर्च गैर-महानगरीय क्षेत्रों से होती हैं।

उद्यमी वैशाली गुप्ता के अनुसार, कोविड महामारी ने लोगों को खुद की देखभाल पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। यह बदलाव टियर-वन, टियर-टू और टियर-थ्री शहरों में डिजिटल पहुंच बढ़ने के साथ आया। उन्होंने 2023 में कृति सैनन के साथ हाइफ़न की सह-स्थापना की। वह एमकैफीन भी चलाती हैं।

गुप्ता के ब्रांडों की कुल आय पिछले एक साल में 100% बढ़ी है। उनका कहना है कि हाइफ़न और एमकैफीन भारत में अपनी श्रेणियों के शीर्ष 10 ब्रांडों में शामिल हैं।

वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी भी बढ़ी है। एस्टी लॉडर ने फॉरेस्ट एसेंशियल्स का पूर्ण अधिग्रहण किया। लोरियल ने इनोविस्ट में मेजोरिटी स्टेक लिया। यूनिलीवर ने अपनी वेंचर कैपिटल शाखा के जरिए भारत के ब्यूटी उत्पादों में कम से कम चार निवेश किए हैं।

रेडसीर के अनुसार, ब्यूटी खर्च में जेन-ज़ी और जेन-अल्फा की हिस्सेदारी 2024 के 32% से बढ़कर 2030 तक लगभग 50% हो सकती है।