रूस में 18 सितंबर से 3 दिन का संसदीय चुनाव शुरू हो गया है। मतदान 20 सितंबर तक चलेगा। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया के संसद में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है। शुरुआती नतीजे 20 सितंबर की शाम से आ सकते हैं और 21 सितंबर तक चुनाव की लगभग पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। इस बार मतदान का महत्व केवल सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं माना जा रहा। पुतिन इसे यूक्रेन युद्ध के बीच जनता के समर्थन और देश की एकजुटता के संकेत के तौर पर पेश करना चाहते हैं।
पुतिन ने शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डाला। चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि लोगों का फैसला बताएगा कि लाखों लोग रूस के सैनिकों के साथ खड़े हैं और देश एकजुट है।
याब्लोको पार्टी चुनाव से बाहर
याब्लोको रूस की एकमात्र रजिस्टर्ड पार्टी थी, जो खुले तौर पर यूक्रेन युद्ध का विरोध करती रही है। पार्टी युद्ध खत्म करने और बातचीत के जरिए शांति की मांग करती है।
रूस की सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में याब्लोको की उम्मीदवारों की सूची का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। अदालत के मुताबिक, पार्टी ने चुनाव प्रचार में ऐसे लोगों से मिले पैसों का इस्तेमाल किया, जिन्हें विदेश से पैसा मिला था। कोर्ट ने प्रचार सामग्री के इस्तेमाल और इंटरनेट प्रचार से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी हवाला दिया।
याब्लोको का कहना है कि उसे वास्तव में यूक्रेन युद्ध के खिलाफ उसके रुख के कारण चुनाव से हटाया गया। पार्टी के कुछ उम्मीदवार अलग-अलग सीटों पर व्यक्तिगत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ अन्य युद्ध विरोधी नेताओं को जेल भेजा गया है या उन्हें रूस छोड़ना पड़ा है।
कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में मतदान
रूस पहली बार यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया के उन इलाकों में भी मतदान करा रहा है, जिन पर उसका कब्जा है। रूस ने 2022 में इन चारों क्षेत्रों को अपने देश में शामिल करने का दावा किया था।
यूक्रेन और ज्यादातर दूसरे देश रूस के इस दावे को मान्यता नहीं देते। रूस का इन चारों इलाकों पर पूरा नियंत्रण भी नहीं है। यूक्रेन और यूरोपीय संघ ने इन क्षेत्रों में हो रहे मतदान को अवैध बताया है।
क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है। रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा करके उसे अपने देश में शामिल कर लिया था। डोनेट्स्क के रूस के कब्जे वाले इलाके में मतदान के दौरान लोगों के पास एक हथियारबंद रूसी सैनिक भी तैनात दिखाई दिया।
चुनाव निगरानी पर सवाल
रूस ने इस बार यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी OSCE के चुनाव पर्यवेक्षकों को नहीं बुलाया है। इससे मतदान की स्वतंत्र निगरानी और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चुनाव के नतीजे यूनाइटेड रशिया के संसद में प्रभाव को बनाए रखने की उम्मीद के बीच आएंगे। इसके साथ ही युद्ध विरोधी राजनीतिक आवाजों की स्थिति और कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में कराए गए मतदान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी इस चुनाव के प्रमुख पहलू हैं।
निष्कर्ष
रूस का यह संसदीय चुनाव पुतिन की पार्टी के संभावित दबदबे के साथ-साथ युद्ध विरोधी दल के बाहर होने और कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में मतदान के कारण महत्वपूर्ण है। शुरुआती नतीजे 20 सितंबर की शाम से आने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. रूस में संसदीय चुनाव कब शुरू हुआ?
रूस में मतदान 18 सितंबर से शुरू हुआ और यह 20 सितंबर तक चलेगा।
Q. रूस में किस पार्टी के जीतने की उम्मीद है?
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का संसद में दबदबा कायम रहने की उम्मीद है।
Q. याब्लोको पार्टी को चुनाव से बाहर क्यों किया गया?
सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों की सूची का रजिस्ट्रेशन रद्द किया। कोर्ट ने विदेशी पैसे से जुड़े प्रचार, प्रचार सामग्री और इंटरनेट प्रचार के नियमों का हवाला दिया।
Q. किन यूक्रेनी इलाकों में मतदान हो रहा है?
डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया के रूस के कब्जे वाले इलाकों में मतदान कराया जा रहा है। क्रीमिया में भी वोटिंग हो रही है।
Q. चुनाव के शुरुआती नतीजे कब आ सकते हैं?
शुरुआती नतीजे 20 सितंबर की शाम से आने शुरू हो सकते हैं। 21 सितंबर तक लगभग पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।














