चीन के शिनजियांग में भूवैज्ञानिकों ने तक्लामकान रेगिस्तान के नीचे 2 बड़े जलस्रोत खोजे हैं। यह खोज रेगिस्तान के किनारों पर रेत रोकने, पेड़ लगाने और खेती बढ़ाने की कोशिशों के लिए पानी का नया स्रोत उपलब्ध करा सकती है।
यह काम शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के भूवैज्ञानिक ब्यूरो की जल खोज परियोजना के तहत हुआ। खोज ने उस धारणा को चुनौती दी है कि रेगिस्तान के नीचे सिर्फ ठहरा हुआ या खारा पानी ही मौजूद है।
जलस्रोत कहां मिले
पहला जलस्रोत तक्लामकान के दक्षिणी किनारे पर मिनफेंग काउंटी के अंदिर टाउनशिप में मिला। दूसरा स्रोत मजार्टाग पर्वतों के दक्षिण में रेगिस्तान के अंदर खोजा गया। तक्लामकान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बदलती रेत वाला रेगिस्तान है।
शोधकर्ताओं ने खारे पानी के इस्तेमाल के लिए एक परीक्षण केंद्र भी बनाया है। खारा-मीठा पानी (Brackish Water) ऐसा पानी होता है जिसमें मीठे पानी से ज्यादा, लेकिन समुद्री पानी से कम नमक होता है। इसका इस्तेमाल रेगिस्तान के किनारे सिंचाई और मरुस्थलीकरण रोकने के लिए जांचा जा रहा है।
खारे पानी को खेती और अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी और फसलों को समझना जरूरी है। कुछ फसलों के लिए पानी से नमक निकालने की प्रक्रिया भी आवश्यक हो सकती है। चीन समेत कई देशों में नमक सहने वाली फसलों पर ऐसे पानी के इस्तेमाल का परीक्षण चल रहा है।
खेती और रेत रोकने की योजनाओं पर असर
तक्लामकान के आसपास चीन बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और मरुस्थलीकरण नियंत्रण के काम कर रहा है। ये प्रयास ग्रेट ग्रीन वॉल (Great Green Wall) पहल का हिस्सा हैं। रेगिस्तान को घेरने वाली पेड़ों, झाड़ियों और रेत रोकने वाले सोलर पैनलों की 3,050 किमी लंबी हरित पट्टी 2024 में पूरी की गई थी। इसका उद्देश्य रेत के तूफानों को रोकना और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना है।
रेगिस्तान की सीमा पर खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए खेती भी की जा रही है। इनमें रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर कुन्यू के काउंटी-स्तरीय शहर में बनाया गया गेहूं फार्म शामिल है। हालांकि पिवट और ड्रिप इरिगेशन जैसी पानी बचाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है, खेती और रेत नियंत्रण की योजनाओं के लिए पानी की उपलब्धता अब भी चिंता बनी हुई है।
पानी की कमी का बड़ा संदर्भ
तक्लामकान तारिम बेसिन में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 337,600 वर्ग किमी है। इसका आकार जर्मनी के लगभग बराबर बताया जाता है। बदलते रेत के टीलों और कठिन मौसम के कारण इसे ‘समुद्र-ए-मौत’ भी कहा जाता है।
इस क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से सालाना बारिश बहुत कम रही है और वाष्पीकरण बेहद ज्यादा रहा है। दूसरी ओर, वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ हाल के वर्षों में तेज बारिश और असाधारण बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं। इन घटनाओं से स्थानीय बुनियादी ढांचे को खतरा पैदा हुआ है।
2015 में चीनी विज्ञान अकादमी के शिनजियांग इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड जियोग्राफी के शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया था कि बेसिन के नीचे भूमिगत पानी का ऐसा भंडार हो सकता है, जिसका आयतन उत्तर अमेरिका की सभी 5 ग्रेट लेक्स के संयुक्त आयतन से भी ज्यादा हो।
आगे पानी का इस्तेमाल कैसे जांचा जाएगा
नई खोज के बाद खारे पानी को सिंचाई और मरुस्थलीकरण नियंत्रण में इस्तेमाल करने की व्यवहारिकता पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्थानीय मिट्टी, जलवायु और फसलें इस पानी के साथ कैसा व्यवहार करती हैं।
खारा पानी खेती और कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा सेंटरों की कूलिंग जैसी बढ़ती जरूरतों में मदद कर सकता है। फिर भी, इसके इस्तेमाल की मात्रा सीमित है और हर क्षेत्र के लिए अलग परीक्षण जरूरी होगा।
निष्कर्ष
तक्लामकान के नीचे मिले 2 जलस्रोत शिनजियांग में खेती और रेत नियंत्रण की योजनाओं के लिए नई संभावना दिखाते हैं। अब प्रमुख अगला कदम खारे पानी के सुरक्षित और उपयोगी इस्तेमाल की जांच है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. तक्लामकान रेगिस्तान के नीचे क्या मिला?
2 बड़े जलस्रोत मिले हैं। एक रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर और दूसरा उसके अंदरूनी हिस्से में स्थित है।
Q. जलस्रोत किस क्षेत्र में खोजे गए?
दोनों जलस्रोत चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में खोजे गए हैं।
Q. क्या इस पानी का इस्तेमाल खेती में होगा?
खारे पानी को सिंचाई और मरुस्थलीकरण नियंत्रण के लिए जांचा जा रहा है। कुछ उपयोगों में पानी से नमक निकालना जरूरी हो सकता है।
Q. खारा-मीठा पानी क्या होता है?
इसमें मीठे पानी से अधिक, लेकिन समुद्री पानी से कम नमक होता है।
Q. तक्लामकान रेगिस्तान का क्षेत्रफल कितना है?
इसका क्षेत्रफल 337,600 वर्ग किमी है।
Q. रेगिस्तान के आसपास पानी की जरूरत क्यों है?
पानी की जरूरत रेत रोकने, वृक्षारोपण और रेगिस्तान की सीमा पर खेती के लिए है।














