नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा प्रमुखता से नजर आईं। वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मार्च की अगली कतार में चल रही थीं।
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने कई बार नेहा बोरा और प्रियंका गांधी के कंधों पर हाथ रखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनके पीछे चल रहे थे। इस दृश्य को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हुईं।
कुछ लोगों का मानना है कि नेहा बोरा को राहुल गांधी के साथ आगे रखने का संदेश कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस की कथित रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं है।
नेहा बोरा की भूमिका
नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह जेन-जी छात्र आंदोलनों के प्रमुख चेहरों में गिनी जाती हैं। हाल के प्रदर्शनों में उनकी सक्रिय मौजूदगी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
जून 2026 में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में उन्होंने 23 दिनों की भूख हड़ताल की थी। इसी के बाद वह राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं।
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ रांची में हुए प्रदर्शन के दौरान उनके चेहरे पर स्याही फेंकी गई थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि स्याही फेंकने से छात्रों और युवाओं का गुस्सा दबाया नहीं जा सकेगा।
अक्टूबर 2026 में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में भी वह आगे रही थीं। पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ने के प्रयास के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।
कांग्रेस और आंदोलन को लेकर चर्चा
खबर में कहा गया है कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को जेन-जी का समर्थन मिला है। कांग्रेस के नेताओं ने इस आंदोलन का खुलकर समर्थन नहीं किया। इसके बावजूद नेहा बोरा का राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ आगे चलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
इस घटनाक्रम की तुलना 2012 में आम आदमी पार्टी के आंदोलन से भी की जा रही है। उस समय के आंदोलन के बाद दिल्ली में कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान हुआ था। इसी संदर्भ में यह अटकल लगाई जा रही है कि कांग्रेस ऐसे किसी आंदोलन को लेकर सतर्क हो सकती है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नेहा बोरा की मार्च में मौजूदगी किसी औपचारिक राजनीतिक समर्थन या संगठनात्मक बदलाव का संकेत है। कांग्रेस या नेहा बोरा की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट बयान की जानकारी अभी नहीं है।
कॉकरोच जनता पार्टी की गतिविधियां
खबर के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी समर्थकों का आधार बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही है। संगठन जाने-माने एक्टिविस्ट और राजनीतिक दलों से समर्थन मांगने के साथ युवा छात्र संगठनों से भी संपर्क कर रहा है।
अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए संगठन की गतिविधियों को सामने रखते रहे हैं। इसी बीच नेहा बोरा की राहुल गांधी के साथ मौजूदगी ने आंदोलन और कांग्रेस के संबंधों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी के मार्च में नेहा बोरा की प्रमुख मौजूदगी ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज कर दी हैं। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह मौजूदगी किसी औपचारिक रणनीति या समर्थन का संकेत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. राहुल गांधी के साथ मार्च में कौन शामिल थीं?
राहुल गांधी के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और प्रियंका गांधी वाड्रा आगे चल रही थीं।
Q. मार्च किस मुद्दे पर निकाला गया था?
मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया था।
Q. नेहा बोरा किस संगठन की अध्यक्ष हैं?
नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
Q. नेहा बोरा पहले किन प्रदर्शनों में शामिल रही हैं?
वह नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े प्रदर्शनों में शामिल रही हैं।
Q. क्या कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है?
नहीं। उपलब्ध जानकारी में कांग्रेस की रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी नहीं है।
Q. कॉकरोच जनता पार्टी समर्थक बढ़ाने के लिए क्या कर रही है?
खबर के अनुसार, संगठन सोशल मीडिया, एक्टिविस्ट, राजनीतिक दलों और युवा छात्र संगठनों के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।







