केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 पेज की चिट्ठी लिखकर राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की बात भी कही है।
मुरुगन ने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहते हैं। चिट्ठी में उन्होंने तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के लिए अपना समय देने की इच्छा जताई।
राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था
एल मुरुगन तमिलनाडु के रहने वाले हैं और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उनके राज्यसभा कार्यकाल की अवधि अप्रैल 2030 तक थी। इस्तीफे के बाद उनकी संसदीय भूमिका भी समाप्त करने की प्रक्रिया का सवाल सामने आया है, हालांकि source में आगे की प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई है।
मुरुगन ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा को अपने जीवन का बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने यह भी लिखा कि वह गरीब परिवार से आते हैं और उनके माता-पिता मजदूरी करते थे।
मुरुगन के अनुसार, भाजपा और एबीवीपी में करीब 30 साल काम के दौरान उनका मूल मंत्र रहा है—राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और खुद सबसे आखिर में। उन्होंने मंत्री और सांसद के तौर पर जिम्मेदारी देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया।
तमिलनाडु चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के 4 मई को घोषित परिणामों में मुरुगन ने अविनाशी (SC) सीट से चुनाव लड़ा था। वह दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें 56,200 से ज्यादा वोट मिले।
वह सीएम विजय की टीवीके के प्रत्याशी कमाली एस. से 15373 वोटों से हार गए। इसके बाद अब उन्होंने तमिलनाडु में BJP के संगठन को मजबूत करने के लिए समय देने की बात कही है।
मजदूर परिवार से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
मुरुगन तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कुनूर गांव से जुड़े हैं। वह अनुसूचित जाति के अरुंथथियार समुदाय से आते हैं। उनके पिता लोगनाथन और मां वरुदम्मल गांव में अपने छोटे घर में रहते हैं।
मुरुगन के पहली बार मंत्री बनने के बाद भी उनके माता-पिता की दिनचर्या में बदलाव नहीं आया था। वे खेतों में काम करते रहे। उनकी मां ने कहा था कि बेटे ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया और परिवार को उस पर गर्व है।
मुरुगन के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान भी उनके पिता कोरोना महामारी के टीके के लिए आम लोगों की तरह कतार में लगे थे। यह जानकारी उनके परिवार और गांव से जुड़ी पिछली रिपोर्टिंग में सामने आई थी।
निष्कर्ष
एल मुरुगन ने मंत्री पद छोड़ने के साथ राज्यसभा की सदस्यता से भी हटने की इच्छा जताई है। उनकी चिट्ठी में तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. एल मुरुगन ने कौन-कौन से पद छोड़े हैं?
उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया है और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की बात कही है।
Q. मुरुगन ने प्रधानमंत्री को कितने पेज की चिट्ठी लिखी?
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 पेज की चिट्ठी लिखी।
Q. इस्तीफे के पीछे मुरुगन ने क्या वजह बताई?
उन्होंने तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के लिए अपना समय देने की इच्छा जताई।
Q. मुरुगन किस सदन के सांसद हैं?
वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था।
Q. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मुरुगन का प्रदर्शन कैसा रहा?
वह अविनाशी (SC) सीट पर दूसरे स्थान पर रहे और कमाली एस. से 15373 वोटों से हार गए।
Q. चुनाव में मुरुगन को कितने वोट मिले?
उन्हें 56,200 से ज्यादा वोट मिले।
Q. एल मुरुगन का सामाजिक और पारिवारिक background क्या है?
वह अनुसूचित जाति के अरुंथथियार समुदाय से आते हैं। उनके माता-पिता मजदूरी करते थे।







