जापान का मियाके-जिमा द्वीप अपनी खूबसूरती के साथ एक बेहद असामान्य खतरे के लिए भी जाना जाता है। यहां सक्रिय ज्वालामुखी से जहरीली सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। इसलिए लोगों के लिए गैस मास्क रखना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है।

हवा में खतरे का स्तर बढ़ने पर लाउडस्पीकर से सायरन बजाया जाता है। इसके बाद सड़क, बाजार और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर मौजूद लोग मास्क पहनते हैं। गाड़ियां रुक जाती हैं और सामान्य गतिविधियां कुछ समय के लिए थम जाती हैं।

ज्वालामुखी के बीच बसा द्वीप

मियाके-जिमा प्रशांत महासागर में स्थित है और टोक्यो से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में आता है। यह टोक्यो महानगर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है। दूर से यह हरी पहाड़ियों और नीले समुद्र से घिरा पर्यटन स्थल दिखाई देता है, लेकिन द्वीप के बीच मौजूद माउंट ओयामा इसकी जिंदगी को लगातार प्रभावित करता है।

माउंट ओयामा एक अति-सक्रिय ज्वालामुखी है। इससे निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड आंखों और सांस की नली में तेज जलन पैदा कर सकती है। गैस का स्तर बहुत बढ़ने पर सांस लेना मुश्किल हो सकता है और स्थिति जानलेवा बन सकती है।

विस्फोट के बाद खाली कराया गया था द्वीप

साल 2000 के मध्य में माउंट ओयामा में कई शक्तिशाली विस्फोट हुए। जमीन फटने के बाद बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड वातावरण में फैल गई। सितंबर 2000 में जापानी सरकार ने पूरे द्वीप को खाली कराने का आदेश दिया। उस समय वहां रहने वाले सभी 3,600 नागरिकों को जहाजों और सेना के हेलिकॉप्टरों से टोक्यो के मुख्य भूभाग पर ले जाया गया।

इसके बाद कई साल तक मियाके-जिमा में आम लोगों की आवाजाही बंद रही। केवल वैज्ञानिकों और रिसर्च टीमों को विशेष केमिकल सूट के साथ वहां जाने की अनुमति थी। गैस का उत्सर्जन कम होने के बाद वहां से विस्थापित लोगों ने वापस लौटने की मांग की।

टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार और जापान मौसम विज्ञान एजेंसी की समीक्षा के बाद लोगों को लौटने की अनुमति मिली। हालांकि, द्वीप में प्रवेश करने वाले नागरिकों और पर्यटकों के लिए हर समय काम करने वाला गैस मास्क रखना जरूरी किया गया।

सायरन और मॉनिटरिंग स्टेशन से सुरक्षा

द्वीप पर 19 से ज्यादा गैस-मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए हैं। ये स्टेशन हवा में सल्फर डाइऑक्साइड के स्तर पर नजर रखते हैं। खतरे के अलग-अलग स्तर के लिए ग्रीन अलर्ट, येलो अलर्ट और रेड अलर्ट सायरन का इस्तेमाल किया जाता है।

रेड अलर्ट के दौरान लोगों को तुरंत मास्क पहनने और शेल्टर की ओर जाने के लिए कहा जाता है। घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक इमारतों में एयर-फिल्टरिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं। लंबे समय तक लाल सायरन बजने पर लोग अंडरग्राउंड एयर-टाइट शेल्टर में चले जाते हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते हैं।

आज द्वीप पर लगभग 2,200 लोग रहते हैं। स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ सायरन बजने पर गैस मास्क पहनने की प्रक्रिया भी सिखाई जाती है। खेलते समय बच्चे मास्क गले में रखते हैं। मछुआरे नाव पर जाते समय लाइफ जैकेट के साथ गैस मास्क का डिब्बा भी रखते हैं।

खतरे के बीच पर्यटन

मियाके-जिमा की परिस्थितियों ने पर्यटन का एक अलग रूप भी बनाया है। एडवेंचर ट्रैवलर्स, भूवैज्ञानिक और पर्यावरण वैज्ञानिक इस द्वीप को देखने आते हैं। पोर्ट पर उतरने वाले पर्यटकों को गैस मास्क खरीदना या किराये पर लेना पड़ता है।

द्वीप पर ज्वालामुखी की राख से ढकी सड़कें और सूखे पेड़ों वाले इलाके भी देखने को मिलते हैं। यहां का पर्यटन प्राकृतिक खतरे और उसके बीच बने सुरक्षा अनुशासन, दोनों से जुड़ा है।

निष्कर्ष

मियाके-जिमा में जीवन ज्वालामुखी के खतरे के साथ तालमेल बनाकर चलता है। गैस मास्क, सायरन, मॉनिटरिंग स्टेशन और शेल्टर वहां की रोजमर्रा की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मियाके-जिमा कहां स्थित है?

मियाके-जिमा प्रशांत महासागर में जापान का एक द्वीप है। यह टोक्यो से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।

Q. द्वीप पर गैस मास्क क्यों जरूरी है?

माउंट ओयामा से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। गैस का स्तर बढ़ने पर मास्क पहनना जरूरी होता है।

Q. मियाके-जिमा में रेड अलर्ट का क्या मतलब है?

रेड अलर्ट का अर्थ है कि गैस का स्तर जानलेवा सीमा तक पहुंच गया है। ऐसे समय लोगों को मास्क पहनकर शेल्टर की ओर जाने के लिए कहा जाता है।

Q. साल 2000 में द्वीप पर क्या हुआ था?

माउंट ओयामा में कई शक्तिशाली विस्फोट हुए थे। सितंबर 2000 में जापानी सरकार ने द्वीप के सभी 3,600 नागरिकों को वहां से हटाने का आदेश दिया था।

Q. अभी मियाके-जिमा में कितने लोग रहते हैं?

द्वीप पर आज लगभग 2,200 लोग रहते हैं।

Q. क्या पर्यटक मियाके-जिमा जा सकते हैं?

हां, पर्यटक वहां जा सकते हैं। उन्हें द्वीप पर उतरने के बाद गैस मास्क खरीदना या किराये पर लेना पड़ता है।