जियो प्लेटफॉर्म्स के करीब 30,000 करोड़ रुपये के IPO को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इश्यू 22 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। हालांकि, इस बड़े सौदे को संभालने वाले बैंकों के लिए कमाई उतनी बड़ी नहीं रही। कंपनी के फाइलिंग के हवाले से दी गई ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 19 बैंकों को कुल करीब 1.96 अरब रुपये फीस दी जा रही है।

यह रकम इश्यू साइज का लगभग 0.65% बैठती है। जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी है। इस IPO को देश का अब तक का सबसे बड़ा इश्यू बताया गया है, लेकिन बैंकरों की फीस पिछले कुछ बड़े IPO के मुकाबले कम रही।

बड़े IPO के मुकाबले फीस का अंतर

तुलना करें तो हुंडई मोटर इंडिया ने 2024 में 278 अरब रुपये के IPO के लिए बैंकरों को लगभग 4.9 अरब रुपये का भुगतान किया था। उस इश्यू का आकार जियो प्लेटफॉर्म्स से अलग था, फिर भी बैंकरों को मिली रकम जियो के सौदे से काफी अधिक थी।

2021 में पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने 183 अरब रुपये के IPO के लिए बैंकरों को करीब 3.2 अरब रुपये दिए थे। वहीं, स्विगी ने 113 अरब रुपये के शेयर सेल के लिए लगभग 2.8 अरब रुपये का भुगतान किया था।

इन उदाहरणों से बड़े IPO में फीस को लेकर बदलती तस्वीर सामने आती है। जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू बहुत बड़ा रहा और इसे 19 बैंकों ने संभाला, लेकिन फीस का अनुपात 0.65% रहा।

बड़ी डील के लिए बैंकों में प्रतिस्पर्धा

भारत में इन्वेस्टमेंट बैंकरों के बीच बड़ी और चर्चित डील हासिल करने को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इसी वजह से हाई-प्रोफाइल इश्यू में बैंक कम फीस पर भी काम स्वीकार कर लेते हैं।

ऐसे सौदों से उन्हें लीग-टेबल रैंकिंग और बाजार में साख मजबूत करने का मौका मिलता है। बड़े IPO का अनुभव भविष्य में दूसरे बड़े प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए क्रेडेंशियल के रूप में भी काम आ सकता है। इसलिए फीस कम होने के बावजूद बैंक इन डील्स में भूमिका पाने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

दूसरे बड़े इश्यू में भी कमाई सीमित

बैंकरों की फीस कम रहने का यह अकेला उदाहरण नहीं है। हाल में आए एनएसई के 2.4 अरब डॉलर के इश्यू के लिए 20 बैंकों के सिंडिकेट को करीब 1.9 अरब रुपये दिए गए। यह इश्यू साइज का लगभग 0.8% था।

जुलाई में SBI फंड्स मैनेजमेंट ऑफ इंडिया के अरबों डॉलर के IPO में बैंकरों को कुल 46.3 मिलियन रुपये फीस मिली। इन सौदों के आंकड़े बताते हैं कि बड़े इश्यू का आकार अपने आप बैंकों के लिए ज्यादा फीस की गारंटी नहीं बन रहा। फीस पर डील के लिए प्रतिस्पर्धा और बैंकों की संख्या का भी असर पड़ता है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के मामले में निवेशकों की मांग मजबूत रही, लेकिन बैंकों की फीस इश्यू साइज के मुकाबले सीमित रही। यही अंतर इस IPO को बैंकरों के नजरिए से अलग बनाता है।

निष्कर्ष

जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 22 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ और करीब 30,000 करोड़ रुपये का रहा। इसके बावजूद 19 बैंकों को मिलने वाली करीब 1.96 अरब रुपये की फीस इश्यू साइज का लगभग 0.65% है, जो हाल के कुछ बड़े IPO के मुकाबले कम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को कितना सब्सक्रिप्शन मिला?

जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 22 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ।

Q. जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO का आकार कितना था?

इश्यू का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये था।

Q. IPO को कितने बैंकों ने संभाला?

इस सौदे को 19 बैंकों ने संभाला।

Q. बैंकरों को कितनी फीस मिली?

बैंकरों को करीब 1.96 अरब रुपये फीस दी जा रही है। यह इश्यू साइज का लगभग 0.65% है।

Q. फीस कम रहने की वजह क्या बताई गई है?

भारत में इन्वेस्टमेंट बैंकरों के बीच बड़ी और चर्चित डील हासिल करने को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा फीस पर दबाव डाल रही है।

Q. हुंडई मोटर इंडिया के IPO में बैंकरों को कितनी फीस मिली थी?

हुंडई मोटर इंडिया ने 2024 में 278 अरब रुपये के IPO के लिए बैंकरों को लगभग 4.9 अरब रुपये दिए थे।