भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 416.25 अंक चढ़कर 73,665.64 पर खुला। एनएसई निफ्टी 50 भी 54.55 अंक बढ़कर 22,742.20 पर पहुंचा। बैंक निफ्टी में 40.05 अंकों की तेजी रही और यह 54,965.75 पर खुला।
शुरुआती मजबूती में आईटी शेयरों की बड़ी भूमिका रही। निफ्टी आईटी सूचकांक में 300 से अधिक अंकों का उछाल दर्ज किया गया। टीसीएस के शेयर 2.63% चढ़े, जबकि इंफोसिस में 1.53%, विप्रो में 0.85% और एचसीएल टेक में 1.22% की तेजी रही।
हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ तेजी कमजोर पड़ गई। निफ्टी कुछ ही समय में हरे निशान से निकलकर लाल निशान में पहुंच गया और इसमें 100 से अधिक अंकों की गिरावट देखी गई। सेंसेक्स भी 150 अंकों से अधिक टूटकर लाल निशान में आ गया। बैंक निफ्टी पूरे सत्र के दौरान दबाव में रहा और इसमें 500 से अधिक अंकों की गिरावट रही।
बाजार पर किन संकेतों का दबाव
कच्चे तेल की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की ऊंची कीमत से महंगाई, कंपनियों की लागत और देश के व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है।
अंतरराष्ट्रीय संकेत भी बाजार के पक्ष में नहीं रहे। एशियाई बाजारों में गिरावट रही, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को ज्यादातर कमजोरी के साथ बंद हुए। इन संकेतों ने घरेलू बाजार में शुरुआती खरीदारी के बावजूद निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला।
मुद्रा बाजार में रुपये ने हल्की मजबूती दिखाई। गुरुवार को 94.82 रुपये प्रति डॉलर के बंद स्तर के मुकाबले शुक्रवार को रुपया 3 पैसे मजबूत होकर 94.79 प्रति डॉलर पर खुला। रुपये की यह चाल बाजार के लिए सकारात्मक संकेतों में शामिल रही।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर कंपनियों के बढ़ते खर्च को लेकर भी निवेशकों की चिंता बनी हुई है। इसके साथ कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर वैश्विक माहौल ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया। घरेलू निवेशकों की नजर अब सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर रहेगी।
इन नतीजों से यह संकेत मिलेगा कि महंगी ऊर्जा, वैश्विक कमजोरी और आर्थिक अनिश्चितता के बीच कंपनियों की कमाई कैसी रही। इसी वजह से बाजार में शुरुआती तेजी के बाद टिकाऊ बढ़त को लेकर सावधानी बनी हुई है।
अगले सप्ताह के लिए सकारात्मक संकेत
बाजार को कुछ सहारा देने वाले संकेत भी मौजूद हैं। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में तेज गिरावट और रुपये की मजबूती विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली कम करने में मदद कर सकती है। इससे शेयर बाजार को समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पिछले 2 दिनों में करीब ₹3.73 लाख करोड़ की बोलियां मिली हैं। शेयरों के अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस रकम में से ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा के बाजार में लौटने की संभावना है। इससे अगले सप्ताह बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ सकती है और शेयरों को सहारा मिल सकता है।
अगर सोमवार को बाजार में तेजी आती है, तो बड़ी कंपनियों के शेयर इसकी अगुवाई कर सकते हैं। लार्ज-कैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दे रही है। अच्छी ग्रोथ वाली कंपनियों के शेयरों में उचित कीमत पर अवसर बनने की बात भी सामने आई है।
इसके विपरीत, मिड-कैप और खासकर स्मॉल-कैप शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। कुछ मामलों में इन शेयरों के मूल्यांकन में पहले आई तेजी को कंपनियों के कारोबारी प्रदर्शन के बजाय बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी के प्रवाह से जोड़ा गया है। इसलिए कुछ शेयरों की मौजूदा कीमतों को उनके कारोबारी प्रदर्शन के आधार पर सही ठहराना मुश्किल हो सकता है।
निष्कर्ष
शुक्रवार को शेयर बाजार की तेज शुरुआत आईटी शेयरों की खरीदारी से हुई, लेकिन महंगे कच्चे तेल और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बढ़त सीमित कर दी। रुपये की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में गिरावट और संभावित नकदी प्रवाह बाजार को सहारा दे सकते हैं, जबकि तिमाही नतीजे और ऊर्जा लागत आगे की दिशा के अहम संकेत रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. शुक्रवार को सेंसेक्स किस स्तर पर खुला?
सेंसेक्स 416.25 अंक की बढ़त के साथ 73,665.64 पर खुला।
Q. निफ्टी 50 की शुरुआती स्थिति क्या रही?
निफ्टी 50 54.55 अंक चढ़कर 22,742.20 पर पहुंचा।
Q. बाजार की शुरुआती तेजी बाद में क्यों कमजोर हुई?
महंगे कच्चे तेल, अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कमजोरी और निवेशकों की चिंता ने तेजी पर दबाव डाला।
Q. किन आईटी शेयरों में तेजी रही?
टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
Q. कच्चे तेल की कीमत करीब कितनी रही?
ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
Q. रुपये ने कारोबार की शुरुआत किस स्तर पर की?
रुपया 94.79 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 3 पैसे मजबूत था।
Q. अगले सप्ताह बाजार को किससे सहारा मिल सकता है?
रुपये की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और संभावित नकदी प्रवाह से बाजार को सहारा मिल सकता है।





