भारत की आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद अपनी पकड़ बनाए हुए है। ING के मुताबिक, देश अब ऐसी सर्विसेज की ओर बढ़ रहा है जिन्हें ऑटोमेट करना अपेक्षाकृत मुश्किल है। इससे इंडस्ट्री में मांग घटने के बजाय काम का स्वरूप बदलता दिख रहा है।

सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का करीब 5.2% है। महामारी से पहले यह हिस्सेदारी 3.3% थी। ING की अर्थशास्त्री दीपली भार्गव ने बुधवार को जारी एक नोट में यह आकलन दिया।

बिजनेस सर्विसेज की हिस्सेदारी भी इसी अवधि में बढ़कर 3.3% हो गई है। इस श्रेणी में फाइनेंस, अकाउंटिंग, इंजीनियरिंग, रिसर्च और एनालिटिक्स जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन सेवाओं की हिस्सेदारी महामारी से पहले के स्तर के मुकाबले दोगुने से ज्यादा बढ़ी है।

AI से काम का फोकस बदल रहा है

ING के अनुसार, भारत वैश्विक आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री के आधे से ज्यादा हिस्से को संभालता है। सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट से देश को हर साल करीब $205 billion की कमाई होती है और इससे लगभग 5.8 million workers को सहारा मिलता है। सॉफ्टवेयर और बिजनेस सर्विसेज एक्सपोर्ट मिलकर GDP के करीब 8.5% के बराबर हैं।

ये सेवाएं देश के लिए विदेशी मुद्रा की एक अहम source भी हैं। इसी वजह से AI का असर केवल टेक कंपनियों या नौकरियों तक सीमित नहीं है। इसका संबंध भारत की एक्सपोर्ट कमाई और सर्विसेज सेक्टर की व्यापक भूमिका से भी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रोथ अब उन कामों से दूर जा रही है जिन्हें दोहराव वाले और आसानी से ऑटोमेट होने वाले काम माना जाता है। इनमें डेटा एंट्री, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और कस्टमर सपोर्ट शामिल हैं।

इनकी जगह एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे ज्यादा वैल्यू वाले काम बढ़ रहे हैं। भारत में रिस्क मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसी सेवाओं की मांग भी मजबूत बनी हुई है।

भारत ने ग्लोबल मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाई

ING के आंकड़ों के अनुसार, भारत का डिजिटल तरीके से दी जाने वाली सेवाओं का एक्सपोर्ट 2022 के बाद 45% बढ़ा है। इसी अवधि में वैश्विक बढ़ोतरी 32% रही। इस अंतर से भारत को ग्लोबल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिली है।

यह प्रदर्शन उन चिंताओं को चुनौती देता है कि जेनरेटिव AI भारत की आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को कमजोर कर सकती है। लंबे समय से इस सेक्टर में कम लागत वाले बाजारों को दिए जाने वाले कामों के ऑटोमेशन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

ING का आकलन है कि भारत और फिलीपींस में AI से होने वाले बड़े व्यवधान की आशंका अभी जल्दबाजी वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध संकेत गिरावट नहीं बल्कि बदलाव की ओर इशारा करते हैं। AI आउटसोर्सिंग की मांग खत्म करने के बजाय यह तय कर रहा है कि किस तरह का काम आउटसोर्स किया जाएगा।

कंपनियों और कर्मचारियों पर असर

इस बदलाव का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो पारंपरिक सपोर्ट और प्रोसेसिंग कामों पर निर्भर हैं। उनके लिए ज्यादा तकनीकी, विश्लेषणात्मक और विशेषज्ञ सेवाओं की ओर बढ़ना जरूरी होगा।

कर्मचारियों के लिए भी काम की प्रकृति बदल रही है। डेटा एंट्री या सामान्य सपोर्ट से जुड़े कामों की तुलना में एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग, रिसर्च और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसी क्षमताओं की मांग बढ़ रही है।

फिर भी ING का मुख्य निष्कर्ष यह नहीं है कि नौकरियों पर असर नहीं पड़ेगा। उसका आकलन यह है कि AI इंडस्ट्री को छोटा करने के बजाय उसके काम का मिश्रण बदल रहा है। भारत की बढ़ती डिजिटल सर्विसेज एक्सपोर्ट इसी बदलाव का एक अहम संकेत है।

निष्कर्ष

ING के आकलन के मुताबिक, AI भारत की आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री में मांग को खत्म नहीं कर रहा। इंडस्ट्री दोहराव वाले कामों से आगे बढ़कर एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग, रिसर्च और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसी सेवाओं पर ज्यादा जोर दे रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. भारत की सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट हिस्सेदारी कितनी है?

भारत की सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट हिस्सेदारी GDP की करीब 5.2% है। महामारी से पहले यह 3.3% थी।

Q. भारत की बिजनेस सर्विसेज में कौन-कौन से काम शामिल हैं?

इनमें फाइनेंस, अकाउंटिंग, इंजीनियरिंग, रिसर्च और एनालिटिक्स जैसी सेवाएं शामिल हैं।

Q. भारत हर साल सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट से कितनी कमाई करता है?

भारत सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट से हर साल करीब $205 billion कमाता है।

Q. भारत की आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री से कितने workers जुड़े हैं?

ING के मुताबिक, सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट से लगभग 5.8 million workers को सहारा मिलता है।

Q. AI भारत की आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री में क्या बदल रहा है?

AI दोहराव वाले कामों से फोकस हटाकर एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, रिस्क मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग डिजाइन और रिसर्च की ओर ले जा रहा है।

Q. भारत का डिजिटल सर्विसेज एक्सपोर्ट कितना बढ़ा है?

2022 के बाद भारत का डिजिटल तरीके से दी जाने वाली सेवाओं का एक्सपोर्ट 45% बढ़ा है। वैश्विक बढ़ोतरी 32% रही।