दिल्ली में हॉर्वर्ड के पूर्व छात्रों के खुले पत्र को लेकर प्रतीक सोम ने कहा है कि यह किसी संस्थान का आधिकारिक बयान नहीं है। उनके मुताबिक, यह हॉर्वर्ड से जुड़े लोगों का सामूहिक वक्तव्य है। सोम हॉर्वर्ड कैनेडी स्कूल के 2024 बैच के पूर्व छात्र हैं।
सोम ने कहा कि पत्र का मुख्य संदेश भारत के संविधान और राष्ट्रीय हित के प्रति प्राथमिक निष्ठा से जुड़ा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय, निर्वाचन आयोग और संसद को लोकतंत्र की बुनियाद बनाने वाली संवैधानिक संस्थाएं बताया।
यह खुला पत्र भारत की संवैधानिक संस्थाओं, जिनमें निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट शामिल हैं, पर हमलों को लेकर गहरी चिंता जताता है। पत्र के सभी हस्ताक्षरकर्ताओं या उसकी पूरी सामग्री का विवरण की जानकारी अभी नहीं है।
विरोध के अधिकार पर प्रतीक सोम की बात
सोम ने कहा कि विरोध करना मौलिक अधिकार है और राजनीतिक मतभेदों को समझा जा सकता है। उन्होंने सरकार या सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ प्रदर्शनों को भी इसी संदर्भ में रखा।
साथ ही, उनके अनुसार विरोध संवैधानिक प्राधिकारों की विश्वसनीयता को कमजोर करने, उन्हें डराने या कानून के शासन की अनदेखी करने का आधार नहीं बन सकता। उनका बयान विरोध के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान, दोनों को साथ रखने पर जोर देता है।
खबर का असर
इस बयान से खुले पत्र की प्रकृति और उसके संदेश को लेकर स्थिति स्पष्ट होती है। सोम ने इसे हॉर्वर्ड का संस्थागत रुख बताने के बजाय उससे जुड़े व्यक्तियों का सामूहिक विचार बताया है।
किसी सरकारी संस्था, अदालत या निर्वाचन आयोग की ओर से इस पत्र पर प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। आगे की आधिकारिक कार्रवाई या सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बारे में भी कोई जानकारी की जानकारी अभी नहीं है।
निष्कर्ष
प्रतीक सोम के अनुसार, खुले पत्र का केंद्र संविधान और राष्ट्रीय हित के प्रति निष्ठा है। उन्होंने विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, कानून के शासन और लोकतांत्रिक आधार को बनाए रखने पर जोर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह बयान किसने दिया?
प्रतीक सोम ने यह बयान दिया। वह हॉर्वर्ड कैनेडी स्कूल के 2024 बैच के पूर्व छात्र हैं।
Q. खुले पत्र का मुख्य मुद्दा क्या है?
पत्र भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर कथित हमलों को लेकर चिंता जताता है। इसमें निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट का भी उल्लेख है।
Q. क्या यह हॉर्वर्ड का आधिकारिक बयान है?
सोम के अनुसार, यह हॉर्वर्ड का संस्थागत बयान नहीं है। यह संस्थान से जुड़े लोगों का सामूहिक वक्तव्य है।
Q. पत्र में किन संस्थाओं का उल्लेख है?
सोम ने सुप्रीम कोर्ट, भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय, निर्वाचन आयोग और संसद का उल्लेख किया।
Q. विरोध के अधिकार पर सोम का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि विरोध करना मौलिक अधिकार है। साथ ही, विरोध संवैधानिक प्राधिकारों को कमजोर करने या कानून के शासन की अनदेखी का आधार नहीं बन सकता।








