पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एलपीजी सिलेंडर की जगह पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (PNG) का इस्तेमाल बढ़ाने को कहा है। यह निर्देश उन इलाकों के लिए अहम है, जहां पीएनजी नेटवर्क पहले ही पहुंच चुका है।

निर्देश के मुताबिक, ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले एलपीजी ग्राहकों को नोटिस दिया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद तय समय में पीएनजी कनेक्शन नहीं लेने पर उनका एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन अपने आप रद्द हो सकता है।

PNG और LPG दोनों कनेक्शन रखने पर रोक

नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत पीएनजी और एलपीजी, दोनों कनेक्शन साथ रखने पर रोक लगाई गई है। ऐसे ग्राहकों को अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करना होगा।

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने राज्यों को भेजे पत्र में एलपीजी से पीएनजी पर जाने के नियमों को सख्त किए जाने की जानकारी दी। पत्र के अनुसार, जिन सोसायटी या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है, वहां ग्राहकों को इस बदलाव के लिए नोटिस दिया जाएगा।

गैस आपूर्ति और लागत का असर

निर्देश ऐसे समय आया है, जब मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही गई है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। दोनों देश होर्मुज पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं।

होर्मुज के रास्ते मध्य पूर्व से एशिया आने वाले तेल और गैस से लदे जहाजों पर इसका असर पड़ रहा है। भारत कई देशों से तेल और गैस की आपूर्ति कर रहा है, लेकिन इसकी लागत बढ़ी है। इसी वजह से एलपीजी पर निर्भरता घटाने और पीएनजी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

जिलों में बनेगी पीएनजी समन्वय समिति

पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया तेज करने के लिए हर क्षेत्र में समन्वय व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया है। तेल वितरण कंपनियों और सिटी गैस वितरण संस्थाओं को पीएनजी समन्वय समितियों में शामिल करने को कहा गया है।

राज्यों से जिला स्तर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने को कहा गया है। इससे पीएनजी कनेक्शन लागू करने और संबंधित प्रक्रिया की निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।