रिजर्व बैंक ने पाई को भारत की मौद्रिक विरासत के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया है। कभी यह देश की मुद्रा की सबसे छोटी इकाई हुआ करती थी।
दशमलव-पूर्व मौद्रिक व्यवस्था के दौर में पाई का इस्तेमाल रोजमर्रा के लेन-देन में होता था। उस समय छोटे भुगतान और सामान्य खरीदारी में इसकी भूमिका थी।
अब पाई चलन में नहीं है। इसके बावजूद, रिजर्व बैंक के अनुसार इसकी कहानी भारत के मौद्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
यह जानकारी रिजर्व बैंक ने अपने संग्रहालय से जुड़े पोस्ट में साझा की। पोस्ट में पाई के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया गया है।











