US और चीन के शीर्ष आर्थिक अधिकारी रविवार को न्यूयॉर्क में व्यापार और दूसरे दबाव वाले मुद्दों पर बातचीत करेंगे। यह बैठक 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात से पहले हो रही है।
US ट्रेजरी सेक्रेटरी (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट और चीन के वाइस प्रीमियर हे लिफेंग वार्ता का नेतृत्व करेंगे। US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर भी इसमें शामिल होंगे। उनके कार्यालय ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन चीन के साथ संतुलित व्यापार को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।
बातचीत का मुख्य एजेंडा
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), ईरान युद्ध से जुड़ी ऊर्जा आपूर्ति, टैरिफ, निवेश और बाजार पहुंच पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों पक्ष नवंबर में खत्म होने वाली ट्रेड ट्रूस को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
US अधिकारियों के लिए इस समझ को आगे बढ़ाना इसलिए भी अहम है क्योंकि 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। महंगाई अमेरिकी मतदाताओं की लगातार बड़ी चिंता बनी हुई है।
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ उपाध्यक्ष वेंडी कट्लर के मुताबिक, अब जोर रिश्ते को पूरी तरह बदलने से ज्यादा उसे स्थिर रखने और तनाव बढ़ने से रोकने पर है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को वार्ता की पुष्टि की। इससे पहले, दोनों देशों के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा और कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने के प्रयास किए हैं। यह पहल दोनों तरफ के 30 बिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों पर व्यापारिक रुकावटें कम करने से जुड़ी है।
टैरिफ पर अस्थायी राहत, लेकिन जोखिम कायम
व्यापारिक साझेदारों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लेकर नए US टैरिफ की घोषणा बैठक के बाद तक टाल दी गई है। इससे वार्ता के दौरान तत्काल टकराव का जोखिम कुछ समय के लिए कम हो सकता है।
हालांकि, आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक दोनों देश एक और खुली भिड़ंत से बचना चाहते हैं, लेकिन US की टैरिफ दीवार दोबारा मजबूत होने से तनाव लौटने का खतरा बना हुआ है।
चीनी कंपनियों का US को निर्यात इस साल फिर बढ़ा है। इससे ट्रंप के टैरिफ की सीमाएं सामने आती हैं, हालांकि चीन में बने AI से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग बढ़ना भी इसका एक कारण है।
बेसेंट और हे पिछले 18 महीनों में कई बार बातचीत कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर बैठकें किसी तीसरे देश में हुई थीं, ताकि दोनों पक्ष तटस्थता का संकेत दे सकें। न्यूयॉर्क में बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा की अगले सप्ताह होने वाली बैठक से पहले हो रही है।
AI और तकनीकी प्रतिस्पर्धा
AI दोनों देशों के बीच तेजी से नया तनावपूर्ण क्षेत्र बन गया है। US ने चीन की उन्नत चिप्स तक पहुंच सीमित की है और आरोप लगाया है कि चीनी कंपनियां अमेरिकी तकनीक की क्षमताओं को ‘डिस्टिल’ करके अपने मॉडल विकसित कर रही हैं।
चीन ने AI विकास की गति धीमी करने की अमेरिकी तकनीकी नेताओं की अपील का विरोध किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने ऐसी मांगों को ‘डर फैलाने’ वाला बताया है, जबकि सरकारी मीडिया ने उन्हें स्वार्थ से प्रेरित कहा है।
बेसेंट ने कहा है कि AI में दोनों देश बहुत आगे हैं, इसलिए साझा जोखिमों को रोकने के लिए सुरक्षा सीमाएं और सीधा संवाद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि US साझा जोखिमों और दोनों तकनीकी प्रणालियों के पूरी तरह अलग होने से बचने पर बातचीत के लिए तैयार है।
बीजिंग का कहना है कि वॉशिंगटन की नीतियों का मकसद चीन के विकास को रोकना है। चीन AI के नियम तय करने में US को नेतृत्व की स्थिति देने के लिए तैयार नहीं है।
ईरान, तेल और दुर्लभ पृथ्वी
ईरान से जुड़ा ऊर्जा संकट दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए तत्काल चुनौती बन गया है। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और ईरान को आर्थिक सहारा देता है।
US ट्रेजरी विभाग ईरान और बाकी दुनिया के बीच वित्तीय और व्यापारिक प्रवाह को रोकने के लिए बैंकों पर दबाव बढ़ा रहा है। इससे यह अटकल तेज हुई है कि चीनी बैंक भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
बेसेंट ने इस सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की वित्तीय सेवा समिति के सामने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर चीनी अधिकारियों से निजी बातचीत की है। उन्होंने आगामी वार्ता में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई।
US नौसैनिक नाकेबंदी से चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति काफी घट गई है। इससे आने वाले हफ्तों में चीन के छोटे रिफाइनिंग क्षेत्र में उत्पादन घटने की आशंका बनी है। यह क्षेत्र चीन की कुल रिफाइनिंग क्षमता का 1/3 हिस्सा है।
रिहला रिसर्च एंड एडवाइजरी के संस्थापक जेसी मार्क्स के मुताबिक, चीन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने में रुचि रखता है, लेकिन किसी भी पक्ष को रास्ता बदलने के लिए उस पर दबाव डालने की उसकी क्षमता सीमित है।
ताइवान और संभावित कारोबारी प्रतिनिधिमंडल
बैठक की तैयारी से जुड़े एक चीनी अधिकारी के अनुसार, चीन के लिए ताइवान सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है। खास तौर पर US की प्रस्तावित हथियार बिक्री बातचीत में उठ सकती है।
टैरिफ और सोयाबीन जैसे कृषि उत्पादों पर चर्चा अपेक्षाकृत आसान मानी जा रही है। AI, ऑटोमोबाइल, तकनीक और ई-कॉमर्स भी एजेंडे में रहेंगे।
चीन दुर्लभ पृथ्वी से बने मैग्नेट के लिए अधिक परमिट देने का प्रस्ताव सौदेबाजी के हिस्से के रूप में रख सकता है। इसके बदले बीजिंग क्या मांग करेगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।
चीनी दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट की आपूर्ति बनाए रखना ट्रंप के लिए पिछले साल की ट्रेड ट्रूस में अहम मुद्दा था। अप्रैल 2025 में चीन द्वारा निर्यात नियंत्रण लागू किए जाने के बाद से इन औद्योगिक हिस्सों का मासिक निर्यात पहले के स्तर से काफी नीचे रहा है।
चीनी अधिकारियों के बीच BYD कंपनी को संभावित कारोबारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने पर भी विचार हुआ है। यह कदम US में बने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर ट्रंप के टैरिफ के कारण संवेदनशील हो सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिकी कर्मचारियों के साथ US में कार बनाने वाली चीनी कंपनी को अनुमति देने पर वह विचार कर सकते हैं।
आगे क्या होगा
न्यूयॉर्क वार्ता का तात्कालिक लक्ष्य तनाव को बढ़ने से रोकना और नवंबर तक चलने वाली ट्रेड ट्रूस को स्थिर रखना है। इसके बाद 24 सितंबर की ट्रंप-शी बैठक में व्यापार, AI, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक स्तर पर चर्चा हो सकती है।
फिर भी, टैरिफ, चिप्स, ताइवान, ईरानी तेल और दुर्लभ पृथ्वी की आपूर्ति पर मतभेद बने हुए हैं। इसलिए बातचीत से स्थिरता की कोशिश तो मजबूत हो सकती है, लेकिन व्यापक US-चीन प्रतिस्पर्धा खत्म होने का संकेत नहीं मिलता।
निष्कर्ष
न्यूयॉर्क की बैठक US-चीन रिश्तों में बड़े समझौते से ज्यादा तत्काल स्थिरता की कोशिश है। ट्रेड ट्रूस, AI, ईरान की ऊर्जा आपूर्ति और तकनीकी नियंत्रण पर होने वाली चर्चा 24 सितंबर की शीर्ष स्तर की बैठक के लिए आधार तैयार करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. US और चीन के अधिकारी न्यूयॉर्क में कब मिलेंगे?
वार्ता रविवार को न्यूयॉर्क में होगी।
Q. बैठक में कौन शामिल होंगे?
US से स्कॉट बेसेंट और जेमिसन ग्रीर तथा चीन से हे लिफेंग शामिल होंगे।
Q. बातचीत के मुख्य मुद्दे क्या हैं?
AI, ईरान से जुड़ी ऊर्जा आपूर्ति, टैरिफ, निवेश, कृषि उत्पाद, ताइवान और दुर्लभ पृथ्वी प्रमुख मुद्दे हैं।
Q. ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात कब प्रस्तावित है?
दोनों नेताओं की मुलाकात 24 सितंबर को वॉशिंगटन में प्रस्तावित है।
Q. ट्रेड ट्रूस कब खत्म होगी?
मौजूदा ट्रेड ट्रूस नवंबर में खत्म होनी है।
Q. US को चीन से किस बात की चिंता है?
US को टैरिफ, उन्नत चिप्स, AI तकनीक, ईरानी तेल और व्यापारिक असंतुलन से जुड़े मुद्दों पर चिंता है।
Q. चीन बातचीत में क्या मुद्दा उठा सकता है?
चीन ताइवान, US की प्रस्तावित हथियार बिक्री, AI नियमों और व्यापारिक प्रतिबंधों का मुद्दा उठा सकता है।
Q. दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट क्यों अहम हैं?
ये महत्वपूर्ण औद्योगिक हिस्से हैं और चीन के निर्यात नियंत्रण के बाद इनका मासिक निर्यात पहले के स्तर से काफी नीचे रहा है।













