नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई, मेट्रो सेवाओं में रोक, इंटरनेट बंद किए जाने और लोगों की आवाजाही सीमित करने पर सवाल उठाए।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत इस मामले को विस्तार से सुनना चाहती है। उन्होंने संकेत दिया कि पुलिस की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की कसौटी पर परखा जाएगा।

मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं पर अदालत का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अंतरिम आदेश जारी करेगा। इसके तहत मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलाने की बात कही गई, जब तक कानून-व्यवस्था की ऐसी स्थिति न बने जिसमें रोक जरूरी हो। अदालत ने आम लोगों की आवाजाही बहाल करने और इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की बात भी कही।

अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों को अपने पेशेवर काम में बाधा नहीं आनी चाहिए। केंद्र की ओर से बताया गया कि 45 मेट्रो स्टेशन रोके गए हैं और यह कुल स्टेशनों का 15 फीसदी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से संबंधित स्टेशनों का नक्शा पेश करने को कहा।

वकीलों ने हिरासत और प्रतिबंधों पर उठाए सवाल

कपिल सिब्बल ने कहा कि मामला केवल अदालत की अवमानना तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि लोगों को ट्रेनों से उतारा गया, 4 किलोमीटर के दायरे से बाहर भी पाबंदियां लगाई गईं और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। उन्होंने इस घटनाक्रम को अनुराधा भसीन फैसले के दायरे से जुड़ा बताया।

सिब्बल ने धारा 163 लागू करने के आधार पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार 4 किलोमीटर के दायरे से बाहर लोगों को हिरासत में लेने, यातायात रोकने या बैरिकेड लगाने का आधार नहीं है। उन्होंने निर्धारित जगह पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन के अधिकार की बात रखी।

जस्टिस बागची ने कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर पुलिस अधिकारियों को राज्य से ऊपर कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं मिल सकता। उन्होंने जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों, दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण बताया।

अन्य अधिवक्ताओं के आरोप

वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ बर्बरता हुई और उन्हें एक चलती बस में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि मामला केवल वकीलों का नहीं, बल्कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का है।

मेनका गुरुस्वामी ने मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने अनुच्छेद 358 और आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 के अधिकारों पर लगने वाले प्रतिबंधों का संदर्भ देते हुए पूछा कि क्या राज्य देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति मान रहा है। उन्होंने एडीएम जबलपुर मामले का भी उल्लेख किया।

गोपाल शंकरनारायणन ने वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए दावा किया कि जंतर-मंतर की तय सीमा से बाहर भी लोगों और वकीलों पर कार्रवाई हुई। उन्होंने बच्चों के साथ कथित मारपीट, सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रतिबंधात्मक आदेश और बैरिकेड हटाने की मांग उठाई।

सुनवाई के दौरान मेट्रो स्टेशनों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। एक तरफ 45 स्टेशनों के रोके जाने की जानकारी दी गई, जबकि एक अधिवक्ता ने 47 स्टेशन बंद होने की बात कही। इस अंतर पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष source material में उपलब्ध नहीं है।

हरिहरन ने कहा कि प्रैक्टिस करने वाले वकील शहर में एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा पा रहे हैं। एक महिला अधिवक्ता ने बताया कि करीब 150 वकील शांतिपूर्वक पैदल चल रहे थे, तभी उनमें से 4 लोगों को रेड लाइट पर पकड़कर जेल वैन में ले जाया गया।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का केंद्र मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं की बहाली, आम लोगों की आवाजाही तथा शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर है। अदालत पुलिस कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के संदर्भ में देख रही है और अंतरिम आदेश जारी करने की बात कह चुकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. सुप्रीम कोर्ट में किस मामले पर सुनवाई हो रही है?

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।

Q. अदालत ने मेट्रो सेवाओं के बारे में क्या कहा?

अदालत ने मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलाने की बात कही, जब तक कानून-व्यवस्था के कारण रोक जरूरी न हो।

Q. इंटरनेट सेवाओं पर अदालत का क्या रुख है?

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की बात कही।

Q. कौन-से संवैधानिक अधिकार सुनवाई के केंद्र में हैं?

अदालत अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर विचार कर रही है।

Q. कपिल सिब्बल ने किन मुद्दों पर सवाल उठाए?

उन्होंने धारा 163, लोगों को ट्रेनों से उतारे जाने, हिरासत, बैरिकेड और इंटरनेट बंद किए जाने पर सवाल उठाए।

Q. मेट्रो स्टेशनों की संख्या को लेकर क्या जानकारी सामने आई?

केंद्र की ओर से 45 स्टेशनों के रोके जाने की जानकारी दी गई। एक अधिवक्ता ने 47 स्टेशन बंद होने की बात कही।