दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य और सुप्रीम कोर्ट की वकील मेनका गुरुस्वामी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच 11 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई करेगी। इस सुनवाई में एहतियातन हिरासत के इस्तेमाल और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवालों पर विचार होना है।

याचिका में क्या कहा गया

याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस अधिकार को रोकने के लिए एहतियातन हिरासत जैसे कदम नहीं उठाए जा सकते। याचिका में खास तौर पर उन नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाया गया है, जो अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

मेनका गुरुस्वामी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों को सड़कों से और विपक्षी नेताओं को उनके आवासों से हिरासत में लिया गया। याचिका में इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताया गया है।

किन नेताओं को हिरासत में लिया गया

दिल्ली में शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इनमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तथा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन शामिल हैं।

ममता बनर्जी को उनकी पार्टी के कई सांसदों के साथ साउथ एवेन्यू इलाके से हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए नेताओं में तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ' ब्रायन और डोला सेन भी शामिल थे। पुलिस के रोके जाने के बाद ममता बनर्जी ने बस स्टॉप पर धरना दिया था।

अरविंद केजरीवाल को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अपने आवास से निकलने की कोशिश कर रहे थे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि राजधानी में लोगों की आवाजाही रोककर डर और दबाव का माहौल बनाया गया।

पिनराई विजयन के साथ सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास और पार्टी महासचिव एम.ए. बेबी को भी हिरासत में लिया गया। इन्हें छत्रसाल स्टेडियम स्थित अस्थायी डिटेंशन सेंटर भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

प्रदर्शन का मुद्दा क्या था

प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। अलग-अलग विपक्षी दलों और नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दिल्ली में प्रदर्शन की योजना बनाई थी।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच की सुनवाई अहम होगी। अदालत के सामने यह सवाल है कि विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लेना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है या नहीं।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवालों को अदालत के सामने ले गई है। 11 अक्टूबर की विशेष बेंच की सुनवाई में इस मामले पर आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. यह मामला सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा?

मामला प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। याचिका में पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है।

Q. याचिका किसने दायर की है?

याचिका तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य और सुप्रीम कोर्ट की वकील मेनका गुरुस्वामी ने दायर की है।

Q. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी?

विशेष बेंच 11 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई करेगी।

Q. प्रदर्शन किस मुद्दे पर हुआ था?

प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

Q. हिरासत में लिए गए प्रमुख नेताओं में कौन शामिल हैं?

ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनराई विजयन समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था।