सऊदी अरब ने मदीना के जबल सय्यद क्षेत्र में बड़े खनिज संसाधन का अनुमान सामने रखा है। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज बिन सलमान के मुताबिक, यहां करीब 11 करोड़ टन कच्चा अयस्क है। इसमें रेयर अर्थ खनिजों के भारी तत्व और यूरेनियम मौजूद होने की बात कही गई है।
यह जानकारी वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सम्मेलन के दौरान दी गई। अनुमान जबल सय्यद प्रोजेक्ट में हुए सर्वे और भूवैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है। मंत्री ने यूरेनियम की सटीक प्रतिशत मात्रा नहीं बताई।
खोज का महत्व
जबल सय्यद मदीना क्षेत्र में स्थित है और जेद्दा से करीब 350 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताया जाता है। इस इलाके में दुर्लभ धातुओं की मौजूदगी को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। नए अध्ययन के बाद यहां मौजूद संसाधन का अनुमान बढ़कर सामने आया है।
रेयर अर्थ (Rare Earth) का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा और रक्षा उद्योग में होता है। यूरेनियम परमाणु ऊर्जा के लिए जरूरी कच्चा माल माना जाता है। इसी वजह से इस खोज का महत्व केवल खनन तक सीमित नहीं है।
मंत्री के अनुसार, जबल सय्यद दुनिया के उन बड़े स्थलों में शामिल हो सकता है जहां दुर्लभ धातुओं का विकास चल रहा है। हालांकि, इस दावे के साथ कोई सटीक उत्पादन आंकड़ा या खनन समयसीमा नहीं बताई गई।
विजन 2030 से जुड़ी योजना
सऊदी अरब लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था और सरकारी आय के लिए तेल पर निर्भर रहा है। विजन 2030 के तहत देश खनन, नवीकरणीय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सरकार ऊर्जा मिश्रण में तेल और गैस के अलावा सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
घरेलू यूरेनियम निकालना और नागरिक परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाना इसी व्यापक योजना का हिस्सा है। सऊदी अरब यूरेनियम खोज के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम भी चला रहा है।
यूरेनियम निकालने का दूसरा रास्ता
सऊदी अरब फॉस्फेट खाद बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाले अम्ल से यूरेनियम निकालने की संभावना पर भी काम कर रहा है। देश उत्तर में बड़े फॉस्फेट उत्पादकों में शामिल है। फ्रांस की कंपनी ओरेनो के साथ इस दिशा में परीक्षण हुए हैं और इनके आर्थिक संकेत सकारात्मक बताए गए हैं।
इस विकल्प से यूरेनियम हासिल करने की कोशिश खनन क्षेत्र से बाहर मौजूद संसाधनों के इस्तेमाल पर आधारित है। हालांकि, इसके व्यावसायिक विस्तार की समयसीमा या उत्पादन क्षमता की जानकारी नहीं दी गई है।
अमेरिका के साथ परमाणु सहयोग
यह घोषणा अमेरिका और सऊदी अरब के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौते के बाद हुई है। दोनों देशों ने जुलाई में द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के साथ परमाणु सहयोग पर भी सहमति की थी। इसे लंबे समय और अरबों डॉलर वाली साझेदारी की नींव बताया गया था।
समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को विकसित करने में मदद करेंगी। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब को अपने क्षेत्र में यूरेनियम संवर्धन का विकल्प भी मिला है। इस विकल्प के अमेरिकी निगरानी से जुड़े पहलू को लेकर चर्चा हुई है।
इसी संदर्भ में प्राकृतिक अयस्क में यूरेनियम की मौजूदगी को सऊदी की भविष्य की परमाणु योजना से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल, उपलब्ध घोषणा में यूरेनियम की सटीक मात्रा, प्रतिशत और व्यावसायिक उत्पादन की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है।
निष्कर्ष
मदीना में अयस्क का यह अनुमान सऊदी अरब की खनन महत्वाकांक्षा, रेयर अर्थ संसाधनों और नागरिक परमाणु ऊर्जा योजना को एक साथ जोड़ता है। आगे इसका असर संसाधन के वास्तविक मूल्यांकन और विकास की दिशा पर निर्भर करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. सऊदी अरब में कितने अयस्क का अनुमान मिला है?
करीब 11 करोड़ टन कच्चे अयस्क का अनुमान बताया गया है।
Q. यह खनिज संसाधन कहां मिला है?
यह मदीना के जबल सय्यद क्षेत्र में बताया गया है। यह जगह जेद्दा से करीब 350 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।
Q. अयस्क में कौन-कौन से खनिज मौजूद हैं?
इसमें भारी रेयर अर्थ तत्वों और यूरेनियम की मौजूदगी बताई गई है।
Q. यूरेनियम की मात्रा कितनी है?
यूरेनियम का सटीक प्रतिशत या मात्रा नहीं बताई गई है।
Q. रेयर अर्थ का इस्तेमाल कहां होता है?
इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा और रक्षा उद्योग में होता है।
Q. सऊदी अरब की यूरेनियम योजना क्या है?
देश यूरेनियम खोज का राष्ट्रीय कार्यक्रम चला रहा है और फॉस्फेट खाद प्रक्रिया से यूरेनियम निकालने की संभावना पर भी परीक्षण कर चुका है।













