पोप लियो XIV को लंग कैंसर होने की पुष्टि हुई है। वेटिकन ने मंगलवार को जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया कि रोम के अगोस्तीनो जेमेली अस्पताल में उनकी 90 मिनट की सर्जरी हुई। ऑपरेशन के दौरान उनके दाएं फेफड़े का निचला हिस्सा निकाला गया।

जांच में हटाए गए हिस्से में कैंसर की पुष्टि हुई। वेटिकन के अनुसार, सर्जरी सफल रही और इस दौरान कोई परेशानी नहीं आई। ऑपरेशन के बाद पोप को होश भी आ गया था। डॉक्टर अब यह जांच कर रहे हैं कि बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैली है या नहीं।

पोप की सेहत को देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है। उनके सभी सार्वजनिक कार्यक्रम 20 अक्टूबर तक रद्द कर दिए गए हैं। यह फैसला उनके इलाज और स्वास्थ्य लाभ के दौरान उनकी सार्वजनिक गतिविधियों पर असर डालेगा।

बीमारी और सर्जरी से जुड़ी जानकारी

पोप ने रविवार को रोम में सेंट पीटर्स स्क्वायर के सामने बालकनी से लोगों को संबोधित करते हुए अपनी सर्जरी के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि फेफड़े की गांठ सीमित है और शुरुआती चरण में ही इसका पता चल गया। डॉक्टरों ने गांठ हटाने के लिए ऑपरेशन की सलाह दी थी।

फेफड़ों में बनने वाली छोटी गांठों को पल्मोनरी नोड्यूल कहा जाता है। ऐसी गांठें आम होती हैं और हर गांठ कैंसर वाली हो, यह जरूरी नहीं है। वेटिकन ने बताया कि आगे की जांच में पोप के फेफड़े में पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा यानी कैंसर की पुष्टि हुई। ऑपरेशन से पहले की जांच में भी इसी तरह के कैंसर का शक था।

पोप के अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे। कई लोगों ने घंटों इंतजार किया। पोप की कार अस्पताल पहुंची तो लोगों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कार की खिड़की से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।

पोप लियो XIV कौन हैं

पोप लियो XIV को 8 मई 2025 को कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। वे अमेरिका से चुने गए पहले पोप हैं। उनका असली नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है और उनका जन्म 14 सितंबर 1955 को अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था।

पोप कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु और दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों के आध्यात्मिक नेता होते हैं। वे वेटिकन सिटी में रहते हैं। वेटिकन सिटी इटली की राजधानी रोम के अंदर बसा दुनिया का सबसे छोटा देश है।

कैथोलिक चर्च के प्रमुख के रूप में पोप दुनिया भर के चर्चों, पादरियों और बिशपों का मार्गदर्शन करते हैं। वे धार्मिक नियमों, ईसाई शिक्षाओं और नैतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। युद्ध, गरीबी और शांति जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी वे अपील करते हैं।

पोप बनने से पहले लियो ने पादरी, मिशनरी और बिशप के रूप में काम किया। उन्होंने अपनी जिंदगी का लंबा समय दक्षिण अमेरिका के पेरू में बिताया। वहां उन्होंने धार्मिक और सामाजिक काम किए और पेरू के चिक्लायो इलाके में बिशप की जिम्मेदारी संभाली।

2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें वेटिकन में बिशप चुनने से जुड़े अहम विभाग का प्रमुख बनाया था। बाद में उन्हें कार्डिनल बनाया गया। कार्डिनल कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ धर्मगुरु होते हैं, जो नए पोप के चुनाव में हिस्सा लेते हैं।

निष्कर्ष

पोप लियो XIV की 90 मिनट की सर्जरी के बाद वेटिकन ने फेफड़े के कैंसर की पुष्टि की है। ऑपरेशन सफल रहा है, लेकिन डॉक्टर अब यह जांच कर रहे हैं कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैला है या नहीं। उनके सार्वजनिक कार्यक्रम 20 अक्टूबर तक रद्द रहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. पोप लियो XIV को कौन सी बीमारी हुई है?

पोप लियो XIV के फेफड़े में कैंसर की पुष्टि हुई है। जांच में पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा सामने आया।

Q. उनकी सर्जरी कितनी देर चली?

रोम के अगोस्तीनो जेमेली अस्पताल में उनकी 90 मिनट की सर्जरी हुई।

Q. सर्जरी में क्या किया गया?

सर्जरी के दौरान उनके दाएं फेफड़े का निचला हिस्सा निकाला गया।

Q. सर्जरी के बाद पोप की स्थिति कैसी है?

वेटिकन के मुताबिक, सर्जरी सफल रही और पोप को ऑपरेशन के बाद होश आ गया था।

Q. पोप के कार्यक्रम कब तक रद्द हैं?

उनके सभी सार्वजनिक कार्यक्रम 20 अक्टूबर तक रद्द किए गए हैं।

Q. पोप लियो XIV कब चुने गए थे?

उन्हें 8 मई 2025 को कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था।