नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरक्षाकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। इसी दौरान बाढ़ प्रभावित इलाक़ों से बड़ी संख्या में शव बरामद होने के कारण उनके सुरक्षित प्रबंधन की चुनौती बढ़ गई है। महामारी फैलने की आशंका ने प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
चितवन में अस्पताल की क्षमता भर जाने के बाद शवों को 1 सरकारी दफ़्तर में रखा जा रहा है। इलाके में मौजूद बीबीसी संवाददाता ईश्वर जोशी के मुताबिक, शवों से दुर्गंध आने लगी है। यह कमरा शवों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
चितवन में 178 शव मिले
चितवन के मुख्य ज़िला अधिकारी गणेश आर्याल ने बताया कि जिले में अब तक 178 शव मिले हैं। इनमें 74 पुरुष और 41 महिलाएं शामिल हैं। बरामद शवों में 8 बच्चे भी हैं, जिनमें 6 लड़के और 2 लड़कियां हैं।
आर्याल ने कहा कि गुरुवार को मिले अधिकांश शव सड़ने लगे थे। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में महामारी रोकने के लिए शवों की उचित व्यवस्था करना और कठिन हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र के साथ बातचीत चल रही है।
देशभर में सैकड़ों शव बरामद
नेपाल की नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने बताया कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद शुक्रवार शाम तक 579 शव बरामद किए जा चुके थे। अधिकारियों के अनुसार, क़रीब 4000 लोगों को बचाया गया है।
अथॉरिटी के शुक्रवार देर शाम के अपडेट में कहा गया कि लापता लोगों की संख्या बढ़कर हज़ारों हो गई है। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। लापता लोगों में पुलिस, सेना, सशस्त्र पुलिस बल, सीमा शुल्क और इमिग्रेशन कार्यालयों के कर्मचारी भी हैं। नेपाल आए लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 517 बताई गई है।
जिलों और केंद्र के बीच प्रबंधन पर चर्चा
नेपाल का गृह मंत्रालय मृतकों की संख्या बढ़ने के बाद शव प्रबंधन की व्यवस्था पर संबंधित जिलों के साथ समन्वय कर रहा है। गृह मंत्रालय की उप प्रवक्ता रमा आचार्य सुबेदी ने बताया कि रसुआ, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी में शव मिल रहे हैं।
इन जिलों में मिले शवों का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर किया जाए या उन्हें केंद्र में लाया जाए, इस पर चर्चा चल रही है। मंत्रालय ने प्रबंधन प्रक्रिया में तेज़ी लाने की बात भी कही है।
पहचान और सुरक्षित भंडारण में मुश्किल
महामारी विज्ञान और रोग नियंत्रण विभाग ने कहा है कि प्रभावित जिलों में शवों की बढ़ती संख्या महामारी नियंत्रण के लिए चुनौती बन रही है। विभाग के निदेशक डॉक्टर अनुज भट्टाचन के अनुसार, पहचान होने तक शवों को ऐसी जगह रखना ज़रूरी है जहां हवा में नमी हो।
सीमित क्षमता के बीच 1 साथ बड़ी संख्या में शव आने से व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। धाडिंग में मिले शवों को काठमांडू और पोखरा भेजना पड़ा। कई शव क्षतिग्रस्त भी हैं, इसलिए पहचान पूरी होने तक उन्हें लंबे समय तक रेफ्रिजरेटर में रखना मुश्किल हो रहा है।














