कोलकाता पुलिस आयुक्त अजॉय नंद ने मशाल जुलूसों की अनुमति को लेकर पुलिस की प्रक्रिया स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि किसी भी जुलूस के लिए पहले आवेदन देना होता है और पुलिस को उसके आयोजक, समय तथा अन्य जरूरी परिस्थितियों की जांच करनी पड़ती है।

अजॉय नंद के अनुसार, किसी इलाके में उसी समय किसी दूसरे समूह का कार्यक्रम पहले से तय हो सकता है। स्थानीय स्तर पर अन्य मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। इसलिए जुलूस की अनुमति देने से पहले संबंधित जानकारी पर चर्चा की जाती है।

पुलिस यह भी देखती है कि जुलूस में कितने लोग शामिल होंगे और उसका रास्ता कहां से शुरू होकर कहां तक जाएगा। आयुक्त ने कहा कि किसी जुलूस से यातायात व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। ऐसे में रास्ते और भीड़ के प्रबंधन की तैयारी पहले से जरूरी होती है।

आयोजकों की जिम्मेदारी

आयुक्त ने आयोजकों से कहा कि वे इन सभी पहलुओं को पहले से ध्यान में रखें और कानून-व्यवस्था संभालने वाली संबंधित एजेंसियों से संपर्क करें। उनके मुताबिक, जुलूस आयोजित करने वालों को तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट के आधार पर पुलिस कानून-व्यवस्था की पूरी व्यवस्था नहीं कर सकती। पुलिस को कार्यक्रम से जुड़ी औपचारिक और जरूरी जानकारी पहले मिलनी चाहिए, ताकि संभावित यातायात और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर काम किया जा सके।

अजॉय नंद ने यह भी कहा कि अगर जरूरी नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो स्थिति अव्यवस्था और अराजकता की ओर जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस अनुमति नहीं देती, क्योंकि इस तरह कार्यक्रम को संभालना व्यावहारिक नहीं होता।

दूसरे नागरिकों के अधिकार भी महत्वपूर्ण

पुलिस आयुक्त ने जुलूस निकालने के अधिकार के साथ दूसरे नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले किसी कार्यक्रम की योजना बनाते समय यह ध्यान रखना होगा कि उससे अन्य लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

इसलिए आयोजकों को आवेदन, प्रस्तावित मार्ग, संभावित प्रतिभागियों की संख्या और कार्यक्रम के समय से जुड़ी जानकारी संबंधित अधिकारियों के साथ साझा करनी होगी। पुलिस इन्हीं पहलुओं की समीक्षा के बाद अनुमति देने या नहीं देने पर फैसला करेगी।

निष्कर्ष

कोलकाता पुलिस का कहना है कि मशाल जुलूस की अनुमति तय प्रक्रिया, मार्ग, भीड़, समय और स्थानीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद दी जाएगी। अजॉय नंद ने आयोजकों से संबंधित अधिकारियों से पहले संपर्क करने और दूसरे नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने को कहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मशाल जुलूस के लिए क्या जरूरी है?

जुलूस के लिए आवेदन देना और कार्यक्रम से जुड़ी जरूरी जानकारी पुलिस के सामने रखना आवश्यक है।

Q. पुलिस किन बातों की जांच करती है?

पुलिस आयोजक, कार्यक्रम का समय, संभावित प्रतिभागियों की संख्या, प्रस्तावित मार्ग और स्थानीय परिस्थितियों की समीक्षा करती है।

Q. जुलूस के मार्ग की जानकारी क्यों जरूरी है?

जुलूस से यातायात प्रबंधन की चुनौती पैदा हो सकती है। मार्ग की जानकारी मिलने से पुलिस व्यवस्था की तैयारी कर सकती है।

Q. क्या केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर पुलिस व्यवस्था करेगी?

अजॉय नंद ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कानून-व्यवस्था की व्यवस्था नहीं की जा सकती।

Q. नियमों का पालन नहीं होने पर क्या होगा?

ऐसी स्थिति में पुलिस अनुमति नहीं देगी, क्योंकि कार्यक्रम को संभालना व्यावहारिक नहीं होगा।