कोलकाता के प्रसिद्ध चोरबगान सार्वजनीन पंडाल में शनिवार को हुई भगदड़ के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की है। हादसे में 19 दर्शनार्थियों की जान गई, जबकि 35 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हुए। मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद के साथ नौकरी देने का फैसला भी किया गया है।
सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देगी। इसके अलावा, प्रभावित परिवार के 1 सदस्य को ग्रुप-डी श्रेणी में सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है। इस फैसले से उन परिवारों को आर्थिक सहारा देने की कोशिश की गई है, जिन्होंने हादसे में अपना सदस्य खोया है।
सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
हादसे के बाद पूरे पश्चिम बंगाल के प्रमुख पूजा पंडालों में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा का निर्देश दिया गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने को कहा है।
इस घटना के बाद नौकरी से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों को लेकर है, जिनके मृतक सदस्य पश्चिम बंगाल के निवासी नहीं थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में बड़े सार्वजनिक हादसे या आपदा में मारे गए बाहरी राज्यों के लोगों के आश्रितों को अनुकंपा नौकरी देने के लिए कोई स्थायी कानूनी ढांचा या लिखित नियम उपलब्ध नहीं है।
ऐसे मामलों में फैसला राज्य की विशेष राहत नीति पर निर्भर करता है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सरकार यह तय करती है कि राहत का दायरा किन परिवारों तक होगा और नौकरी देने की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाएगी।
डोमिसाइल की शर्त कब लागू नहीं होती
अगर राज्य सरकार किसी बड़े हादसे के बाद बिना क्षेत्रीय भेदभाव के मदद देने का फैसला करती है, तो डोमिसाइल की अनिवार्य शर्त बाधा नहीं बनती। ऐसी स्थिति में मृतक पश्चिम बंगाल का निवासी हो या किसी दूसरे राज्य का, उसके निकटतम आश्रित को घोषित नौकरी का लाभ मिल सकता है। चोरबगान पंडाल हादसे के संदर्भ में घोषित सहायता इसी तरह की विशेष व्यवस्था के तहत बताई गई है।
हालांकि, ऐसी नौकरी सामान्य सरकारी अनुकंपा नियुक्ति से अलग प्रक्रिया के तहत आती है। आमतौर पर अनुकंपा नियुक्ति उन सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के लिए होती है, जिनकी सेवाकाल के दौरान मृत्यु हुई हो। सार्वजनिक दुर्घटना में सरकार मानवीय आधार पर अलग फैसला ले सकती है।
कैबिनेट मंजूरी के बाद आगे बढ़ती है प्रक्रिया
मुख्यमंत्री स्तर पर घोषणा के बाद राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विशेष प्रस्ताव लाया जाता है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ऐसे विशेष पदों का सृजन किया जाता है। इसके बाद पात्र परिवारों से जुड़े दस्तावेजों और आवेदन की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
इन विशेष घोषणाओं में नौकरी आमतौर पर ग्रुप-डी या होम गार्ड जैसे पदों के लिए तय की जाती है। आवेदक का मृतक का वैधानिक उत्तराधिकारी होना जरूरी है। पति, पत्नी, पुत्र या अविवाहित पुत्री जैसे निकटतम आश्रित इस दायरे में आ सकते हैं।
नौकरी पाने के लिए पद के अनुसार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा भी पूरी करनी होगी। उपलब्ध जानकारी में 8वीं या 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना उदाहरण के तौर पर बताया गया है। इसलिए बाहरी राज्य के परिवारों के लिए भी नौकरी का लाभ घोषणा, कैबिनेट मंजूरी और पात्रता शर्तों पर निर्भर रहेगा।
निष्कर्ष
चोरबगान पंडाल हादसे के बाद घोषित सहायता में 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और परिवार के 1 सदस्य को ग्रुप-डी नौकरी शामिल है। बाहरी राज्य के मृतकों के परिजनों के लिए स्थायी नियम नहीं है, लेकिन विशेष सरकारी निर्णय में डोमिसाइल की शर्त हटाई जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. चोरबगान पंडाल हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
हादसे में 19 दर्शनार्थियों की जान चली गई। 35 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हुए।
Q. मृतकों के परिवारों को कितनी आर्थिक मदद मिलेगी?
प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का फैसला किया गया है।
Q. क्या मृतक के परिवार के 1 सदस्य को नौकरी मिलेगी?
हां, राज्य सरकार ने प्रभावित परिवार के 1 सदस्य को ग्रुप-डी श्रेणी में सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।
Q. क्या दूसरे राज्य के निवासी के परिवार को नौकरी मिल सकती है?
ऐसे मामलों के लिए पश्चिम बंगाल में कोई स्थायी लिखित नियम उपलब्ध नहीं है। नौकरी विशेष राहत नीति और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।
Q. क्या बाहरी राज्य के परिवारों के लिए डोमिसाइल जरूरी होगा?
अगर सहायता बिना क्षेत्रीय भेदभाव के घोषित की जाती है, तो डोमिसाइल की अनिवार्य शर्त लागू नहीं होगी।
Q. नौकरी के लिए कौन पात्र हो सकता है?
मृतक का वैधानिक उत्तराधिकारी, जैसे पति, पत्नी, पुत्र या अविवाहित पुत्री, पात्र हो सकता है। पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा भी पूरी करनी होगी।





