इंडोनेशिया के जंगलों और पीटलैंड में लगी आग का धुआं अब पड़ोसी देशों की हवा को भी प्रभावित कर रहा है। सुमात्रा और बोर्नियो के कई हिस्सों में कई हफ्तों से आग जल रही है। इसके धुएं से मलेशिया और सिंगापुर के कुछ इलाकों में धुंध छाई है और हवा की गुणवत्ता खराब हुई है।
इस आग को बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में गर्म और सूखा मौसम शामिल है। अल-नीनो के दौरान इंडोनेशिया के कई हिस्सों में बारिश कम और तापमान ज्यादा रहा। इससे जंगल और सूखी जमीन जल्दी आग पकड़ने लगी। खेती या दूसरे कामों के लिए जमीन साफ करने के मकसद से आग लगाने की घटनाएं भी आग फैलने का एक कारण बनी हैं।
एक देश में लगी आग का धुआं जब दूसरे देशों तक पहुंचकर वहां की हवा खराब करता है, तो इसे ट्रांसबाउंड्री हेज कहा जाता है। इंडोनेशिया की मौजूदा आग का असर इसी तरह मलेशिया और सिंगापुर तक पहुंचा है।
आग का फैलाव और हॉटस्पॉट
इस साल जुलाई तक करीब 95,000 हेक्टेयर जमीन आग से प्रभावित हुई थी। अगस्त के आखिरी हफ्ते में करीब 6,902 हॉटस्पॉट मिले। इनमें 5,201 हॉटस्पॉट कालीमंतन में दर्ज किए गए।
सितंबर में भी आग का असर कम नहीं हुआ। 15 सितंबर तक इंडोनेशिया में 1,437 बड़े और साफ तौर पर पहचाने गए हॉटस्पॉट मिले थे। इनमें 689 हॉटस्पॉट सेंट्रल कालीमंतन में थे। इन आग से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड भी हवा में पहुंचती है।
1 से 7 सितंबर के बीच इंडोनेशिया की जंगलों की आग से करीब 1.97 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड निकलने का अनुमान लगाया गया। यह उस हफ्ते दुनिया में जंगलों की आग से हुए कुल इमिशन का एक तिहाई से ज्यादा था।
पीटलैंड में आग बुझाना मुश्किल
इंडोनेशिया में आग का बड़ा हिस्सा पीटलैंड में लगा है। इस तरह की जमीन में पुराने पेड़-पौधों के अवशेष लंबे समय तक जमा रहते हैं और इसमें काफी कार्बन मौजूद होता है। पीटलैंड सामान्य तौर पर नम रहती है, लेकिन सूखने पर इसमें आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
पीटलैंड की आग सिर्फ सतह पर नहीं जलती। यह जमीन के भीतर भी सुलग सकती है। इसलिए ऊपर से आग बुझाने के बाद भी नीचे इसका कुछ हिस्सा बचा रह सकता है और बाद में फिर फैल सकता है। इसी वजह से ऐसी आग पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल होता है।
इंडोनेशिया में करीब 2.4 करोड़ हेक्टेयर पीटलैंड है। इनमें करीब 1.6 करोड़ हेक्टेयर जमीन को आग के लिहाज से ज्यादा जोखिम वाला बताया गया है।
पड़ोसी देशों की हवा पर असर
मलेशिया के बोर्नियो वाले हिस्सों में कई जगह हवा बहुत खराब हो गई। सितंबर में कुछ इलाकों का एयर पॉल्यूशन इंडेक्स 500 से ऊपर चला गया था। सिंगापुर में भी धुंध के कारण हवा की गुणवत्ता खराब हुई।
धुएं में मौजूद छोटे कण सांस के साथ शरीर के भीतर जा सकते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है। आग से जंगलों और जानवरों को भी नुकसान पहुंच रहा है। पेड़-पौधों के जलने के साथ कई जानवरों का रहने और खाने का ठिकाना भी खत्म हो जाता है।
इंडोनेशिया सरकार आग पर नजर रखने और उसे बुझाने के लिए जमीन पर टीमों के साथ विमानों का इस्तेमाल कर रही है। पीटलैंड में पानी का स्तर बनाए रखना और जमीन साफ करने के लिए आग लगाने की घटनाओं को रोकना भी इस समस्या से निपटने का हिस्सा है।
निष्कर्ष
इंडोनेशिया की जंगलों और पीटलैंड की आग ने धुएं और धुंध का असर मलेशिया तथा सिंगापुर तक पहुंचा दिया है। कम बारिश, ज्यादा तापमान और सूखी पीटलैंड ने खतरा बढ़ाया है, जबकि आग पर काबू पाने के लिए निगरानी, बुझाने की कार्रवाई और पीटलैंड में पानी बनाए रखना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. इंडोनेशिया की आग का धुआं किन देशों तक पहुंचा है?
मलेशिया और सिंगापुर तक धुआं पहुंचा है। दोनों देशों के कुछ इलाकों में धुंध और खराब हवा दर्ज की गई।
Q. आग बढ़ने की प्रमुख वजहें क्या हैं?
गर्म और सूखा मौसम, अल-नीनो के दौरान कम बारिश और ज्यादा तापमान इसके प्रमुख कारणों में हैं। जमीन साफ करने के लिए लगाई जाने वाली आग भी इसे बढ़ाती है।
Q. ट्रांसबाउंड्री हेज का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि एक देश में लगी आग का धुआं दूसरे देश की हवा को भी खराब कर रहा है।
Q. पीटलैंड की आग बुझाना मुश्किल क्यों होता है?
आग जमीन के भीतर भी सुलग सकती है। इसलिए सतह पर आग बुझने के बाद भी यह नीचे बची रहकर फिर फैल सकती है।
Q. धुएं से किन लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है?
बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को धुएं के छोटे कणों से ज्यादा परेशानी हो सकती है।
Q. इंडोनेशिया सरकार क्या कर रही है?
सरकार आग बुझाने और उस पर नजर रखने के लिए जमीन पर टीमों के साथ विमानों का इस्तेमाल कर रही है।







