पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर PTI समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत से इस्लामाबाद के लिए लॉन्ग मार्च शुरू किया है। मार्च में हजारों लोग शामिल हैं और काफिला करीब 275 किमी दूर राजधानी की ओर बढ़ रहा है।
लक्की मारवत से करीब 3 किमी आगे प्रदर्शनकारियों और फ्रंटियर फोर्स के बीच टकराव हुआ। दोनों पक्षों की ओर से पथराव के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। करीब 1 घंटे बाद मार्च फिर आगे बढ़ा। इस्लामाबाद में संसद और हाईवे की ओर जाने वाले रास्तों को कंटेनर लगाकर बंद किया गया है।
PTI का दावा है कि पंजाब में शनिवार रात उसके लगभग दो हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पार्टी और सरकार के बीच शुक्रवार और शनिवार को बातचीत के दो दौर हुए, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। PTI ने इमरान से तत्काल मुलाकात और निजी डॉक्टरों की देखरेख में इलाज के लिए उन्हें अस्पताल भेजने की मांग की थी। सरकार ने प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी थी।
मार्च का आगे का रास्ता
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने रविवार रात कहा कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से इसमें शामिल हुए।
काफिला करक, कोहाट और पेशावर से होकर आगे जाने वाला है। 6 अक्टूबर को कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई के समर्थकों के जुड़ने की बात कही गई है। 7 अक्टूबर को पेशावर और 8 अक्टूबर को चरसद्दा व मोहम्मंद के लोग मार्च में शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं।
इमरान खान जेल में
73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं और 3 मामलों में सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक मामले में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है।
तोशाखाना केस में उनकी पत्नी बुशरा भी जेल में हैं। सितंबर में इमरान की बहनों अलीमा, उजमा और नूरीन को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल जांच और इलाज के लिए उन्हें इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में भेजने का आदेश दिया था। 20 अगस्त की रात उन्हें PIMS ले जाया गया और जांच के बाद वापस जेल भेज दिया गया।
गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने बातचीत विफल होने की वजह खैबर पख्तूनख्वा सरकार से आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का भरोसा नहीं मिलना बताया। PTI की सरकार वाले इस प्रांत में लंबे समय से आतंकी हिंसा होती रही है।
मार्च के दौरान PTI सांसद शहजाद शहबाज और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के बीच देर शाम बैठक भी हुई। बैठक में क्या फैसला हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।









