भारत का विदेशी कर्ज (External Debt) जून 2026 के अंत में बढ़कर 778.2 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के मुकाबले इसमें 15.4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।

यह विदेशी कर्ज 18 सितंबर 2026 को खत्म सप्ताह में दर्ज 765.901 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) से करीब 15 अरब डॉलर अधिक है। विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले यह तुलना बाहरी देनदारियों और उपलब्ध विदेशी मुद्रा के बीच अंतर दिखाती है।

जीडीपी के अनुपात में कर्ज घटा

आरबीआई के अनुसार, जून 2026 के अंत में विदेशी कर्ज का जीडीपी अनुपात 20.8% रहा। मार्च 2026 के अंत में यह अनुपात 20.9% था। यानी कुल कर्ज बढ़ने के बावजूद जीडीपी के अनुपात में इसकी हिस्सेदारी कम हुई।

आरबीआई ने बताया कि प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से 90 करोड़ डॉलर का मूल्यांकन लाभ हुआ। इस प्रभाव को हटाने पर जून 2026 के अंत तक विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी 15.4 अरब डॉलर के बजाय 16.4 अरब डॉलर होती।

दीर्घकालिक कर्ज सबसे बड़ा हिस्सा

जून तिमाही में एक साल से अधिक की मूल परिपक्वता अवधि वाला दीर्घकालिक कर्ज 624.7 अरब डॉलर रहा। मार्च 2026 के मुकाबले इसमें 11.2 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।

एक साल तक की मूल परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक कर्ज की कुल बाहरी कर्ज में हिस्सेदारी 19.7% हो गई। पिछली तिमाही के अंत में यह 19.6% थी।

विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले अल्पकालिक कर्ज का अनुपात भी बढ़ा। जून 2026 के अंत में यह 23% था, जबकि मार्च 2026 के अंत में 21.6% दर्ज किया गया था।

डॉलर में सबसे ज्यादा कर्ज

भारत के बाहरी कर्ज में अमेरिकी डॉलर सबसे बड़ी मुद्रा रही। जून 2026 के अंत में डॉलर में कर्ज की हिस्सेदारी 54.8% थी। इसके बाद भारतीय रुपये में कर्ज की हिस्सेदारी 29.8% रही।

अन्य मुद्राओं में येन की हिस्सेदारी 6.9%, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) की 4.1% और यूरो की 3.5% थी।

सरकारी और गैर-सरकारी दोनों कर्ज बढ़े

आरबीआई ने कहा कि जून 2026 के अंत में सरकार और गैर-सरकारी, दोनों क्षेत्रों का बकाया कर्ज मार्च 2026 के मुकाबले बढ़ा।

बाहरी कर्ज में कर्ज सबसे बड़ा घटक रहा और इसकी हिस्सेदारी 34.3% थी। मुद्रा एवं जमा की हिस्सेदारी 22.2%, व्यापार कर्ज एवं अग्रिम की 19.1% और ऋण प्रतिभूतियों की 16.5% रही।

मूलधन और ब्याज भुगतान जून 2026 के अंत में चालू प्राप्तियों का 5.6% रहा। मार्च 2026 में भी यह अनुपात 5.6% था।

निष्कर्ष

जून 2026 के अंत में भारत का विदेशी कर्ज 778.2 अरब डॉलर रहा और यह दर्ज विदेशी मुद्रा भंडार से करीब 15 अरब डॉलर अधिक था। जीडीपी अनुपात में कमी आई, लेकिन अल्पकालिक कर्ज और उसका विदेशी मुद्रा भंडार से अनुपात बढ़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. भारत का विदेशी कर्ज कितना है?

जून 2026 के अंत में भारत का विदेशी कर्ज 778.2 अरब डॉलर था।

Q. विदेशी मुद्रा भंडार कितना दर्ज किया गया?

18 सितंबर 2026 को खत्म सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 765.901 अरब डॉलर था।

Q. विदेशी कर्ज में कितनी बढ़ोतरी हुई?

मार्च 2026 के मुकाबले विदेशी कर्ज 15.4 अरब डॉलर बढ़ा।

Q. भारत के बाहरी कर्ज में किस मुद्रा की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है?

अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 54.8% थी।

Q. विदेशी कर्ज का जीडीपी अनुपात कितना रहा?

जून 2026 के अंत में यह अनुपात 20.8% था, जो मार्च 2026 के 20.9% से कम है।