केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दे दी है। यह हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी Canada Inc. को दी जाएगी, जिसकी मूल कंपनी Fairfax Financial Holdings Limited है। रणनीतिक बिक्री का कुल मूल्य 52,878.08 करोड़ रुपये तय किया गया है।
यह फैसला 14 अक्टूबर 2026 को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में लिया गया। हालांकि, इसे पूर्ण निजीकरण नहीं बताया गया है। सौदे के बाद भी भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की बैंक में हिस्सेदारी बनी रहेगी।
इस बदलाव के बाद कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। खासकर बैंक के 16 हजार से अधिक कर्मचारियों की नौकरी, खातों पर असर, सरकारी हिस्सेदारी और बैंक के नाम को लेकर स्थिति जानना जरूरी है।
कर्मचारियों की नौकरी पर क्या असर होगा?
सरकार के मुताबिक, प्रक्रिया 'गोइंग कंसर्न' यानी चालू व्यवसाय के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसी आधार पर कर्मचारियों की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित बताई गई है। उपलब्ध जानकारी में कर्मचारियों की सेवा शर्तों में किसी बदलाव का उल्लेख नहीं है।
क्या यह IDBI बैंक का पूर्ण निजीकरण है?
सरकार ने इसे पूर्ण निजीकरण के बजाय रणनीतिक पुनर्गठन बताया है। हिस्सेदारी बेचने के बाद केंद्र सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी रहेगी। दोनों की कुल हिस्सेदारी 34% होगी।
हिस्सेदारी किसे बेची जा रही है?
रणनीतिक खरीदार के रूप में Canada Inc. का चयन किया गया है। यह Fairfax Financial Holdings Limited की सहयोगी इकाई है। सौदे को मंजूरी मिलने के बाद यही समूह बैंक के नए प्रबंधन से जुड़ा होगा।
सौदे की कीमत कितनी है?
IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री का कुल मूल्य 52,878.08 करोड़ रुपये है। यह रकम बैंक की तय की गई वैल्यू के आधार पर निर्धारित की गई है।
सरकार और LIC कितनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं?
बेची जा रही 60.72% हिस्सेदारी में केंद्र सरकार का हिस्सा 30.48% और LIC का हिस्सा 30.24% है। सौदे से मिलने वाली राशि दोनों को उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में मिलेगी।
ग्राहकों के खातों और बैंकिंग सेवाओं पर क्या असर पड़ेगा?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ग्राहकों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। बैंक की सेवाएं जारी रहेंगी और खातों को लेकर किसी बदलाव की सूचना नहीं दी गई है।
क्या बैंक का नाम बदलेगा?
अगले 3 वर्षों तक बैंक का नाम 'IDBI Bank' ही रहने की बात कही गई है। इसलिए इस अवधि में ग्राहकों को बैंक के नाम में बदलाव की चिंता नहीं करनी होगी।
क्या डिजिटल सेवाओं में बदलाव हो सकता है?
Fairfax Group के नए प्रबंधन के आने के बाद डिजिटल बैंकिंग सेवाओं, मोबाइल ऐप और कस्टमर केयर सर्विसेज को अधिक आधुनिक और तेज बनाने की उम्मीद जताई गई है। यह बदलाव ग्राहकों के बैंकिंग अनुभव से जुड़ा हो सकता है।
हिस्सेदारी की कीमत कैसे तय की गई?
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को अकेला आधार नहीं बनाया गया। दो स्वतंत्र और पेशेवर वैल्यूएशन एजेंसियों ने 'मार्केट मल्टीपल मेथड' और 'एसेट वैल्यूएशन मेथड' का इस्तेमाल किया। इसके लिए 31 मार्च 2026 तक सरकारी बैंकों के क्लोजिंग अकाउंट्स को आधार बनाया गया।
क्या IDBI बैंक पर पहले नियामकीय पाबंदियां लगी थीं?
वित्तीय हालत खराब होने के कारण RBI ने 5 मई 2017 को IDBI बैंक को 'प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन' यानी PCA फ्रेमवर्क में रखा था। वित्तीय स्थिति सुधरने के बाद 10 मार्च 2021 को ये पाबंदियां पूरी तरह हटा दी गई थीं।
यह प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?
रणनीतिक बिक्री की प्रक्रिया 7 अक्टूबर 2022 को रुचि पत्र यानी EoI आमंत्रित किए जाने के साथ शुरू हुई थी। इसके बाद प्रतिस्पर्धा और बहु-स्तरीय जांच के बाद 14 अक्टूबर 2026 को अंतिम मंजूरी दी गई।
निष्कर्ष
IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन सरकार और LIC की 34% हिस्सेदारी बनी रहेगी। सरकार ने कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित बताई है और अगले 3 वर्षों तक बैंक का नाम IDBI Bank रहने की बात कही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. IDBI बैंक में कितनी हिस्सेदारी बेची जा रही है?
बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेची जा रही है। इसमें केंद्र सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है।
Q. IDBI बैंक का रणनीतिक खरीदार कौन है?
Canada Inc. को रणनीतिक खरीदार चुना गया है। इसकी मूल कंपनी Fairfax Financial Holdings Limited है।
Q. क्या यह पूर्ण निजीकरण है?
नहीं। सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बनी रहेगी।
Q. कर्मचारियों की नौकरी का क्या होगा?
सरकार के मुताबिक, कर्मचारियों की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित है।
Q. ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
ग्राहकों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ने की बात कही गई है।
Q. बैंक का नाम कब बदलेगा?
अगले 3 वर्षों तक बैंक का नाम IDBI Bank रहने की बात कही गई है।
Q. सौदे की कीमत कितनी है?
सौदे की कुल कीमत 52,878.08 करोड़ रुपये है।
Q. IDBI बैंक को PCA फ्रेमवर्क में कब रखा गया था?
RBI ने 5 मई 2017 को बैंक को PCA फ्रेमवर्क में रखा था। ये पाबंदियां 10 मार्च 2021 को हटा दी गई थीं।





