ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके के नंगला श्रीगोपाल गांव में तीन बच्चों समेत 5 लोगों की मौत की वजह अभी साफ नहीं हुई है। मामले में विशेषज्ञों ने मैगी में जहरीला पदार्थ मिलाए जाने या नींद की गोलियों की ज्यादा मात्रा लेने की आशंका जताई है।
घटना शनिवार सुबह की बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मृतक सोते हुए मिले। सामने आए एक वीडियो में एक बच्चे के मुंह से झाग निकलता दिखाई दे रहा है। बच्चे अपने पिता के पास और बेटियां अपनी मां के पास लेटी हुई थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौके की स्थिति से नींद की गोलियों के ओवरडोज की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी आशंका जताई गई है कि बच्चों की मैगी में धीमे असर वाला जहरीला पदार्थ मिलाया गया हो। हालांकि, ये सभी शुरुआती संभावनाएं हैं और मौत का कारण अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा
मेदांता अस्पताल, नोएडा के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. जीसी वैष्णव के अनुसार, पोटेशियम सायनाइड खाने से कुछ सेकेंड में मौत हो सकती है। उन्होंने बताया कि कम गुणवत्ता वाला जहरीला पदार्थ धीरे असर कर सकता है, जबकि ज्यादा मात्रा में जहरीला पदार्थ लेने पर उल्टी हो सकती है।
डॉ. वैष्णव ने यह भी कहा कि नींद की गोलियों की ज्यादा मात्रा लेने पर व्यक्ति सोते समय गंभीर प्रतिक्रिया के बिना भी बेसुध हो सकता है। उनके अनुसार खतरनाक कपूर या चूहे मारने की दवा तेजी से असर कर सकती है और मुंह से झाग, घबराहट या बेचैनी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि नींद की गोलियां ज्यादा लेने पर बच्चे और पति-पत्नी नींद से नहीं जाग पाए होंगे। उन्होंने कहा कि जहरीले पदार्थ के सेवन में घबराहट, बेचैनी और बेसुध होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. ऋषभ कुमार सिंह के मुताबिक, नींद की गोलियों या गंभीर बीमारियों की दवाओं की ज्यादा मात्रा से भी मौत हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में मौत की पुष्टि बिसरा जांच के बाद ही हो पाती है।
फूड प्वाइजनिंग की संभावना पर राय
फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता ने फूड प्वाइजनिंग को दूषित भोजन या पानी से होने वाली स्वास्थ्य समस्या बताया। उनके अनुसार बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनसे बने विषैले पदार्थ शरीर में पहुंचने पर बीमारी हो सकती है।
लंबे समय तक रखा भोजन, ठीक से न पका खाना, खुले में रखा खाद्य पदार्थ और दूषित पानी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डॉ. गुप्ता के अनुसार फूड प्वाइजनिंग में मौत होने में काफी समय लग सकता है।
जांच में क्या स्पष्ट होगा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जहरीले पदार्थ की गुणवत्ता, उसकी मात्रा और मौत से जुड़े दूसरे पहलुओं की जानकारी मिलने की उम्मीद है। बिसरा जांच से भी यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मौत का कारण जहरीला पदार्थ, दवा का ओवरडोज या कोई अन्य वजह थी।
# निष्कर्ष
रबूपुरा में पांच मौतों के मामले में जहरीले पदार्थ और नींद की गोलियों के ओवरडोज, दोनों संभावनाएं सामने आई हैं। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह घटना कहां हुई?
रबूपुरा के नंगला श्रीगोपाल गांव में यह घटना हुई।
Q. कितने लोगों की मौत हुई?
इस मामले में तीन बच्चों समेत 5 लोगों की मौत हुई है।
Q. मौत की कौन-कौन सी वजहें सामने आई हैं?
मैगी में जहरीला पदार्थ मिलाने और नींद की गोलियों के ओवरडोज की आशंका जताई गई है।
Q. क्या मौत की वजह तय हो गई है?
नहीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
Q. फूड प्वाइजनिंग क्या होती है?
फूड प्वाइजनिंग दूषित भोजन या पानी से होने वाली स्वास्थ्य समस्या है, जो बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या विषैले पदार्थों से हो सकती है।







