परिसीमन पर कांग्रेस की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को सरकार ने खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि कांग्रेस ने चर्चा के लिए तारीख देने में रुचि नहीं दिखाई, जबकि कई अन्य विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर बातचीत की जा चुकी है।

यह विवाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उस मांग के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने परिसीमन से जुड़े किसी नए प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की थी। खरगे ने यह मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में रखी थी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने समाजवादी पार्टी, डीएमके, वाईएसआरसीपी, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी समेत कई दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। सरकार ने इन चर्चाओं का उद्देश्य प्रस्तावित कानून के समर्थन में व्यापक सहमति बनाना बताया।

रिजिजू के अनुसार, कांग्रेस ने बार-बार आग्रह के बावजूद चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी। उन्होंने कहा कि इसी वजह से सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किया। सरकार का रुख यह है कि जब कांग्रेस के साथ बातचीत के लिए तारीख तय नहीं हुई, तब सर्वदलीय बैठक की मांग पर सवाल उठता है।

कांग्रेस और सरकार के दावे

सरकार ने कहा कि उसने विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत की, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और खरगे के साथ चर्चा के लिए तारीख तय नहीं हो सकी। रिजिजू ने पिछले सत्र के दौरान उनसे हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया।

इस बयान के साथ सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की कि परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख अन्य विपक्षी दलों से अलग है। कांग्रेस की ओर से इस जवाब पर कोई अलग प्रतिक्रिया की जानकारी अभी नहीं है।

परिसीमन के प्रस्तावित कानून को लेकर सहमति बनाने की सरकार की कोशिशों के बीच संसद के छोटे सत्र की संभावना की चर्चा भी फिर शुरू हुई है। उपलब्ध जानकारी में इस सत्र की तारीख या अवधि नहीं बताई गई है।

सत्रावसान पर भी हुआ विवाद

खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मानसून सत्र के सत्रावसान में हुई देरी पर भी सवाल उठाया था। मानसून सत्र को 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया गया था।

रिजिजू ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है, जो यह तय करता हो कि सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने के बाद कितने समय के भीतर सत्रावसान किया जाना जरूरी है।

उनका कहना था कि केवल सत्रावसान नहीं होने से अपने आप कोई संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अनियमितता पैदा नहीं होती। इस तरह सरकार ने परिसीमन पर चर्चा के साथ-साथ सदन की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आपत्ति का भी जवाब दिया।

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 16 अक्टूबर को पत्र लिखा था। सरकार का जवाब इसी पत्र में उठाए गए परिसीमन और सत्रावसान से जुड़े सवालों पर केंद्रित रहा।

निष्कर्ष

सरकार ने परिसीमन पर कांग्रेस की सर्वदलीय बैठक की मांग स्वीकार नहीं की है। उसका कहना है कि कांग्रेस से तारीख नहीं मिलने के बाद अन्य विपक्षी दलों से बातचीत की गई। इसी घटनाक्रम के बीच संसद के छोटे सत्र की चर्चा सामने आई है, लेकिन उसकी तारीख और अवधि उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. परिसीमन पर बैठक की मांग किसने की थी?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।

Q. सरकार ने कांग्रेस की मांग क्यों खारिज की?

सरकार ने कहा कि कांग्रेस ने चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी।

Q. सरकार ने किन विपक्षी दलों से बातचीत की?

सरकार के अनुसार, समाजवादी पार्टी, डीएमके, वाईएसआरसीपी, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी समेत कई दलों से बातचीत हुई।

Q. बातचीत का उद्देश्य क्या बताया गया?

सरकार ने कहा कि बातचीत का उद्देश्य प्रस्तावित कानून के समर्थन में व्यापक सहमति बनाना था।

Q. संसद के छोटे सत्र को लेकर क्या जानकारी है?

इसकी चर्चा सामने आई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में सत्र की तारीख या अवधि नहीं बताई गई है।

Q. मानसून सत्र कब अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुआ था?

मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया गया था।

Q. खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र कब लिखा था?

मल्लिकार्जुन खरगे ने नरेंद्र मोदी को 16 अक्टूबर को पत्र लिखा था।