दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में Shajarah Tayyebeh Elementary School पर हुए मिसाइल हमले को लेकर पूर्व CIA प्रमुख रिटायर्ड जनरल David Petraeus ने अहम दावा किया है। NDTV World Summit 2026 में उन्होंने कहा कि इस हमले में कम से कम 156 लोगों की मौत हुई थी।

Petraeus के मुताबिक हमले की योजना और टारगेट चुनने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली गई, लेकिन अंतिम ट्रिगर इंसान ने दबाया। उन्होंने इस बात से असहमति जताई कि मशीन ने अपने स्तर पर हमला करने का फैसला लिया था।

उनके अनुसार, AI सिस्टम ने लक्ष्य खोजने और उसे निशाना बनाने में सहायता की। हमला करने का निर्णय एक सैन्य व्यक्ति ने लिया। Petraeus ने यह भी कहा कि सैन्य अभियानों में AI का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है।

यह बयान उस मीडिया रिपोर्ट से अलग है, जिसमें ईरान पर अमेरिकी मिसाइल हमलों के पीछे AI आधारित 'किल चेन' के इस्तेमाल का दावा किया गया था। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि हमले में 123 बच्चों की मौत हुई थी।

मीनाब को टारगेट सूची में कैसे जगह मिली

Bloomberg की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना को ईरान के उन सैन्य ठिकानों की सूची तैयार करने का काम दिया गया था, जिन्हें निशाना बनाया जाना था। इस सूची में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC के नौसैनिक ठिकाने भी शामिल थे। ये ठिकाने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में निगरानी करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के कुछ अधिकारियों ने शुरुआती हमले की योजना बनाने के लिए Palantir Technologies के Maven Smart System का इस्तेमाल किया। टारगेट की पहचान से लेकर उसे मंजूरी देने वाली इस डिजिटल प्रक्रिया को 'किल चेन' कहा गया।

मीनाब का Shajarah Tayyebeh स्कूल उस जमीन पर बनाया गया था, जहां लगभग एक दशक पहले IRGC की नौसैनिक इकाई मौजूद थी। पुराने सैन्य डेटाबेस में इस बदलाव को अपडेट नहीं किया गया था। इसी वजह से Maven AI सिस्टम ने स्कूल को सक्रिय सैन्य ठिकाना समझ लिया और उसे शुरुआती टारगेट सूची में डाल दिया।

AI सिस्टम पर भरोसे का सवाल

रिपोर्ट में बताया गया है कि Maven AI युद्धक्षेत्र से जुड़ी जटिल जानकारी और सैन्य कमांडरों के फैसलों को जोड़ने के लिए 150 से अधिक डेटा इनपुट्स का इस्तेमाल करता है। पहले किसी टारगेट को अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया में खुफिया विश्लेषक, कानूनी विशेषज्ञ, सैन्य कमांडर और हथियार विशेषज्ञ शामिल होते थे। इस प्रक्रिया में घंटों लग सकते थे।

AI टूल ने इस काम को कुछ मिनटों में पूरा करने में मदद की। लेकिन पुराने डेटाबेस में मौजूद गलत जानकारी के कारण स्कूल को सैन्य ठिकाने के रूप में पहचान लिया गया। इससे AI आधारित टारगेटिंग प्रक्रिया और मानवीय फैसले, दोनों पर सवाल खड़े हुए हैं।

Petraeus ने ऐसी सैन्य प्रणाली का समर्थन किया जो इंसानों की ओर से तय किए गए स्पष्ट सुरक्षा मानकों और निर्देशों के अनुसार काम करे। साथ ही, उन्होंने कहा कि सैन्य कमांडरों को अपने AI सिस्टम पर भरोसा रखने के साथ उसके आलोचकों की आशंकाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष

मीनाब स्कूल हमले पर Petraeus का बयान यह स्पष्ट करता है कि उनके मुताबिक AI ने टारगेटिंग प्रक्रिया में मदद की, लेकिन हमला करने का अंतिम निर्णय इंसान ने लिया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पुराने सैन्य डेटाबेस और AI आधारित प्रक्रिया ने स्कूल को सैन्य ठिकाने के रूप में पहचान लिया था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मीनाब स्कूल हमले में कितने लोगों की मौत बताई गई है?

NDTV World Summit में David Petraeus के हवाले से कम से कम 156 लोगों की मौत बताई गई है।

Q. क्या Petraeus ने हमले के लिए AI को जिम्मेदार ठहराया?

नहीं। उन्होंने कहा कि अंतिम हमला करने का फैसला इंसान ने लिया था, जबकि AI ने टारगेट खोजने और निशाना लगाने में मदद की।

Q. Shajarah Tayyebeh स्कूल को सैन्य टारगेट क्यों समझा गया?

रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल की जमीन पर लगभग एक दशक पहले IRGC की नौसैनिक इकाई मौजूद थी। पुराने डेटाबेस में इस बदलाव को अपडेट नहीं किया गया था।

Q. Maven Smart System क्या करता है?

यह AI प्लेटफॉर्म युद्धक्षेत्र से जुड़ी जानकारी और सैन्य फैसलों को जोड़ने में मदद करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह 150 से अधिक डेटा इनपुट्स का इस्तेमाल करता है।

Q. 'किल चेन' किसे कहा गया है?

टारगेट की पहचान से लेकर उसे मंजूरी देने वाली डिजिटल सैन्य प्रक्रिया को 'किल चेन' कहा गया है।

Q. Petraeus ने सैन्य AI के बारे में क्या कहा?

उन्होंने स्पष्ट सुरक्षा मानकों और इंसानों की ओर से तय निर्देशों के आधार पर काम करने वाली सैन्य प्रणाली का समर्थन किया।