मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोषी साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने फैसले में इसके कारण विस्तार से बताए हैं। कोर्ट ने अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी का माना और कहा कि दोनों के व्यवहार में सामान्यता तथा अपराधबोध दिखाई नहीं दिया।

फैसले के मुताबिक, इस मामले में समाज में लौटने और सुधार की संभावना नहीं दिखती। कोर्ट ने कहा कि परिवार से दोनों का खास जुड़ाव नजर नहीं आया। जेल में रहने के दौरान साहिल ने पिता से मिलने में रुचि नहीं दिखाई, जबकि मुस्कान ने अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा नहीं जताई। डेढ़ साल में मुस्कान से मिलने उसके परिवार का कोई सदस्य भी जेल नहीं गया।

कोर्ट ने किन बातों को माना गंभीर

कोर्ट ने कहा कि सौरभ अपने परिवार के साथ रहने की इच्छा लेकर विदेश से लौटा था। इसके बाद उसकी पत्नी मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या की और शव के टुकड़े किए। आदेश में हत्या की योजना, उसे अंजाम देने के तरीके और शव छिपाने की कोशिश को बेहद क्रूर बताया गया।

फैसले में कहा गया कि घटनास्थल की दीवारों और छतों पर मिले खून के निशान वारदात की क्रूरता को दिखाते हैं। कोर्ट के अनुसार, हत्या के बाद शव और साक्ष्य छिपाने का तरीका भी चौंकाने वाला था। इस आचरण को अदालत ने अपराध के प्रति पछतावे या अपराधबोध के अभाव से जोड़ा।

कोर्ट ने माना कि मुस्कान ने अपने पति सौरभ के विश्वास और प्रेम को बेरहमी से कुचला। आदेश में पारिवारिक रिश्ते के भीतर हुई इस घटना को भरोसे को तोड़ने वाली और सामाजिक भरोसे को नुकसान पहुंचाने वाली वारदात बताया गया।

'नीला ड्रम' ने पैदा किया भय

फैसले में कहा गया कि 'नीला ड्रम' पारिवारिक रिश्तों में आतंक का पर्याय बन गया। कोर्ट के मुताबिक, इस घटना के बाद परिवार के निजी और एकांत पलों में भी भय तथा आशंका का प्रवेश हुआ। युवा मन में विवादों को लेकर अज्ञात डर पैदा हुआ।

अदालत ने कहा कि यदि कोई अपराध अपनी विशेष प्रकृति के कारण अनूठा उदाहरण बनता है, तो सजा में रियायत देना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी आधार पर कोर्ट ने इस मामले को सबसे दुर्लभ मामलों की कसौटी पर खरा माना।

कोर्ट ने हत्याकांड को क्रूर, वीभत्स, घिनौना, शैतानी और कायरतापूर्ण प्रवृत्ति वाला बताया। आदेश के अनुसार, इस वारदात से समाज में गहरा आक्रोश पैदा हुआ और सामाजिक संतुलन पर भी खराब असर पड़ा।

निष्कर्ष

कोर्ट ने साहिल और मुस्कान को मृत्युदंड इसलिए उचित माना क्योंकि अपराध का तरीका बेहद क्रूर था, सामाजिक भरोसा टूटा और दोनों में सुधार या अपराधबोध के संकेत नहीं दिखे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. साहिल और मुस्कान को कौन-सी सजा मिली?

कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।

Q. कोर्ट ने अपराध को किस श्रेणी का माना?

कोर्ट ने इसे विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध माना।

Q. कोर्ट ने दोनों के व्यवहार के बारे में क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि दोनों का व्यवहार सामान्य नहीं था और उनमें अपराधबोध दिखाई नहीं दिया।

Q. साहिल और मुस्कान के सुधार की संभावना पर कोर्ट का क्या निष्कर्ष था?

कोर्ट ने सुधार और समाज में वापसी की संभावना नहीं मानी।

Q. परिवार से जुड़े व्यवहार को कोर्ट ने क्यों महत्वपूर्ण माना?

साहिल ने पिता से मिलने में रुचि नहीं दिखाई और मुस्कान ने बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा नहीं जताई।

Q. कोर्ट ने 'नीला ड्रम' के असर को कैसे बताया?

कोर्ट ने कहा कि यह पारिवारिक रिश्तों में आतंक का पर्याय बन गया और इससे भय तथा आशंका का माहौल बना।