अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर अमेरिकी मीडिया की बहस अब इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या यह संकट लंबी क्षेत्रीय जंग में बदल सकता है। इससे एनर्जी मार्केट्स पर बड़ा दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने निजी तौर पर संघर्ष के 2029 तक जारी रहने की संभावना पर चर्चा की है। यह आकलन युद्ध के जल्द खत्म होने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार दिए गए संकेतों से अलग तस्वीर पेश करता है।

ट्रंप के बयान से अलग आकलन

डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयान में कहा था कि उन्हें लगता है कि युद्ध अमेरिकी निचली संसद के मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद खत्म हो जाएगा। ये चुनाव 2 महीने बाद होने वाले हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि कांग्रेस में तेहरान के प्रति कम सख्त रुख रखने वाले लोग सत्ता में आ सकें।

इसके उलट, अमेरिकी मीडिया कवरेज में यह सवाल उठ रहा है कि मौजूदा हालात में संघर्ष को जल्द रोकना कितना संभव होगा। सीएनएन के एक रिपोर्टर ने कहा कि स्थिति के जल्द खत्म होने का कोई संकेत नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट और तेल बाजार पर असर

फ़ारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट संघर्ष की कवरेज के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। अमेरिकी मीडिया ने ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमलों, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल हमलों और दक्षिणी ईरानी जलक्षेत्र में अमेरिकी बेड़े पर हमले के ईरानी सैन्य अधिकारियों के दावों को प्रमुखता दी है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि किसी अमेरिकी युद्धपोत को निशाना नहीं बनाया गया था। इस बीच, होर्मुज स्ट्रेट से माल ढुलाई में बढ़ते व्यवधान की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाई है।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, कुछ एनालिस्ट्स ने कीमत 120 डॉलर या 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना जताई है। यह अनुमान होर्मुज स्ट्रेट से माल ढुलाई में और रुकावट बढ़ने की स्थिति से जुड़ा है।

वॉशिंगटन पोस्ट ने होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण और प्रबंधन को युद्ध खत्म करने की राह में बड़ी बाधाओं में शामिल बताया है। उसी रिपोर्टिंग में अमेरिकी रणनीति को नौसैनिक नाकाबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों के मेल के रूप में पेश किया गया है।

व्यापक क्षेत्रीय संकट

मीडिया कवरेज में यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच टकराव को भी अमेरिका-ईरान संकट के बड़े क्षेत्रीय संदर्भ से जोड़ा गया है। सऊदी अरब के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर पर हूती हमलों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेना के जवाबी हमलों को इस संदर्भ में प्रमुखता मिली है।

इन घटनाओं को बाब अल-मंदेब वाले रास्ते और एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए अतिरिक्त खतरे के रूप में देखा गया है। इस तरह होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब, दोनों रणनीतिक ऊर्जा रास्ते, मौजूदा कवरेज के केंद्र में हैं।

ईरान पर दबाव को लेकर अलग-अलग नजरिया

डोनाल्ड ट्रंप के करीबी मीडिया संस्थानों ने ईरान को अभूतपूर्व दबाव में बताया है। उनके अनुसार, इस दबाव से ईरान की सैन्य शक्ति और आर्थिक बुनियाद कमजोर हुई है। इस नजरिए में अमेरिकी जहाजों पर ईरानी हमलों को तेहरान की हताशा का संकेत माना गया है।

इसके विपरीत, न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और सीएनएन के आकलन में कहा गया है कि ईरान अमेरिका और ग्लोबल इकोनॉमी पर भारी लागत डालने की क्षमता दिखा रहा है। इस दृष्टिकोण के मुताबिक, अधिकतम दबाव की नीति ईरान के आत्मसमर्पण के बजाय तनाव को और बढ़ा सकती है।

निष्कर्ष

संघर्ष के 2029 तक चलने की चर्चा अमेरिकी नीति और मीडिया आकलनों के बीच मौजूद अंतर को सामने लाती है। होर्मुज स्ट्रेट, बाब अल-मंदेब और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के कारण यह संकट केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. अमेरिका-ईरान संघर्ष कब तक चल सकता है?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके 2029 तक जारी रहने की संभावना पर चर्चा की है।

Q. डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म होने को लेकर क्या कहा?

उन्होंने कहा था कि युद्ध अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद खत्म हो सकता है।

Q. तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। कुछ एनालिस्ट्स ने 120 डॉलर या 150 डॉलर तक जाने की संभावना जताई है।

Q. होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?

होर्मुज स्ट्रेट से माल ढुलाई में व्यवधान बढ़ने की आशंका तेल की कीमतों और एनर्जी मार्केट पर दबाव डाल रही है।

Q. क्या किसी अमेरिकी युद्धपोत पर हमला हुआ था?

ईरानी सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी बेड़े पर हमले का दावा किया था, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि किसी अमेरिकी युद्धपोत को निशाना नहीं बनाया गया।