सऊदी अरब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से अलग रास्ते से तेल पहुंचाने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है। यह कदम ड्रोन हमलों के बाद सुरक्षा जांच के लिए उठाया गया। पाइपलाइन रियाद और मदीना के इलाकों से गुजरती है तथा लाल सागर तक कच्चा तेल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है।
सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इराक से आए कई ड्रोन हमलों ने पाइपलाइन को निशाना बनाया। हमलों में संपत्ति को काफी नुकसान हुआ और कई लोग घायल हुए। मंत्रालय ने पाइपलाइन बंद करने को एहतियाती फैसला बताया है।
इस रुकावट का असर तेल बाजार पर तुरंत दिखा। कच्चे तेल की कीमत 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। बाजार पहले ही अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण सप्लाई में आई रुकावट को लेकर दबाव में है।
पाइपलाइन क्यों महत्वपूर्ण है
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन रोजाना 50-70 लाख बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखती है। होर्मुज जलडमरूमध्य को बाइपास करते हुए यह सऊदी क्रूड को लाल सागर तक पहुंचाने में मदद करती है। इस रास्ते में रुकावट आने से तेल की वैकल्पिक सप्लाई पर निर्भरता बढ़ सकती है।
तेल बाजार में चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अचानक कम हुई सप्लाई के मुकाबले ग्लोबल इन्वेंट्री का सुरक्षा स्तर सीमित माना जा रहा है। भारतीय तेल कंपनियां अब यह देख रही हैं कि रुकावट का क्रूड की उपलब्धता, खरीद के स्रोत और लागत पर कितना असर पड़ेगा।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या असर पड़ सकता है
भारत आयातित क्रूड पर काफी निर्भर है। इसलिए अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो वैकल्पिक सप्लाई हासिल करना मुश्किल या महंगा हो सकता है। तेल कंपनियों को नए स्रोत तलाशने और सोर्सिंग में विविधता लाने की जरूरत पड़ सकती है।
क्रूड की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और उपलब्धता में कमी से खरीद तथा ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इससे तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आएगा। source में दिए गए आकलन के मुताबिक, लागत की भरपाई के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
हालांकि, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन की रुकावट कितने समय तक रहती है और कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई कितनी जल्दी जुटा पाती हैं।
होर्मुज और लाल सागर पर बढ़ती चिंता
लाल सागर में पोतों की आवाजाही को लेकर खतरा पिछले सप्ताह बढ़ा था। इसी बीच यमन में सरकारी बलों से लड़ रहे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक द्वीप पर कब्जा कर लिया। यह समुद्री परिवहन का महत्वपूर्ण मार्ग है और होर्मुज के विकल्प के तौर पर देखा जाता है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने केश्म के गवर्नर के हवाले से रविवार के हमले के लिए एक आतंकवादी दुश्मन को जिम्मेदार बताया। एजेंसी के मुताबिक, हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और 4 अन्य लोग घायल हुए। इस मामले पर अमेरिकी सेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के दौरान ईरान के झंडे वाले पोतों को निशाना बनाया है। इसके बाद अमेरिकी युद्धपोतों पर दागी जा रही ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों का नया खतरा सामने आया है।
बंदर अब्बास बंदरगाह शहर से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित केश्म द्वीप, होर्मुज पर नियंत्रण स्थापित करने की ईरान की कोशिशों के लिए महत्वपूर्ण है। इस घटनाक्रम ने समुद्री रास्तों और तेल सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता और बढ़ा दी है।
निष्कर्ष
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की सुरक्षा जांच के लिए हुई रोक ने क्रूड की कीमतों और सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ाया है। भारत में ईंधन कीमतों पर असर का अगला संकेत पाइपलाइन की बहाली और वैकल्पिक क्रूड सप्लाई की स्थिति से मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. सऊदी अरब ने कौन-सी पाइपलाइन बंद की है?
सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को सुरक्षा जांच के लिए बंद किया है।
Q. पाइपलाइन बंद करने की वजह क्या बताई गई है?
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इराक से आए ड्रोन हमलों के बाद इसे एहतियातन रोका गया।
Q. पाइपलाइन की तेल ले जाने की क्षमता कितनी है?
यह पाइपलाइन रोजाना 50-70 लाख बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखती है।
Q. क्रूड ऑयल की कीमत कितनी बढ़ी?
क्रूड ऑयल 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
Q. भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है?
अगर रुकावट लंबे समय तक रहती है और वैकल्पिक सप्लाई महंगी पड़ती है, तो ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
Q. बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्यों अहम है?
यह समुद्री परिवहन का महत्वपूर्ण मार्ग है और होर्मुज के विकल्प के तौर पर देखा जाता है।
Q. केश्म द्वीप कहां स्थित है?
कश्म द्वीप बंदर अब्बास बंदरगाह शहर से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित है।













