नेपाल-तिब्बत सीमा पर बड़े भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। अब तक 160 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।
भूस्खलन से मिट्टी और मलबे का तेज बहाव उत्तरी नेपाल के कस्बों की ओर पहुंचा। इसकी चपेट में इमारतें, सड़कें और वाहन आए। पर्वतारोहियों और तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय इलाके भी प्रभावित हुए हैं। यह सीमा नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 64 किलोमीटर उत्तर में है।
भोते कोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे भीषण बाढ़ आई। सीमा के तिब्बती हिस्से के गांवों से भी मौतों की खबर मिली है। नेपाली अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका जताई है।
भूकंप की वजह पर स्थिति साफ नहीं
नेपाल के विदेश मंत्री ने शुरुआती तौर पर कहा था कि भूस्खलन से कुछ समय पहले तिब्बत-नेपाल सीमा पर भूकंप की खबर मिली थी। इससे आपदा के पीछे भूकंप की संभावना जताई गई थी।
हालांकि, अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के विश्लेषण में कहा गया कि उस इलाके में कोई भूकंप नहीं आया। इससे भूस्खलन की वास्तविक वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वीडियो में मिट्टी और चट्टानों का तेज बहाव दिखाई देता है। नुवाकोट इलाके में लोग आगे बढ़ते मलबे से बचने के लिए भागते नजर आए। यह इलाका बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।
परिवार और घर खोने वालों की आपबीती
नुवाकोट की कल्पना मल्ला ने बताया कि उनके पिता, मां, बहन और बहन के बच्चे उनकी आंखों के सामने बाढ़ में बह गए। वह और उनका बेटा एक घर की छत पर चढ़कर बच सके। उनके मुताबिक, उन्हें खुद समझ नहीं आया कि वे कैसे बच पाए।
उनके बेटे सुगम मल्ला ने कहा कि उन्होंने अपनी मां का हाथ खींचकर उन्हें बचाया। उन्होंने बाढ़ से पहले अपना फोन अपनी बहन को दिया था, ताकि वह सुरक्षित रह सकें और मदद के लिए संपर्क कर सकें। अब उनकी बहन से संपर्क नहीं हो पा रहा है और फोन बंद है।
एक अन्य प्रभावित महिला गोमा पंडित ने बताया कि उनकी भैंसें और बाकी मवेशी बह गए। उनकी खेती की जमीन भी नष्ट हो गई। उन्होंने कहा कि सरसों के बीजों की 10 बोरियां, कई टन मक्का और धान बह गए।
रसुवा जिले के रसुवा स्याब्रु बेन्सी गांव में रहने वाले सोनम दोरजी विदेशी पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग गाइड हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 9 बजे गांव में बाढ़ आई। वह इससे एक घंटे पहले तय यात्रा के लिए काठमांडू रवाना हो चुके थे।
सोनम की बहन डेचन तामांग, उनके पति और परिवार के कई अन्य सदस्य लापता हैं। सोनम ने बताया कि गांव से निकलते समय उन्हें बाढ़ की आवाजें सुनाई दे रही थीं। उनका घर ढह गया है और उन्होंने उसकी तस्वीर देखी है।
सोनम के मुताबिक, बाढ़ अचानक आई और उसने भारी तबाही मचाई। कई लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को बचाने, सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, खाना, अस्थायी ठिकाना और चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है। अपनी बहन के जीवित मिलने की उम्मीद के बारे में उन्होंने कहा कि यह 10 फ़ीसदी है।
विदेशी नागरिक भी लापता
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, लापता विदेशी नागरिकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं।
प्रभावित इलाकों में राहत और तलाशी अभियान जारी है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि पूरा देश स्तब्ध और बेहद परेशान है। उन्होंने बताया कि अधिकारी राहत और बचाव अभियान में चीन के साथ मिलकर काम करेंगे।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत और तलाशी अभियान को पूरी ताकत से चलाने की अपील की। उन्होंने ऐसी घटनाओं के असर को कम करने के लिए निगरानी और पहले से चेतावनी देने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करने की बात कही।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार नेपाल को हर तरह की मानवीय मदद देने के लिए तैयार है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने भी नेपाल में मौजूद ब्रिटिश नागरिकों की मदद के लिए हर संभव कोशिश करने की बात कही।














