बिजनेस और प्रोफेशन से कमाने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 है। इस दायरे में आने वाले छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और कुछ पार्टनरशिप फर्म शामिल हैं।
इस तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं करने पर सामान्य रिटर्न के बजाय बिलेटेड रिटर्न भरना होगा। इसके साथ लेट फीस भी देनी पड़ सकती है। ITR-3, ITR-4, ITR-5 और ITR-7 फॉर्म भरने वाले कई कारोबारी और प्रोफेशनल इस समयसीमा के दायरे में आते हैं।
कुल सालाना आय ₹5 लाख से अधिक होने पर धारा 234F के तहत ₹5000 की लेट फीस लग सकती है। ₹5 लाख तक की आय के मामले में अधिकतम ₹1000 लेट फीस देनी होती है। हालांकि, मूल छूट सीमा से कम कुल आय होने पर धारा 234F के तहत लेट फीस नहीं लगती।
टैक्स बकाया होने पर धारा 234A के तहत 31 अगस्त के बाद रिटर्न दाखिल करने तक हर महीने 1% साधारण ब्याज जुड़ सकता है। महीने का कोई हिस्सा भी ब्याज की गणना में शामिल किया जाता है।
समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने का असर नुकसान को आगे समायोजित करने पर भी पड़ सकता है। शेयर ट्रेडिंग, फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस में हुए नुकसान को अगले 8 सालों के मुनाफे से समायोजित करने के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। बिलेटेड रिटर्न में यह सुविधा नहीं मिलती।
हालांकि, सभी टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त अंतिम तारीख नहीं है। जिन कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। धारा 44AD या 44ADA के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन चुनने वाले ऐसे करदाता, जिन पर टर्नओवर या फायदे की शर्तों के कारण ऑडिट लागू होता है, उन्हें भी 31 अक्टूबर तक समय मिलता है।
ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े मामलों में अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 है। यह समयसीमा उन कंपनियों या संस्थाओं पर लागू है, जो विदेशी या घरेलू एसोसिएट कंपनी के साथ ऐसे लेनदेन करती हैं।
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिलेटेड या रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम समयसीमा 31 दिसंबर 2026 है। 31 अगस्त के बाद रिटर्न दाखिल करने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को तब तक लेट फीस और लागू ब्याज का सामना करना पड़ सकता है।









