केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यह मांग दिल्ली समेत कई राज्यों में कथित हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों को लेकर की गई है।

केंद्र का कहना है कि इन प्रदर्शनों के बाद कई छात्रों और उनके परिवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए। सरकार ने अदालत से कहा है कि असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए इन मामलों को निरस्त किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने मामले में जल्द हस्तक्षेप की मांग की और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया।

अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय के लिए जरूरी आदेश पारित करने की शक्ति देता है। केंद्र इसी प्रावधान के आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR हटाने की मांग कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को तय है।

याचिका में कहा गया है कि नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों और अभिभावकों में व्यापक आक्रोश था। कुछ जगहों पर प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ा और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। इसके बाद दिल्ली और अन्य राज्यों में कई FIR दर्ज की गईं।

किन आरोपों से जुड़े हैं मामले

याचिका में प्रदर्शनकारियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हिंसा भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। केंद्र के अनुसार, कुछ मामलों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई भी की है।

सरकार का तर्क है कि इन आपराधिक मामलों का असर बड़ी संख्या में युवा छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। इसी वजह से उसने सुप्रीम कोर्ट से पूरे घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में देखने और FIR रद्द करने का आग्रह किया है।

सॉलिसिटर जनरल ने छात्रों के हितों और मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई पर जोर दिया। अदालत इस अनुरोध पर आगे की प्रक्रिया सुनवाई के दौरान तय करेगी।

CJP का विरोध मार्च

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र के रुख की आलोचना की है। पार्टी का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों से किए गए आश्वासन पूरे नहीं हुए। CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।

मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। पार्टी के मुताबिक, इसमें नीट पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवार और अभिभावक शामिल होंगे। पुलिस बर्बरता और अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाने वाले लोग भी मार्च में हिस्सा लेंगे।

CJP का कहना है कि सरकार अदालत में FIR रद्द कराने की मांग कर रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर जमीन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी ने मार्च शांतिपूर्ण रखने का दावा किया है और दिल्ली पुलिस से पर्याप्त सुरक्षा तथा अनुमति सुनिश्चित करने की मांग की है।

निष्कर्ष

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम होगी, क्योंकि केंद्र ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR हटाने के लिए अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल की मांग की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची है?

केंद्र ने नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कराने की मांग की है।

Q. FIR किन आरोपों से जुड़ी हैं?

मामले सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, हिंसा भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसे आरोपों से जुड़े हैं।

Q. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से किसने मामला उठाया?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिका का उल्लेख किया।

Q. अनुच्छेद 142 क्या है?

यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय के लिए जरूरी आदेश पारित करने की शक्ति देता है।

Q. मामले की अगली सुनवाई कब है?

मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को तय की गई है।

Q. CJP ने क्या घोषणा की है?

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।

Q. मार्च में कौन शामिल होगा?

पार्टी के अनुसार, प्रभावित छात्रों के परिवार, अभिभावक और पुलिस कार्रवाई पर आरोप लगाने वाले लोग मार्च में शामिल होंगे।