भारत के 5 अतिरिक्त S-400 ‘सुदर्शन’ लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के टेंडर पर रूस ने रक्षा मंत्रालय को अपना विस्तृत प्रस्ताव सौंप दिया है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव मिल चुका है और फिलहाल उसकी जांच-प्रक्रिया चल रही है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹50,000 करोड़ से ज्यादा बताई गई है।

यह घटनाक्रम 30 अगस्त 2026 को सामने आया। भारत ने मार्च 2026 में 5 और S-400 स्क्वाड्रन खरीदने की योजना मंजूर की थी। यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिया गया था। प्रस्तावित यूनिट्स को पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर तैनात करने की योजना है, ताकि देश का layered air defence network और मजबूत हो सके।

पहले करार की डिलीवरी की स्थिति

भारत और रूस के बीच 2018 में हुए पहले करार के तहत 5 S-400 स्क्वाड्रन मिलने थे। इनमें से 4 स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं। आखिरी स्क्वाड्रन की डिलीवरी नवंबर 2026 तक होने की उम्मीद है।

नए करार के तहत मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी करार पर हस्ताक्षर होने के करीब 3 साल बाद शुरू होने की संभावना है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी होने या अंतिम करार पर हस्ताक्षर की तारीख नहीं बताई गई है।

ऑपरेशन सिंदूर में सिस्टम की भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने भारत की एयर डिफेंस क्षमता में अहम भूमिका निभाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिस्टम ने पाकिस्तानी surveillance और fighter aircraft को निशाना बनाया। इसके असर से कई अन्य विमानों ने भारतीय सीमा से 200 किलोमीटर के दायरे में उड़ान भरने से परहेज किया।

वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने ANI के साथ हालिया podcast में कहा कि S-400 ने 314 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान एयर फोर्स के surveillance aircraft को नष्ट किया। उनके मुताबिक, यह संभवतः surface-to-air missile से दर्ज की गई सबसे लंबी दूरी की kill थी।

उन्होंने यह भी कहा कि सिस्टम ने पाकिस्तान के कई fighter aircraft को निशाना बनाया। इनमें चीन से पाकिस्तान को मिले J-10 विमान भी शामिल थे।

S-400 को खोजने की कोशिश का दावा

एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने S-400 सिस्टम का पता लगाने के लिए भारत में जासूसों और sleeper cells को सक्रिय किया था। उपलब्ध सामग्री में इस दावे से जुड़ी किसी अलग कार्रवाई या गिरफ्तारी का विवरण नहीं दिया गया है।

भारत S-400 सिस्टम के लिए 280 से ज्यादा अतिरिक्त मिसाइलें भी खरीद रहा है। इसका उद्देश्य देश के missile arsenal में उपलब्ध संख्या को बढ़ाना है।

भारत का स्वदेशी विकल्प

S-400 की अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद के साथ भारत लंबी दूरी के अपने एयर डिफेंस सिस्टम पर भी काम कर रहा है। Project Kusha के तहत विकसित किए जा रहे सिस्टम ने हाल में करीब 140 किलोमीटर की दूरी पर simulated target को नष्ट करने में शुरुआती सफलता हासिल की।

इसके अलावा, Mission Sudarshan Chakra के तहत देश की पूरी लंबाई और चौड़ाई में एक बड़ा air shield तैयार करने की योजना है। इसके लिए अलग-अलग एजेंसियां प्रमुख सिस्टम खरीद रही हैं। उपलब्ध जानकारी में इस मिशन की अंतिम तैनाती की तारीख नहीं दी गई है।

आगे क्या होगा

फिलहाल रूस के प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय में process किया जा रहा है। इसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और करार पर हस्ताक्षर होने पर नई S-400 यूनिट्स की डिलीवरी शुरू होने में करीब 3 साल लग सकते हैं।

निष्कर्ष

रूस का प्रस्ताव भारत के 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन खरीदने की प्रक्रिया को अगले चरण में ले आया है। नई यूनिट्स, अतिरिक्त मिसाइलों और स्वदेशी Project Kusha के साथ भारत अपनी लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. भारत कितने नए S-400 स्क्वाड्रन खरीदना चाहता है?

भारत 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन खरीदने की योजना पर आगे बढ़ रहा है।

Q. रूस के प्रस्ताव की अनुमानित कीमत कितनी है?

प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹50,000 करोड़ से ज्यादा है।

Q. पहले करार के तहत भारत को कितने S-400 स्क्वाड्रन मिले हैं?

2018 के करार के तहत 5 में से 4 स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं। आखिरी स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है।

Q. नई S-400 यूनिट्स कहां तैनात की जा सकती हैं?

नई यूनिट्स को भारत के पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर तैनात करने की योजना है।

Q. नई S-400 डिलीवरी कब शुरू हो सकती है?

डिलीवरी करार पर हस्ताक्षर होने के करीब 3 साल बाद शुरू होने की संभावना है।

Q. Project Kusha क्या है?

Project Kusha भारत का लंबी दूरी का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने का कार्यक्रम है। इसके तहत करीब 140 किलोमीटर की दूरी पर simulated target को नष्ट करने की शुरुआती सफलता मिली है।