उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में फरवरी-मार्च 2027 के दौरान विधानसभा चुनाव होने के संकेत मिले हैं। इन राज्यों में जनगणना कार्यक्रम में बदलाव और विधानसभाओं के कार्यकाल की तय समाप्ति तारीखें चुनावी कैलेंडर की दिशा बता रही हैं।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना का काम आगे बढ़ाया गया है। मणिपुर में जनगणना के पहले चरण को टाल दिया गया है। इन फैसलों का मकसद चुनाव और जनगणना की ड्यूटी के बीच संभावित टकराव से बचना है। दोनों कामों में सरकारी कर्मचारियों, खासकर शिक्षकों, की बड़ी भूमिका रहती है।
किस राज्य में कार्यकाल कब खत्म होगा
मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को समाप्त होगा। इसके बाद गोवा में 14 मार्च, पंजाब में 16 मार्च और उत्तराखंड में 18 मार्च को विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है।
इन पांचों राज्यों में 2022 में साथ चुनाव हुए थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 22 मई 2022 को हुई थी। इसी वजह से अगले चुनाव भी एक साथ कराने की स्थिति में चुनाव आयोग सबसे पहले समाप्त होने वाले कार्यकाल को ध्यान में रख सकता है।
परंपरागत प्रक्रिया के तहत मतदान मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरा कराया जा सकता है। इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश में वोटिंग उसके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति से करीब 2 महीने पहले हो सकती है। यह समय पिछले 3 चुनावों के पैटर्न से भी मेल खाता है।
चुनाव की संभावित समय-सीमा
चुनाव आयोग को संवैधानिक अधिकार है कि वह किसी विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले चुनाव करा सकता है। ऐसे में फरवरी या मार्च 2027 की शुरुआत में मतदान शुरू होने की संभावना बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश में बड़ी आबादी और व्यापक भौगोलिक क्षेत्र के कारण कई चरणों में मतदान की संभावना है। हालांकि बिहार और पश्चिम बंगाल में आयोग के पिछले उदाहरणों को देखते हुए चरणों की संख्या कम भी रखी जा सकती है। अगर उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह 2 चरणों में मतदान कराने का फैसला होता है, तो प्रक्रिया फरवरी या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकती है।
मतदाता सूची की स्थिति
चुनाव वाले 3 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम पूरा हो चुका है। बाकी 2 राज्यों में यह प्रक्रिया जारी है। इसलिए चुनाव की घोषणा से पहले उन राज्यों में यह प्रक्रिया दोबारा कराने की संभावना कम बताई जा रही है।
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 13.4 करोड़ रही, जो 13.2% की कमी है। गोवा में मतदाताओं की संख्या 10.6 लाख रही और इसमें 10.2% की कमी दर्ज हुई। मणिपुर में 19.3 लाख मतदाता रहे, जो 7.6% की गिरावट है।
पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची अगले कुछ महीनों में जारी की जाएगी। इन सूचियों के जारी होने के बाद दोनों राज्यों में मतदाताओं की संख्या की अंतिम तस्वीर साफ होगी।
जनगणना कार्यक्रम में क्या बदला
केंद्र ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के बर्फ से मुक्त इलाकों और गोवा में जनसंख्या गिनती का चरण 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच कराने की जानकारी दी है। इस चरण के लिए 5 जनवरी को संदर्भ तारीख माना गया है।
मणिपुर में जनगणना के घरों की सूची बनाने वाला चरण टाल दिया गया है। आम तौर पर जनगणना का दूसरा चरण पूरे देश में फरवरी में होता है और उसमें 1 मार्च को संदर्भ तारीख माना जाता है।
4 राज्यों में जनसंख्या गिनती का चरण पहले कराने से चुनाव और जनगणना की सामान्य समय-सीमा के बीच टकराव कम करने में मदद मिल सकती है। चुनावी ड्यूटी और जनगणना, दोनों के लिए सरकारी मशीनरी के उसी बड़े कर्मचारी समूह की जरूरत पड़ती है।
निष्कर्ष
जनगणना कार्यक्रम में बदलाव और विधानसभाओं की समाप्ति तारीखों को देखते हुए 5 राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 के चुनावी कार्यक्रम की संभावना मजबूत हुई है। अंतिम कार्यक्रम और चरणों की घोषणा चुनाव आयोग करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. 2027 में किन राज्यों में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं?
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है।
Q. इन राज्यों में चुनाव कब हो सकते हैं?
चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में कराए जाने के संकेत मिले हैं।
Q. मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल कब खत्म होगा?
मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को समाप्त होगा।
Q. उत्तर प्रदेश में मतदान पहले क्यों हो सकता है?
पांचों राज्यों में साथ चुनाव कराने की स्थिति में सबसे पहले खत्म होने वाले विधानसभा कार्यकाल के हिसाब से मतदान पूरा कराया जा सकता है।
Q. जनगणना का कार्यक्रम क्यों बदला गया?
चुनाव और जनगणना के लिए सरकारी कर्मचारियों, खासकर शिक्षकों, की ड्यूटी में टकराव से बचने के लिए कार्यक्रम बदला गया है।












