पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव 2026-27 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष पद जीत लिया। ABVP उम्मीदवार अंकित बिढान ने आदिल बराड़ को हराकर यह पद हासिल किया। चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए।
अंकित को 3,149 वोट मिले, जबकि आदिल बराड़ के खाते में 2,637 वोट आए। दोनों के बीच जीत का अंतर 512 वोट रहा। गुरमन सिंह सिद्धू को 2,263 और दर्शप्रीत सिंह को 1,387 वोट मिले।
यह चुनाव जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ पहला छात्र संघ चुनाव था। प्रचार के दौरान विपक्षी छात्र संगठनों ने इस प्रदर्शन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और ABVP को घेरने की कोशिश की। इसके बावजूद अध्यक्ष पद पर ABVP उम्मीदवार की जीत हुई।
4 प्रमुख पदों के नतीजे
छात्र परिषद के 4 प्रमुख पदों पर चुने गए प्रतिनिधि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जिम्मेदारी संभालेंगे। नतीजे इस तरह रहे:
- उपाध्यक्ष पद पर अरमान सिंह भिंडर चुने गए। उन्हें 3,322 वोट मिले। आकांक्षा ठाकुर को 2,818 वोट मिले।
- सचिव पद पर ध्यान सिंह (समीर) विजयी रहे। उन्हें 4,045 वोट मिले। आर्यन सहारण को 3,678 और मुस्कान चौहान को 1,286 वोट मिले।
- संयुक्त सचिव पद पर विशाल बामल ने जीत दर्ज की। उन्हें 3,506 वोट मिले। देव राज सिंह नैन को 2,338, राम चंदर सिंह को 1,650 और अमीन कौर को 1,141 वोट मिले।
सचिव पद पर ध्यान सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आर्यन सहारण को 367 वोटों से हराया। बाकी प्रमुख पदों के लिए मिले वोटों का अंतर उपलब्ध जानकारी में अलग से नहीं बताया गया है।
चुनाव में गठजोड़ और प्रमुख मुद्दे
वोटिंग से ठीक पहले बीजेपी और अकाली दल के छात्र संगठनों ने अध्यक्ष पद के लिए आपस में हाथ मिलाया था। इस गठजोड़ का असर कैंपस के चुनावी मुकाबले में दिखाई दिया और अध्यक्ष पद ABVP के खाते में गया।
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के Gen Z मतदाताओं की बड़ी भागीदारी ने चुनाव को खास बनाया। कैंपस में स्थानीय मुद्दों के साथ जंतर-मंतर प्रदर्शन भी प्रचार का अहम हिस्सा रहा।
मुकाबले में हॉस्टल की बुनियादी सुविधाएं, फीस वृद्धि, रिसर्च स्कॉलर्स के मुद्दे और सुरक्षा जैसे सवाल चर्चा में रहे। उपलब्ध चुनावी आकलन के मुताबिक, इन स्थानीय विषयों का असर राष्ट्रीय मुद्दों से अधिक रहा।
निर्दलीय प्रत्याशियों और बागी गुटों की मौजूदगी ने बड़े दलों के चुनावी समीकरण को मुश्किल बनाया। छात्र संगठनों के बीच मुकाबला किसी एक तरफ पूरी तरह झुका हुआ नहीं माना जा रहा था।
2027 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी अहमियत
पंजाब यूनिवर्सिटी में राज्य के सभी 23 जिलों से युवा पढ़ते हैं। इसी वजह से कैंपस के नतीजों को पंजाब के पढ़े-लिखे और जागरूक युवा वर्ग के राजनीतिक रुझान के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्य की मुख्य राजनीतिक पार्टियां छात्र संघ चुनाव के जरिए अपनी नीतियों और युवाओं से जुड़ी लोकलुभावन योजनाओं की जमीनी स्थिति परख रही हैं। यहां से निकलने वाले युवा नेता 2027 के विधानसभा चुनाव में ग्राउंड कैंपेन का चेहरा बन सकते हैं।
इसी राजनीतिक अहमियत के कारण पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव को 2027 से पहले का ‘सेमीफाइनल’ कहा जा रहा है। ताजा नतीजों में छात्र संघ अध्यक्ष पद ABVP के पास गया है और चारों प्रमुख पदों के लिए नए पदाधिकारी तय हो गए हैं।
निष्कर्ष
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में ABVP की अध्यक्ष पद पर जीत ने कैंपस की छात्र राजनीति में संगठन की स्थिति मजबूत की है। नतीजों में स्थानीय छात्र मुद्दों और युवा राजनीतिक रुझान की अहम भूमिका रही।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष कौन बना?
अंकित बिढान अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
Q. अंकित बिढान कितने वोटों से जीते?
उन्होंने 512 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद जीता।
Q. पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव में उपाध्यक्ष कौन चुना गया?
अरमान सिंह भिंडर उपाध्यक्ष चुने गए।
Q. सचिव पद पर किसने जीत दर्ज की?
ध्यान सिंह (समीर) सचिव चुने गए।
Q. संयुक्त सचिव कौन बना?
विशाल बामल संयुक्त सचिव निर्वाचित हुए।
Q. चुनाव में कौन से छात्र मुद्दे प्रमुख रहे?
हॉस्टल सुविधाएं, फीस वृद्धि, रिसर्च स्कॉलर्स के मुद्दे और सुरक्षा प्रमुख सवाल रहे।
Q. पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव को 2027 से क्यों जोड़ा जा रहा है?
कैंपस में पंजाब के सभी 23 जिलों से युवा पढ़ते हैं। इसलिए नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले युवा राजनीतिक रुझान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।












