नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में बनी ग्लेशियर झीलों के प्राकृतिक बांध टूटने पर उत्तर भारत में अचानक बाढ़ आ सकती है। ऐसे घटनाक्रम में पानी के साथ बर्फ और मलबा नीचे की ओर आने का खतरा रहता है। इसका असर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंच सकता है।

हिंदूकुश हिमालय में 47 संभावित खतरनाक झीलें

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट में हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र की 47 संभावित खतरनाक झीलों की पहचान की गई है। इनमें 25 नेपाल, 21 तिब्बत और 1 झील भारत में है।

इन झीलों में 42 कोशी, 3 गंडकी और 2 कर्णाली नदी बेसिन में स्थित हैं। इस तरह करीब 96 प्रतिशत झीलें कोशी और गंडकी बेसिन में आती हैं।

बिहार पर असर की आशंका

नेपाल की कोशी और गंडकी नदियां आगे चलकर बिहार में प्रवेश करती हैं। इन दोनों नदी बेसिन में 45 संभावित खतरनाक झीलें हैं। किसी बड़ी घटना की स्थिति में इसका प्रभाव नेपाल से निकलकर बिहार के मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

नेपाल से आने वाली नदियों में जलप्रवाह अचानक बढ़ने का असर उत्तर प्रदेश पर भी पड़ सकता है। घाघरा यानी सरयू नदी, नेपाल की कर्णाली नदी का आगे का प्रवाह है। इसका ऊपरी जलागम तिब्बत तक फैला है। इसलिए ऊपरी हिमनद क्षेत्र में किसी घटना से कर्णाली-घाघरा नदी प्रभावित हो सकती है।

अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियर

उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियर चिन्हित किए गए हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 71.7 वर्ग किलोमीटर और अनुमानित बर्फ भंडार 2.39 घन किलोमीटर है। इनकी औसत ढलान करीब 33.6 डिग्री बताई गई है।

बर्फ टूटने की स्थिति में हिमस्खलन, नदी में अवरोध और अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक के मुताबिक अलकनंदा और भागीरथी घाटियों में भी ऐसी कुछ झीलें मौजूद हैं।

पिथौरागढ़ और आसपास के क्षेत्र भी जोखिम में

नेपाल से निकलने वाली महाकाली नदी उत्तराखंड में काली नदी के रूप में बहती है। नेपाल के मुगु क्षेत्र की 1 हिमनदी झील और काली नदी बेसिन की 1 अन्य झील को खतरनाक माना गया है। इनके टूटने पर पिथौरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में नुकसान हो सकता है।

वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक ने कहा कि तिब्बत से उत्तराखंड में नुकसान नहीं होगा, लेकिन नेपाल की काली नदी से पिथौरागढ़ और आसपास के इलाकों में हानि हो सकती है। उन्होंने हिमालय में मौजूद ऐसी झीलों और हैंगिंग ग्लेशियर की निगरानी की जरूरत बताई।

आईसीआईएमओडी के मार्च 2026 के आकलन के अनुसार हिंदूकुश हिमालय में 63,700 से अधिक ग्लेशियर हैं। ये करीब 55,782 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं। आकलन में यह भी बताया गया है कि 2000 के बाद बर्फ पिघलने की रफ्तार दोगुनी हुई है।