भारत अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस प्रस्ताव को दोनों देशों के रक्षा सहयोग में अहम कदम बताया है। उन्होंने आगे चलकर जैवलिन के सह-उत्पादन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

सर्जियो गोर के मुताबिक, जैवलिन लड़ाई में परखा हुआ सिस्टम है। उन्होंने मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की बताई गई दिशा का हवाला देते हुए कहा कि यह कदम संयुक्त उत्पादन के रास्ते खोल सकता है।

जैवलिन सिस्टम की खासियत

जैवलिन अमेरिका का मैन-पोर्टेबल और फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक हथियार है। इसे 1 सैनिक लॉन्च कर सकता है। मिसाइल दागने के बाद ऑपरेटर को लक्ष्य पर लगातार निशाना साधने की जरूरत नहीं रहती। सिस्टम खुद लक्ष्य को ट्रैक करता है, जिससे सैनिक अपनी स्थिति बदल सकता है।

इस हथियार में टॉप-अटैक मोड मौजूद है। इस मोड में मिसाइल टैंक के सामने वाले मजबूत हिस्से के बजाय उसके अपेक्षाकृत कमजोर ऊपरी हिस्से को निशाना बनाती है। जरूरत पड़ने पर जैवलिन को डायरेक्ट-अटैक मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

जैवलिन का निर्माण लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के संयुक्त वेंचर द्वारा किया जाता है। मिसाइल में इमेजिंग-इन्फ्रारेड सीकर और टैंडम वॉरहेड तकनीकें दी गई हैं। ये क्षमताएं इसे आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ उपयोगी बनाती हैं।

युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल और दायरा

अमेरिका और उसके सहयोगी जैवलिन का इस्तेमाल कई युद्धक्षेत्रों में कर चुके हैं। निर्माता के मुताबिक, यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से पहले ही इसे 5000 से ज्यादा बार युद्ध में दागा जा चुका था।

इसका सामान्य परिचालन दायरा लगभग 65 मीटर से 4 किलोमीटर तक बताया गया है। सिस्टम को दिन और रात, दोनों समय इस्तेमाल किया जा सकता है। अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में संचालन की क्षमता भी इसकी विशेषताओं में शामिल है।

भारत के लिए प्रस्ताव का महत्व

जैवलिन खरीद से जुड़ी प्रक्रिया नवंबर 2025 में पहले ही आगे बढ़ चुकी थी। उस समय अमेरिका ने भारत के लिए 100 जैवलिन सिस्टम और 25 लॉन्च यूनिट वाले हथियार पैकेज की संभावित बिक्री को मंजूरी दी थी।

इस पैकेज में एक्सकैलिबर आर्टिलरी म्यूनिशन भी शामिल था और इसकी कीमत करीब 93 मिलियन डॉलर थी। अब अमेरिकी राजदूत के बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच यह रक्षा सहयोग आगे बढ़ रहा है।

भारत में संभावित सह-उत्पादन को इस प्रस्ताव का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत के रक्षा औद्योगिक आधार में अमेरिकी तकनीक और उत्पादन क्षमता के जुड़ने की संभावना बन सकती है।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी भारत के साथ रक्षा उद्योगों के सहयोग और संयुक्त उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम करने की बात कही थी।

हालांकि, मौजूदा घोषणा को अंतिम खरीद अनुबंध या तत्काल घरेलू उत्पादन की पुष्टि नहीं माना जा सकता। जैवलिन का पोर्टेबल और फायर-एंड-फॉरगेट स्वरूप ऊंचाई वाले इलाकों तथा सीमित दूरी की जमीनी लड़ाई में भारत की एंटी-आर्मर क्षमता को मजबूत कर सकता है।