सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 म्युनिसिपल वार्डों में हुए चुनाव रद्द कर 6 हफ्ते के भीतर पूरी चुनाव प्रक्रिया फिर से कराने का आदेश दिया है। इन वार्डों में पटियाला जिले के 28 और मोगा जिले के 22 वार्ड शामिल हैं।
यह फैसला स्थानीय निकाय चुनावों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर रुकावटों की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट के बाद आया। अदालत ने आयोग की मुख्य findings को स्वीकार करते हुए दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया।
आयोग की रिपोर्ट में क्या कहा गया
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, नामांकन के दौरान उम्मीदवारों के कागज छीने, फाड़े या नष्ट किए गए। रिपोर्ट में उम्मीदवारों के साथ मारपीट, उन्हें हिरासत में लेने और धमकाने की बातें भी दर्ज थीं।
इस मामले की जांच हाई कोर्ट की पूर्व जज निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले एक-सदस्यीय आयोग ने की थी। आयोग की नियुक्ति 24 मार्च, 2025 को हुई थी और उसने 18 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
स्थानीय निकाय चुनाव 21 दिसंबर, 2024 को हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में चीफ जस्टिस सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना शामिल थे।
दोबारा चुनाव की निगरानी कैसे होगी
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा गया है कि वे चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाई कोर्ट बार के कम से कम दो या तीन वरिष्ठ सदस्यों को ऑब्जर्वर के रूप में नामित करें।
नामांकन फॉर्म भरने और जमा करने से लेकर उनकी जांच, चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान तक की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। यह रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर मॉनिटरिंग कमेटी को सौंपा जाएगा।
पंजाब सरकार को नामांकन शुरू होने से पहले चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की वार्ड-वार सूची मॉनिटरिंग कमेटी को देनी होगी। ड्यूटी पर तैनात डीएसपी और उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारियों की सूची भी जमा करनी होगी।
दोबारा चुनाव प्रक्रिया में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की ओर से दखल या रुकावट की शिकायत मॉनिटरिंग कमेटी के सामने की जा सकेगी। कमेटी और ऑब्जर्वर का मानदेय हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तय करेंगे। इसका खर्च पंजाब सरकार उठाएगी।
सरकार को मॉनिटरिंग कमेटी और ऑब्जर्वर को जरूरी सचिवालय, परिवहन, लॉजिस्टिक और सुरक्षा सहायता भी देनी होगी। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
याचिका की पृष्ठभूमि
पटियाला नगर निकाय में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से असंतुष्ट लोग और वे उम्मीदवार, जिन्हें कथित तौर पर नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं मिली थी, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचे थे।
10 जनवरी, 2025 को हाई कोर्ट ने पटियाला नगर निगम में चुनाव कराने की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा था कि कुछ वार्डों में चुनाव टालने से प्रक्रिया में रुकावट नहीं आएगी। इस आदेश से असंतुष्ट उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य को आयोग की सिफारिशों पर आपत्ति नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निगरानी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने से जुड़े निर्देश जारी किए।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पंजाब के 50 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया नए सिरे से होगी। 6 हफ्ते की समयसीमा, वीडियोग्राफी और निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य अदालत के निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी कराना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. किन वार्डों में दोबारा चुनाव होंगे?
पटियाला जिले के 28 और मोगा जिले के 22 वार्डों में दोबारा चुनाव होंगे। कुल 50 वार्ड इस आदेश के दायरे में हैं।
Q. दोबारा चुनाव कब तक पूरे करने हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 हफ्ते के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
Q. दोबारा चुनाव की निगरानी कौन करेगा?
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा नामित हाई कोर्ट बार के वरिष्ठ सदस्य ऑब्जर्वर के रूप में निगरानी करेंगे।
Q. चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी?
हां। नामांकन से लेकर मतदान तक की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कर रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।
Q. चुनाव ड्यूटी से जुड़ी कौन-सी सूची देनी होगी?
पंजाब सरकार को चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की वार्ड-वार सूची देनी होगी। डीएसपी और उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारियों की सूची भी जमा करनी होगी।
Q. दोबारा चुनाव में रुकावट की शिकायत कहां की जा सकेगी?
किसी अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से दखल या रुकावट की शिकायत मॉनिटरिंग कमेटी के सामने की जा सकेगी।








