भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को गिरावट और तेज हो गई। दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 700 से ज्यादा अंक टूटकर 71,900 के नीचे आ गया। निफ्टी 50 में भी 200 से अधिक अंकों की गिरावट रही और यह 22,400 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था।

इस गिरावट का सीधा असर बाजार के कुल मूल्यांकन पर पड़ा। BSE पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹7 लाख करोड़ घट गया। यह कमी बाजार खुलने के 3 घंटे से भी कम समय में दर्ज हुई।

बाजार पर एक साथ कई दबाव

निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाली वजहों में RBI की सख्त नीति सबसे प्रमुख रही। RBI ने करीब 4 साल बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाई। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया।

जेफरीज को मौजूदा चक्र में करीब 100 बेसिस पॉइंट तक और बढ़ोतरी की उम्मीद है। ब्याज दरों से जुड़ी यह आशंका शेयरों के प्रति निवेशकों के रुख पर असर डाल रही है।

अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया। US के 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.3% से अधिक रही, जबकि 2-साल के बॉन्ड की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे माहौल में इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का असर

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। जहाजों पर हमलों में बढ़ोतरी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जोखिम ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।

भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और कंपनियों की लागत, दोनों पर असर डाल सकता है। इसी वजह से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी और शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की कमजोरी बढ़ाई। NSE के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों में 6,121 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की। बुधवार तक FII लगातार नौ सेशन में भारतीय शेयर बेच चुके थे और इस दौरान बिक्री करीब 57,000 करोड़ रुपये रही।

सितंबर की शुरुआत से अब तक 25 में से 20 सेशन में विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों के नेट सेलर रहे हैं। यह आंकड़ा बाजार में विदेशी पूंजी के दबाव को दिखाता है।

अमेरिकी फेड पर भी नजर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार sentiment को प्रभावित कर रही है। CME FedWatch के मुताबिक, ट्रेडर्स को इस महीने दर बढ़ने की संभावना सिर्फ 18% दिख रही है।

दिसंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 80% आंकी जा रही है। ब्याज दरों को लेकर यह अंतरराष्ट्रीय चिंता भारतीय बाजार में निवेशकों की सतर्कता बढ़ाने वाली वजहों में शामिल है।

निष्कर्ष

गुरुवार की गिरावट के पीछे RBI की बदली नीति, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल, महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी फेड से जुड़ी चिंता एक साथ दिखी। इन दबावों के बीच सेंसेक्स 71,900 और निफ्टी 50 22,400 के नीचे कारोबार करता नजर आया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. गुरुवार को सेंसेक्स किस स्तर से नीचे चला गया?

दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 700 से ज्यादा अंक गिरकर 71,900 के नीचे आ गया।

Q. निफ्टी 50 में कितनी गिरावट हुई?

निफ्टी 50 में 200 से अधिक अंकों की गिरावट हुई और यह 22,400 से नीचे कारोबार करने लगा।

Q. बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन कितना घटा?

BSE पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹7 लाख करोड़ घट गया।

Q. विदेशी निवेशकों ने बुधवार को कितने शेयर बेचे?

NSE के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 6,121 करोड़ रुपये से अधिक के भारतीय शेयर बेचे।

Q. ब्रेंट क्रूड किस स्तर से ऊपर पहुंचा?

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।