भारतीय फ्रंटियर मॉडल कंपनी सर्वम ने रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका लक्ष्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का साझा ढांचा तैयार करना है। यह ढांचा मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तहत आने वाले संयुक्त, तीनों सेनाओं से जुड़े और एकीकृत संगठनों तक भी लागू होगा।
इस समझौते के बाद सर्वम तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल, प्रशिक्षण और निर्णय-सहायता जरूरतों के लिए एआई एप्लिकेशन डिजाइन, विकसित और तैनात करेगी। कंपनी इन प्रणालियों के लिए आगे तकनीकी मदद भी देगी। समझौते के तहत अलग-अलग सेवाओं से जुड़े कई प्रोजेक्ट लिए जाएंगे और मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ इनके लिए समन्वय करेगा।
इस पहल का एक अहम हिस्सा एआई क्षमताओं को भारत में विकसित करना और उन्हें संप्रभु ढांचे पर चलाना है। काम में भारतीय डेटा और कंप्यूट का इस्तेमाल करने पर जोर रहेगा। इससे रक्षा सेवाओं के लिए तैयार होने वाली एआई परत को देश के भीतर विकसित और तैनात करने का लक्ष्य सामने आता है।
किन क्षेत्रों में इस्तेमाल होगा एआई
तीनों सेनाओं को समान फाउंडेशन मॉडल, एजेंटिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जियोस्पेशियल तथा परसेप्शन सिस्टम तक पहुंच मिलेगी। प्रस्तावित काम में निर्णय-सहायता, टारगेट एक्विजिशन और सेंसर से शूटर तक जाने वाली प्रक्रिया में डेटा फ्यूजन शामिल हैं।
इन प्रणालियों का इस्तेमाल ऑपरेशनल फैसलों में मदद के लिए होगा, लेकिन अंतिम संचालन संबंधी निर्णयों पर मानव निगरानी बनी रहेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समझौता ज्ञापन का उद्देश्य एआई को रक्षा क्षमताओं से जोड़ने वाला ऐसा ढांचा बनाना है, जो अलग-अलग सेवाओं की जरूरतों के बीच साझा आधार दे सके।
सर्वम की ओर से यह काम चाणक्य संभालेगा। यह कंपनी का फायरवॉल वाला विभाग है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े काम पर केंद्रित है। चाणक्य सर्वम के एआई स्टैक का इस्तेमाल करेगा। इसमें Sarvam 105B जैसे फाउंडेशन मॉडल शामिल हैं।
आत्मनिर्भर रक्षा के साथ एआई पर जोर
समझौता ज्ञापन को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और रक्षा उपकरणों तथा क्षमताओं के स्वदेशीकरण की सरकारी दिशा से जोड़ा गया है। अब इसी प्राथमिकता का विस्तार एआई तक किया जा रहा है। इसके तहत भारत में विकसित तकनीक, भारतीय डेटा और देश के नियंत्रण वाले कंप्यूट ढांचे पर जोर दिया गया है।
समझौते के तहत सर्वम और मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर मिलकर काम करेंगे। इनमें ऐसा एआई फैब्रिक बनाना भी शामिल है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ सके। परियोजनाओं की संख्या या उनकी समयसीमा के बारे में कोई विवरण की जानकारी अभी नहीं है।
सर्वम के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारत के लिए भारत में एआई बनाना है। उन्होंने तीनों सेनाओं के साथ देश की रक्षा से जुड़े काम को सम्मान और विशेषाधिकार बताया।
निष्कर्ष
सर्वम और मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ का समझौता तीनों सेनाओं के लिए साझा, स्वदेशी और संप्रभु ढांचे पर चलने वाले एआई प्रोजेक्ट्स का आधार तैयार करता है। शुरुआती फोकस ऑपरेशनल काम, प्रशिक्षण, निर्णय-सहायता और रक्षा क्षमताओं के बीच डेटा जोड़ने पर रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह समझौता किन संस्थाओं के बीच हुआ है?
सर्वम और रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के बीच समझौता ज्ञापन हुआ है।
Q. इस पहल में कौन-कौन सी सेनाएं शामिल हैं?
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना इस ढांचे के दायरे में हैं।
Q. सर्वम किस तरह के एआई एप्लिकेशन बनाएगी?
कंपनी ऑपरेशनल, प्रशिक्षण और निर्णय-सहायता जरूरतों के लिए एआई एप्लिकेशन विकसित और तैनात करेगी।
Q. एआई का इस्तेमाल किन प्रमुख क्षेत्रों में होगा?
प्रमुख क्षेत्रों में निर्णय-सहायता, टारगेट एक्विजिशन और सेंसर से शूटर तक डेटा फ्यूजन शामिल हैं।
Q. क्या ऑपरेशनल फैसले पूरी तरह एआई लेगा?
नहीं। ऑपरेशनल निर्णयों पर मानव निगरानी बनाए रखने की बात कही गई है।
Q. एआई ढांचा कहां विकसित और तैनात किया जाएगा?
उद्देश्य एआई परत को भारत में विकसित करना और संप्रभु इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैनात करना है।
Q. इस काम को सर्वम की ओर से कौन संभालेगा?
सर्वम का चाणक्य विभाग राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े इस काम को संभालेगा।

