भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने Shri Ram Finance Corporation Private Limited पर ₹8.10 लाख का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई कंपनी की गवर्नेंस और ग्राहक पहचान यानी केवाईसी से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं करने पर की गई।

आरबीआई के आदेश की तारीख 19 अगस्त 2026 है। नियामक ने यह जुर्माना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58G(1)(b) और धारा 58B(5)(aa) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगाया।

मामला कंपनी की उस वित्तीय स्थिति से संबंधित वैधानिक जांच के बाद सामने आया, जो 31 मार्च 2025 को थी। जांच में आरबीआई के निर्देशों के पालन से जुड़ी कुछ कमियां मिलीं। इन निष्कर्षों और उनसे संबंधित पत्राचार के आधार पर कंपनी को कारण बताओ नोटिस भेजा गया।

नोटिस में कंपनी से पूछा गया था कि संबंधित निर्देशों का पालन नहीं करने पर उसके खिलाफ जुर्माना क्यों न लगाया जाए। आरबीआई ने कंपनी के जवाब, बाद में दिए गए अतिरिक्त जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान रखी गई मौखिक दलीलों पर विचार किया। इसके बाद नियामक ने कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को कायम पाया।

आरबीआई के अनुसार, कंपनी ने एक निदेशक की नियुक्ति से पहले लिखित अनुमति नहीं ली। इस नियुक्ति के कारण प्रबंधन में बदलाव हुआ था, क्योंकि स्वतंत्र निदेशकों को छोड़कर कंपनी के निदेशकों में 30 प्रतिशत से अधिक का बदलाव हुआ।

कंपनी पर ग्राहकों को कम, मध्यम और अधिक जोखिम वाली श्रेणियों में बांटने की व्यवस्था लागू नहीं करने की बात भी सामने आई। यह वर्गीकरण व्यवस्था ग्राहक जोखिम के आधार पर तैयार की जानी थी।

इसके अलावा, कंपनी कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड निर्धारित समयसीमा के भीतर Central KYC Records Registry पर अपलोड करने में भी विफल रही। आरबीआई ने इन तीनों नियामकीय कमियों को मौद्रिक जुर्माने के लिए पर्याप्त माना।

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में मिली कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य कंपनी और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर फैसला देना नहीं है।

आरबीआई ने यह भी कहा कि जुर्माना लगाया जाना कंपनी के खिलाफ शुरू की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर असर नहीं डालता। आदेश में कंपनी के साथ ग्राहकों के लेनदेन या समझौतों के संबंध में कोई अलग निष्कर्ष नहीं दिया गया है।