दिल्ली में आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 14-15 में यह खर्च 2 लाख करोड़ था, जबकि इस साल इसका बजट करीब 12 लाख करोड़ है।

राज्यों को पूंजी निर्माण के लिए दिए जाने वाले अनुदान को जोड़ने पर प्रभावी पूंजीगत खर्च 17.15 लाख करोड़ तक पहुंचता है।

निजी निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश

अनुराधा ठाकुर के मुताबिक, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित योजनाएं भी चलाई गई हैं। इनमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण की व्यवस्था शामिल है।

उन्होंने निवेश के लिए प्लग-एंड-प्ले पार्कों के मॉडल का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह मॉडल सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल पार्कों से आगे बढ़कर केमिकल और बायोफार्मा पार्कों तक पहुंच गया है।

इन पार्कों से वैश्विक और घरेलू पूंजी आकर्षित करने के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। ठाकुर ने अलग-अलग क्षेत्रों में लागू उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनमें से कुछ योजनाएं बेहद सफल रही हैं।

निष्कर्ष

अनुराधा ठाकुर के बयान के अनुसार, सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने के साथ निजी निवेश के लिए भागीदारी, निवेश पार्कों और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. सार्वजनिक पूंजीगत खर्च कितना बढ़ा है?

14-15 में यह 2 लाख करोड़ था। इस साल इसका बजट करीब 12 लाख करोड़ है।

Q. प्रभावी पूंजीगत खर्च कितना है?

राज्यों को पूंजी निर्माण के लिए अनुदान जोड़ने पर प्रभावी पूंजीगत खर्च 17.15 लाख करोड़ है।

Q. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए क्या व्यवस्था बताई गई?

सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और लक्षित योजनाओं का उल्लेख किया गया।

Q. प्लग-एंड-प्ले निवेश पार्क किन क्षेत्रों में हैं?

इनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, केमिकल और बायोफार्मा पार्क शामिल हैं।

Q. इन निवेश पार्कों से क्या परिणाम बताए गए?

इनसे वैश्विक और घरेलू पूंजी आकर्षित करने के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं।